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एनएफएल ने डीलरों की सिक्योरिटी राशि कई गुना बढ़ाई, कृषि आदान व्यापारियों में असंतोष

लेखक: सचिन बोन्द्रिया

17 मार्च 2026, इंदौरएनएफएल ने डीलरों की सिक्योरिटी राशि कई गुना बढ़ाई, कृषि आदान व्यापारियों में असंतोष – नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (एनएफएल) द्वारा जारी पत्र के अनुसार उर्वरक विक्रेताओं के लिए प्राइस सिक्योरिटी डिपॉजिट (EMD) राशि में संशोधन करते हुए इसे कई गुना बढ़ा दिया गया है। कंपनी ने यह प्रावधान पूरे देश में लागू करते हुए डीलरों को बढ़ी हुई राशि 31 मार्च 2026 तक जमा करने के निर्देश दिए हैं।

पत्र के अनुसार अब डीलरों के लिए सिक्योरिटी राशि इस प्रकार निर्धारित की गई है –

  • सामान्य श्रेणी : 2 लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये
  • विशेष श्रेणी : 1 लाख से बढ़ाकर 7.5 लाख रुपये
  • आरक्षित श्रेणी : 50 हजार से बढ़ाकर 5 लाख रुपये

कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय सीमा तक राशि जमा नहीं करने की स्थिति में 1 अप्रैल 2026 से संबंधित विक्रेताओं की उर्वरक आपूर्ति प्रभावित हो सकती है तथा आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए उनकी डीलरशिप समाप्त कर नई नियुक्ति की प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है।

इस निर्णय को लेकर देशभर के कृषि आदान व्यापारियों में असंतोष देखा जा रहा है। जानकारों का कहना है कि इतनी बड़ी सिक्योरिटी राशि जमा कराने के बावजूद कंपनियां उर्वरक आपूर्ति की कोई निश्चित गारंटी नहीं देतीं। मध्यप्रदेश में पहले से ही उर्वरक वितरण का अनुपात लगभग 70:30 है और अब ई-टोकन प्रणाली भी लागू हो चुकी है, जिसके कारण डीलरों को वर्ष भर में सीमित मात्रा में ही माल मिल पाता है।

जानकारों के अनुसार यूरिया खाद का कुल ट्रेड मार्जिन लगभग दो दशक पूर्व निर्धारित किया गया था, जो वर्तमान में प्रति बोरी लगभग ₹16.88 है, जिसमें हम्माली, गोदाम किराया, लोडिंग-अनलोडिंग तथा अन्य संचालन संबंधी खर्च भी शामिल हैं। इतने सीमित मार्जिन में बढ़ती लागत और अतिरिक्त आर्थिक दायित्वों को वहन करना व्यापारियों के लिए कठिन होता जा रहा है।

जानकारों का कहना है कि अब ऊपर से एनएफएल द्वारा सिक्योरिटी राशि को 5 से 10 गुना तक बढ़ा दिया गया है। ऐसे में यह देखना होगा कि यह अतिरिक्त आर्थिक बोझ विक्रेता स्वयं वहन करता है या फिर बाजार व्यवस्था के माध्यम से किसानों पर डालकर उसकी भरपाई की जाती है। ऐसी परिस्थितियों में यूरिया और डीएपी की कालाबाजारी की घटनाओं में बढ़ोतरी होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

कृषि व्यापारियों का यह भी कहना है कि यदि इस निर्णय का समय रहते विरोध नहीं किया गया तो अन्य उर्वरक कंपनियां भी इसी प्रकार की नीति अपना सकती हैं। इसलिए इस विषय को केंद्र सरकार के उर्वरक विभाग तथा फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एफएआई) के समक्ष उठाकर हस्तक्षेप की मांग की जा रही है।

शेर

बढ़ती जा रही हैं शर्तें कारोबार की राहों में,

मगर भरोसे की कोई गारंटी कहीं लिखी नहीं मिलती।

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