राज्य कृषि समाचार (State News)

निमाड़ के कपास की विदेशों में मांग, उपज का तरीका जानने जूना बिलवा पहुंचे विदेशी मेहमान

30 अक्टूबर 2024, खरगोन, (दिलीप दसौंधी): निमाड़ के कपास की विदेशों में मांग, उपज का तरीका जानने जूना बिलवा पहुंचे विदेशी मेहमान – कपास की फसल में रासायनिक खादों का प्रयोग न करके किसान गोबर की खाद का उपयोग करें। जिससे भूमि की जलधारण क्षमता, वायु संचरण और कार्बन पदार्थ की मात्रा में वृद्धि होती है। गोबर की खाद फसलों के लिए उपयुक्त है।

यह जानकारी चायना की विक्टोरिया सिक्रेट के अधिकारी मिस्टर एलिक्स ने गतदिनों जिले के सुदूर वनवासी अंचल भगवानपुरा जनपद के ग्राम जूना बिलवा में निरंजनलाल फाउंडेशन द्वारा आयोजित कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कही। चायना से आए श्री एलिक्स ने कपास की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए रासायनिक का उपयोग कम कर, गोबर खाद का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। इसके अलावा महिला किसानों को खेती कार्य के निर्णय में शामिल करने की सीख भी दी।
कार्यक्रम में फाउंडेशन के श्री आशुतोष अग्रवाल ने कहा कि निमाड़ के कपास की मांग विदेशों में अधिक है। हमारे यहां के कपास के रेशे की गुणवत्ता अन्य राज्यों के कपास के मुकाबले काफी बेहतर है। निरंजनलाल अग्रवाल फाउंडेशन कई वर्षों से कपास की गुणवत्ता के लिए निमाड़ जिले में काम कर रहा है, हमारा प्रयास है कि कम लागत में कैसे कपास की उन्नत फसल ली जाए और किसानों को लाभ पहुंचे।

बिटल रिजन साल्यूशन संस्था दिल्ली के श्री राजीव बर्वा, श्री अमूल मिश्रा, श्री हेमंत राजपूत ने कपास की सघन खेती (॥ष्ठक्कस्) की जानकारी के साथ ही किसानों को जैव विविधता और रीजन एग्री पद्धति से खेती करके किसानों को किस तरह लाभ मिल सकता है। साथ ही कपास की काठी को खेतों में न जलाएं इसे काले सोने में बदलना है। जिसे श्री राजीव बर्वा ने बायोचार नाम दिया। उसके बारे में विस्तार से समझाया। भारत में स्थित वर्धमान टेक्सटाइल कंपनी के प्रमुख अधिकारियों ने किसानों को कपास खेती में रेशे की गुणवत्ता किस तरह बनाए रखे, उसके लिए प्रेरित किया। साथ ही बताया कि, दिनरात मेहनत करते हैं किसान। कपास उगाने वाले किसानों को अच्छा दाम मिले।

निमाड़ में कपास की अच्छी पैदावार है। यदि एक मंच पर किसान और इंडस्ट्री एक साथ समाधान निकालेगी तो किसान की आय दोगुनी हो जाएगी। विदेशी मेहमानों ने मध्य प्रदेश की अग्रणी कपास जीनिंग के. के. फाइबर्स जो खरगोन में स्थित है। उसका भी भ्रमण किया। के. के. फाइबर्स के डायरेक्टर श्री प्रीतेश अग्रवाल ने बताया कि किस तरह खेत से किसान और जिनिंग तक कपास पहुंचता है उसकी प्रक्रिया और कपास से गठान बनने की प्रक्रिया को बताया।

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निरंजन लाल संस्था की तरफ से श्री रविन्द्र यादव क्लस्टर मैनेजर और श्री अर्जुन सिंह पटेल परियोजना समन्वयक ने किसानों और विदेशी मेहमानों को धन्यवाद दिया। साथ ही बीटल संस्था की तरफ केविन शाहदरिया, दिव्या बासवानी ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।

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