मध्यप्रदेश: श्योपुर की गौशालाएं बनी आत्मनिर्भरता की मिसाल, महिलाओं को सब्जी-दूध से बढ़ी अतिरिक्त आय
08 मई 2026, भोपाल: मध्यप्रदेश: श्योपुर की गौशालाएं बनी आत्मनिर्भरता की मिसाल, महिलाओं को सब्जी-दूध से बढ़ी अतिरिक्त आय – मध्यप्रदेश शासन द्वारा मनरेगा योजनान्तर्गत निर्मित गोशालाओं का संचालन स्व सहायता समूहों को प्रदाय किये जाने के फैसले का असर धीरे-धीरे श्योपुर जिलें में स्थापित गोशालाओं में दिखने लगा है तथा गोशालाओं से सब्जी उत्पादन, दूध उत्पादन, जैविक खाद निर्माण सहित अन्य गतिविधियों का क्रियान्वयन होने से समूह से जुड़ी महिला सदस्यों को अतिरिक्त आय प्राप्त होने लगी है। ग्राम टर्राकलॉ की गौशाला में समूह की महिलाओं द्वारा सब्जी उत्पादन कर एक वर्ष में लगभग 50 हजार रुपये की अतिरिक्त आय ली जा रही है यही नहीं इसके साथ साथ गौशाला द्वारा गोबर खाद की भी बिक्री कर आय अर्जित की जा रही है।
पंचगव्य गोशाला ग्राम टर्राकलॉ में स्थित है। म.प्र. राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन अंतर्गत इस गोशाला का संचालन भैरो बाबा स्व सहायता समूह द्वारा किया जा रहा है। समूह द्वारा जुलाई 2020 से गोशाला का संचालन प्रारंभ किया गया तथा वर्तमान में स्वसहायता समूह द्वारा गोशाला में भूसा निर्माण मशीन, चाप कटर, स्वंयं का विद्युत ट्रांसफार्मर, नवीन ट्यूबवेल स्थापना, आटा चक्की सहित गोशाला में प्रत्येक नाद में पानी पहुचाने के लिये नल फिटिंग का कार्य किया गया है। गोशाला में सब्जी उत्पादन के लिये ललिता रावत और गिरजा रावत एक सीजन में लगभग 30 हजार रूपये की अतिरिक्त आय सब्जी बेचकर करती है। गौशाला को दुध विक्रय से प्रतिवर्ष 50 हजार रूपये तथा गोबर खाद से 55 हजार रूपये की आमदनी प्राप्त हो रही है। गौशाला में वर्मीकम्पोस्ट, जीवामृत, घनजीवामृत आदि बायो उत्पाद बनाये जा रहे है। गौशाला के अन्य कार्यो से जुडे लोगों को भी मासिक रूप से रोजगार मिल रहा है।
जिला परियोजना प्रबंधक म.प्र. राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन डॉ. सोहन कृष्ण मुदगल ने बताया गया कि जिला प्रशासन द्वारा गौशाला की व्यवस्थां सुधारने एवं गोशालाओं से अतिरिक्त आय लेने के लिये लगातार मार्गदर्शन दिया जाता है, जिसके तहत जिले की गोशालाओं में दूग्ध उत्पादन बढाने के लिये दुधारू गाय पालन का कार्य प्रारंभ किया गया। इसी प्रकार से आय वृद्धि के लिये मुर्गीपालन गतिविधि गोशालाओं में कराने हेतु मनरेगा योजनान्तर्गत मुर्गी शेड का निर्माण किया गया। ग्राम टर्राकलॉ में गौशाला को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ना सिर्फ नलकूप खनन की स्थापना की गयी है बल्कि गोशाला केम्प्स में 150 फलदार पौधो का रोपण किया गया है जिनमें अमरूद, आम, नींबू, कटहल इत्याादि पौधे रोपित किये गये है जो 02 वर्ष बाद गौशाला के लिये अच्छी आमदनी का स्रोत होने वाले है। गोशाला से जुडे श्री भगवती रावत ने बताया की गौशाला में गोबर को ले जाने के लिये गोबर गाडी ली गयी है। पूरे नादो का रिपेयरिंग कार्य कराया गया है जिससे गोवंश आराम से भूसा एवं पेयजल से सकते है। गोशाला में पंखे, कूलर इत्यादि स्थापित किये गये है।
मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सुश्री सौम्या आनंद ने बताया कि जिले की गोशालाओं में हरा चारा उत्पादन, वर्मी कम्पोस्ट निर्माण एवं बायोगेस स्थाापना की कार्ययोजना बनायी गयी है तथा यह प्रयास किये जा रहे है कि सभी गौशाला में गोवंश को बारह मास हरे चारे की उपलब्धता हो सके एवं गोशाला में रहने वाले परिवार को बायोगैस के उपयोग से जोडा जायेगा। उन्होंने बताया कि श्योपुर जिलें में 24 गोशालाओं का संचालन महिला स्व सहायता समूहों द्वारा किया जा रहा है।
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