बड़वानी के किसानों को मिली बड़ी राहत, 4 तालाबों से बढ़ा 4,700 हेक्टेयर से ज्यादा सिंचाई रकबा
22 अक्टूबर 2026, बड़वानी: बड़वानी के किसानों को मिली बड़ी राहत, 4 तालाबों से बढ़ा 4,700 हेक्टेयर से ज्यादा सिंचाई रकबा – मध्य प्रदेश के निमाड़ अंचल में खेती के लिए सिंचाई के पानी की उपलब्धता लंबे समय से एक बड़ी चुनौती रही है। अनियमित बारिश और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यहां के किसानों को खेती के लिए पर्याप्त पानी जुटाने में परेशानी होती थी। इस समस्या को दूर करने के लिए जल संसाधन विभाग ने बड़वानी जिले के दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में चार प्रमुख तालाबों का निर्माण किया है। इन जल परियोजनाओं से जिले में 4,700 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सिंचाई क्षमता बढ़ी है। इससे किसानों को खेती के लिए पानी मिलने के साथ ही कृषि उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिला है।
बड़वानी में इन 4 तालाबों से मिल रही सिंचाई सुविधा
जल संसाधन विभाग की ओर से पाटी, पानसेमल और सेंधवा तहसील में बेड़दा, गोमई, झांडिया कुण्डिया और टोरी तालाब का निर्माण किया गया है। इन परियोजनाओं से कई गांवों के किसानों को सिंचाई की सुविधा मिल रही है। तालाबों की जलभराव क्षमता और उनसे सिंचित होने वाले क्षेत्र का विवरण इस प्रकार है।
1. बेड़दा तालाब से 1,390 हेक्टेयर क्षेत्र को लाभ
बड़वानी जिले के आकांक्षी विकासखंड पाटी में बना बेड़दा तालाब गंधावल, पलवट और मोसवाड़ा गांव के किसानों के लिए उपयोगी साबित हो रहा है। इस तालाब की जलभराव क्षमता 8.53 मिलियन घन मीटर है। इससे 1,390 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को सिंचाई की सुविधा मिल रही है।
2. गोमई तालाब से 1,240 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई
पानसेमल तहसील में स्थित गोमई नदी तालाब की जलभराव क्षमता लगभग 7.88 मिलियन घन मीटर है। इस परियोजना से 1,240 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो रही है। मालकातर, हरनिया, पाडला, चिखल्या, दोदवाड़ा, ओसवाड़ा और मोयदा गांवों के किसान इससे लाभान्वित हो रहे हैं।
3. झांडिया कुण्डिया तालाब से 385 हेक्टेयर क्षेत्र को पानी
पानसेमल तहसील में ही स्थित झांडिया कुण्डिया तालाब की जलभराव क्षमता 2.525 मिलियन घन मीटर है। इससे 385 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई हो रही है। मोयदा, खड़ीखम और सकराली गांवों के किसानों को इस परियोजना का सीधा लाभ मिल रहा है।
4. टोरी तालाब से 1,730 हेक्टेयर भूमि सिंचित
सेंधवा तहसील में बना टोरी तालाब जिले की प्रमुख जल परियोजनाओं में शामिल है। इसकी जलभराव क्षमता 10.45 मिलियन घन मीटर है। इस तालाब से 1,730 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई की सुविधा मिल रही है। हिंगवा, किरमला, बलवाड़ी और कुटवाड़ी गांवों के किसान इससे लाभान्वित हो रहे हैं।
सिंचाई सुविधा बढ़ने से फसल उत्पादन को मिला बढ़ावा
इन चारों तालाबों के निर्माण से बड़वानी जिले में 4,700 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सिंचाई क्षमता बढ़ने की जानकारी दी गई है। पानी की उपलब्धता बेहतर होने से किसानों को कपास, मिर्च और सब्जियों जैसी नकदी फसलों की खेती करने में मदद मिली है। इसके साथ ही उन्नत कृषि तकनीकों को अपनाने के अवसर भी बढ़े हैं। नियमित सिंचाई सुविधा मिलने से किसान अब साल में दो से तीन फसलें लेने में सक्षम हो रहे हैं। इससे खेती पर निर्भर परिवारों को अपनी आमदनी बढ़ाने का अवसर मिला है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति मिली है।
तालाब बनने से किसानों की जिंदगी में आया बदलाव
इन जल परियोजनाओं से लाभान्वित किसान और ग्राम पटेल बिहारी सस्ते ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि पहले सिंचाई का स्थायी साधन नहीं होने के कारण खेती करना मुश्किल था। किसान अपनी कुल कृषि भूमि के लगभग 25 प्रतिशत हिस्से पर ही खेती कर पाते थे। पानी की कमी के चलते गेहूं जैसी फसल बोने में भी परेशानी होती थी। उन्होंने बताया कि तालाब बनने के बाद क्षेत्र के कुओं और ट्यूबवेलों का जलस्तर बढ़ा है। इससे अब किसान अपने पूरे खेत में फसल उगा पा रहे हैं। खेती की स्थिति सुधरने से उन्हें और उनके परिवार को मजदूरी के लिए गांव से बाहर जाने की जरूरत भी कम हुई है। वे अपने गांव में रहकर खेती कर रहे हैं और बच्चों की पढ़ाई पर भी ध्यान दे पा रहे हैं।
भूजल स्तर और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद
इन तालाबों से केवल सिंचाई की सुविधा ही नहीं बढ़ी, बल्कि भूजल पुनर्भरण में भी सुधार हुआ है। जल संसाधन विभाग के अनुसार, इन परियोजनाओं के आसपास के कुओं और बोरवेल में पानी की उपलब्धता बेहतर हुई है। इससे किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त सहारा मिला है। विभाग ने गूगल अर्थ की पहले और बाद की तस्वीरों का हवाला देते हुए बताया कि जिन क्षेत्रों में पहले सूखी पहाड़ियां और बंजर जमीन दिखाई देती थी, वहां अब जलाशयों के निर्माण से बदलाव नजर आता है।
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