नींबू वर्गीय फलों के लिए मिट्टी के स्वास्थ्य के साथ पानी का प्रबंधन करें – डॉ. हिमांशु पाठक
जैन हिल्स में ‘राष्ट्रीय सिट्रस संगोष्ठी ‘ आयोजित
22 दिसंबर 2025, जलगांव: नींबू वर्गीय फलों के लिए मिट्टी के स्वास्थ्य के साथ पानी का प्रबंधन करें – डॉ. हिमांशु पाठक – देश में नींबू वर्गीय फल (संतरा, मौसंबी, नींबू) उत्पादन को नई दिशा देने के लिए इंडियन सोसायटी ऑफ सिट्रीकल्चर (ISC) और जैन इरिगेशन सिस्टम्स लि. के संयुक्त तत्वावधान में ‘राष्ट्रीय सिट्रस संगोष्ठी-2025’ का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि नेशनल एकेडमी ऑफ एग्रीकल्चर साइंसेज (NAS) , नई दिल्ली के अध्यक्ष डॉ. हिमांशु पाठक थे। विशेष अतिथि गांधी रिसर्च फाउंडेशन के न्यासी डॉ. सुदर्शन अय्यंगार थे। इस मौके पर नागपुर के इंडियन सोसायटी ऑफ सिट्रस के अध्यक्ष डॉ. दिलीप घोष, जैन इरिगेशन सिस्टम्स लि. उपाध्यक्ष श्री अनिल जैन, सह-प्रबंधकीय निदेशक श्री अजीत जैन, वैज्ञानिक डॉ. एन. कृष्णकुमार भी उपस्थित थे। इस मौके पर जैन इरिगेशन द्वारा संतरे की दो नई किस्मों जैन स्वीट ऑरेंज-6 और जैन मैंडरिन-1 को लांच किया गया। उद्घाटन सत्र के बाद ‘ऑरेंज फिस्टा’ प्रदर्शनी का उद्घाटन मान्यवरों ने शुभारम्भ किया।
डॉ पाठक ने कहा कि खाद्य सुरक्षा में आत्मनिर्भरता प्राप्त की है। खाद्यान्न के साथ-साथ फलोत्पादन बढ़ा है, परंतु सबसे महत्वपूर्ण यह है कि पोषण मूल्य को बनाए रखा जाना चाहिए। इसके लिए मिट्टी का स्वास्थ्य संभालना, पानी का प्रबंधन करना, खादों का दक्षता से उपयोग करना आवश्यक है। टिश्यू कल्चर, ड्रिप, स्प्रिंकलर तकनीक को विज्ञान का आधार है और उसका उपयोग बढ़ना चाहिए। जल, जमीन, जंगल, जलवायु, जनता में वैज्ञानिक कार्य करने के लिए किसान, वैज्ञानिक, उद्यमी, विभिन्न अनुसंधान संस्थान के सामूहिक प्रयास से पर्यावरण का ह्रास न होकर फलोत्पादन में मूल्यवर्धन की दृष्टि से स्थिरता लाई जा सकती है। उन्होंने कहा, खाद्यान्न के मामले में अच्छा काम हुआ। हम आयातक थे। अब निर्यातक, आपूर्तिकर्ता बन गए हैं। यह किसान, तकनीशियन, वैज्ञानिकों की मदद से संभव हुआ है। किसान को केंद्र में रखकर काम होना चाहिए। नींबू वर्गीय फसलों में काम हो रहा है। लेकिन गिरती उत्पादकता और अन्य समस्याओं को दूर करने के लिए संयुक्त प्रयास होने चाहिए। किसानों को स्थायी, पर्यावरणपूरक उपाय, तकनीक देने की आवश्यकता है। जैन इरिगेशन जैसी संस्थाएं विज्ञान के साथ तकनीक को पकड़कर पानी, पर्यावरण संबंधी अच्छा काम कर रही हैं।
पौष्टिक अन्न उगाएँ और देश बनाएँ – डॉ. एन. कृष्ण कुमार ने कहा कि मनुष्य को स्वास्थ्य दृष्टि से बहुत समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। मधुमेह सहित अन्य व्याधियों से हम परेशान हैं। हमने खाद्य सुरक्षा तो प्राप्त की, परंतु पोषण सुरक्षा में अभी भी भारत पीछे है। वृद्धि, विकास और देखभाल के लिए मूल्यवर्धित पोषक तत्व वाले फलों का सेवन करना चाहिए। फलोत्पादन पोषण के संयोजन का सर्वोत्तम उत्तर है। रोज सुबह एक गिलास संतरे का जूस पीने से स्वास्थ्य संभाला जा सकता है। विदेशों में भारतीय अचार की बहुत मांग है, इसके लिए नींबू वर्गीय फलों का अचार बनाकर भेजा जा सकता है। निर्यात बढ़ने से देश के किसानों को लाभ होगा। मौसंबी, यह उत्पादन, खेती का कालावधि और आय की दृष्टि से उत्तम फसल है। मान्यता प्राप्त नर्सरी से ही रोग मुक्त पौधे लेने चाहिए। ‘मदर नर्सरी’ बंद वातावरण में होनी चाहिए, ताकि वैज्ञानिक पौधों की निर्मिति की जा सके। इन पौधों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
किसान नवप्रेरक – डॉ. सुदर्शन अय्यंगार ने कहा कि अर्थशास्त्र के साथ नैतिकता व्यवहार में लानी चाहिए। शोधकर्ता, वैज्ञानिक, अध्येता द्वारा किया गया शोध क्या है और किसके लिए उपयोगी हो सकता है, यह प्रश्न पूछा जाना चाहिए। इसके लिए किसानों द्वारा स्वयं खेती में किए गए बदलाव अमूर्त मॉडल ठहरते हैं, वे नवप्रेरक होते हैं। श्री भंवरलाल जैन किसान से खेती पूरक उद्यमी हो सके, उन्होंने समाज के अंतिम घटकों में परिवर्तन के विश्वास निर्माण किया।
संतरे को मूल्यवर्धित अन्न में मानें – श्री अनिल जैन ने कहा कि खेती, किसान और पर्यावरण संवर्धन के साथ-साथ फलोत्पादन कैसे बढ़ाया जा सकता है इसके लिए प्रयास होने चाहिए। ‘सुपर फूड’ के लिए लाइब्रेरी, लैब, लैंड का उचित उपयोग होना चाहिए। कितना उत्पादन हुआ इससे अधिक महत्वपूर्ण है कि किसान को प्रति एकड़ कितनी आय हुई । संतरे को मूल्यवर्धित अन्न में मानना चाहिए। आपने “चलो, फलों का रस लें और स्वास्थ्य संभाले” का परामर्श भी दिया। 2025 का यह सम्मेलन जो संतरे के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण रहेगा। इसके पूर्व डॉ. दिलीप घोष ने अपने प्रस्ताविक भाषण में कहा कि भारत विश्व में नींबू वर्गीय फलों (सिट्रस) के उत्पादन में तीसरे क्रम पर है (चीन और ब्राजील के बाद)। फिर भी इस क्षेत्र को जलवायु परिवर्तन, कीट-रोगों का बढ़ता प्रादुर्भाव, गुणवत्तापूर्ण पौधों की कमी, बाजार भाव की अनियमितता जैसी बड़ी चुनौतियां हैं। इसके लिए विज्ञान और तकनीक को साथ लेकर नींबू वर्गीय फलों में क्या सुधार किया जा सकता है।
इस अवसर पर जैन इरिगेशन द्वारा संतरे की दो नई किस्मों जैन स्वीट ऑरेंज-6 और जैन मैंडरिन-1 को लांच किया गया। डॉ. मिलिंद लधानिया ने बताया कि मैंडरिन-1 दूसरे ही वर्ष उत्पादन देने वाली किस्म है और यह नागपुर संतरे का उत्तम विकल्प बन सकती है। दस किसानों को इन दोनों किस्मों के पौधे वितरित किए गए। अतिथियों ने जैन इरिगेशन निर्मित “सिट्रस कल्टिवेशन गाइड” पुस्तक एवं सम्मेलन की स्मरणिका का विमोचन भी किया गया। इस दौरान नींबू वर्गीय फल – फसलों संबंधी प्रस्तुतियाँ भी हुईं।
फेलोशिप प्रदान की गई- नींबू वर्गीय परिषद में फेलोशिप प्रदान की गई। इसमें डॉ. चंद्रिका रामादुगु (कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, अमेरिका), डॉ. मंजुनाथ केरेमने (USDA, अमेरिका), डॉ. अवी साडका (वोल्कानी संस्था, इज़राइल), डॉ. शैलेंद्र राजन (पूर्व निदेशक, ICAR-CISH), डॉ. एम. कृष्णा रेड्डी (पूर्व वैज्ञानिक, ICAR-IIHR), डॉ. अवतार सिंह (पूर्व वैज्ञानिक, IARI), डॉ. आकाश शर्मा (प्राध्यापक, SKUAST-जम्मू), डॉ. शिव शंकर पांडे (IASST, गुवाहाटी), डॉ. आर. एम. शर्मा (प्राध्यापक, IARI), डॉ. अवतार सिंह (पूर्व प्रिंसिपल वैज्ञानिक, ICAR), डॉ. आकाश शर्मा (शेर-ए-कश्मीर विश्वविद्यालय, जम्मू), डॉ. सुशंकर पांडे (DBT रामानुजन फेलो, असम), डॉ. आर्यन शर्मा (प्रोफेसर, IARI, नई दिल्ली) शामिल हैं। संगीता भट्टाचार्य, डॉ. व्यंकटेश रमण बनसोडे ने सूत्र संचालन किया। जैन इरिगेशन के सह-प्रबंधकीय निदेशक श्री अजीत जैन ने आभार माना।
आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture


