अस्थायी जलभराव वाले स्थान के लिए मोल जल निकास प्रणाली

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  • डॉ. रामाधार सिंह
  • डॉ. के.पी. सिंह
    प्रधान वैज्ञानिक, भा.कृ.अ.प.-केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल (म.प्र.)
  •  डॉ. मनोज कुुमार
    वैज्ञानिक, भा.कृ.अ.प.-केन्द्रीद्य य कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल (म.प्र.)
  •  नेहा कुशवाह
  •  इंजी. सतीश कु. सिंह
    वरिष्ठ शोध अद्धेयता, निकरा परियोजना, भा.कृ.अ.प.-के.कृ.अ.संस्थान, भोपाल (म.प्र.)

8 फरवरी 2021,भोपाल, मोल जल निकास प्रणाली- मोल जल निकासी प्रणाली एक महत्वपूर्ण तकनीक है जिसका उपयोग अस्थायी जलभराव वाले क्षेत्र में किया जा रहा है। यह एक उप सतह जल निकासी पद्धति है जो व्यापक रूप से चिकनी मृदा में उपयोग की जाती है। अनिश्चित जलभराव की स्थिति सिंचाई या उच्च वर्षा के कारण उत्पन्न होती है। यह जल निकासी प्रणाली का उपयोग मध्य भारत और महाराष्ट्र में पाई जाने वाली काली मृदा के लिए किया जाता है। सोयाबीन, मक्का, टमाटर और पपीता जैसी फसलें लंबे समय तक जलभराव की स्थिति को सहन करने में असमर्थ होती है। ऑक्सीजन की कमी के कारण सोयाबीन की फसल में नाइट्रोजन फिक्सिंग नोड्यूल्स नष्ट हो जाते है। दो-तीन दिन या उससे अधिक दिनों तक जलभराव से सोयाबीन की फसल खराब हो सकती है।

यह पिछले कुछ वर्षों में मध्य प्रदेश में सोयाबीन की फसल खराब होने का एक प्रमुख कारण रहा है। काली मिट्टी पर मोल ड्रेनेज सिस्टम की स्थापना पौधे के जड़ के आसपास अतिरिक्त पानी को निकालने का प्रभावी तकनीक है। मोल ड्रेनेज के लिए समतल क्षेत्र जिसमे 2 प्रतिशत से कम ढलान हो, सबसे उपयुक्त है। लेजर लेवलर द्वारा अधिकांश समतल किये गए क्षेत्र में 0.5 प्रतिशत से कम ढलान है और इस प्रकार का क्षेत्र मोल निर्माण के लिए सबसे उपयुक्त होता है। मोल निर्माण के समय, मिट्टी की नमी और निर्माण का समय प्रमुख पहलू है। मोल निर्माण के लिए मिट्टी में पर्याप्त नमी होना महत्वपूर्ण है। मिट्टी में मोलिंग के समय मिट्टी लचीली होनी चाहिए (22-25 प्रतिशत नमी, वजन के आधार पर) और गहराई (40-50 सेमी) से ऊपर की मिट्टी भुरभुरी और पर्याप्त सूखी होनी चाहिए ताकि पर्याप्त कर्षण हो और मिट्टी अच्छी तरह से फट जाए। मोल निर्माण के लिए सही समय अक्टूबर-नवंबर है, क्योंकि मानसून की बारिश के बाद मिट्टी सूख जाती है। मोल स्थापना के बाद, मोल्स को यथा संभव तब तक के लिए छोड़ दिया जाना चाहिए (1-2 सप्ताह आदर्श है) जब तक कि वे वर्षा या सिंचाई के पानी के बड़े प्रवाह को प्राप्त करने के लिए व्यवस्थित न हो जाएं। जल भराव की स्थिति में मोल का निर्माण नहीं किया जायें।
यह काम किस प्रकार करता है?

खेत में मोल ड्रेनेज सिस्टम की स्थापना से पहले, जल निकासी की दिशा तय करने के लिए क्षेत्र की स्थलाकृति-सर्वेक्षण किया जाता है। स्थलाकृति-सर्वेक्षण के बाद, लेटरल मोल्स का निर्माण 4 मीटर की दूरी और 40-50 सेमी की गहराई पर किया जाता है। लेटरल मोल की संख्या क्षेत्र के आकार पर निर्भर करती है। लेटरल मोल्स, मिट्टी के होते है और लेटरल मोल के शुरुआती सिरे पर, 1 मीटर की लंबाई के आसपास पीवीसी पाइप फिट किए जाते हैं। ये लेटरल मोल्स मुख्य जल निकासी लाइन के साथ पीवीसी पाइप के द्वारा जुड़े हुए होते हैं जिनका आकार 2.5 से 3.0 इंच व्यास का हो सकता है। स्थापना की प्रक्रिया नीचे दिए गए चित्र से समझा जा सकता है।

मोल ड्रेनेज सिस्टम को लगाने के बाद, गड्ढों को मिट्टी से भर दिया जाता है जिससे खेत फिर से पहले की तरह दिखने लगता है। मोल स्थापना के एक सप्ताह बाद खेत की गहरी जुताई या खेत में कोई भी कार्य कर सकते है। एक हेक्टेयर भूमि के लिए मोल जल निकासी प्रणाली स्थापित करने की लागत लगभग रु. 20,000/- (वर्गाकार खेत) और रू. 24,800/- (आयताकार खेत) है। अगर जल निकास के लिए पंप का इस्तेमाल किया जाए तो मूल कीमत में रू. 10,500/- अतरिक्त खर्च जुड़ जायेगा। उप सतह में निर्मित मोल जल निकासी प्रणाली का जीवनकाल लगभग 5-7 वर्ष का होता है।

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