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कृषि स्नातकों के लिए

  • डॉ. रवींद्र पस्तोर, CEO E Fasal
    मो.: 9425166766

27  मई 2021, भोपाल । नौकरी की तलाश और अवसर – वर्तमान में, भारत में 71 आईसीएआर मान्यता प्राप्त कृषि विश्वविद्यालय हैं जिनमें 444 कृषि कॉलेज हैं जो छात्रों के लिए 1036 से अधिक प्रकार के पाठ्यक्रम चला रहे हैं। ऐसे 99 संस्थान हैं जो ग्रामीण प्रबंधन पाठ्यक्रम भी चला रहे हैं। कुछ भाग्यशाली छात्रों को कॉलेज में प्लेसमेंट मिल जाता है, लेकिन उनमें से ज्यादातर इन संस्थानों से नौकरी के बाजार में जीवन में केवल एक ही लक्ष्य के साथ निकलते है, कि नौकरी की तलाश करना और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होना है। इस प्रकिया में उनके उत्पादक जीवन का बेहतर हिस्सा वे बेरोजगारी में निकाल देने को मजबूर हैं। कोविड-19 महामारी साल 2020 में हमारे जीवन में आई और हमारा कामकाजी और सामाजिक जीवन हमेशा के लिए बदल गये। हमारे परिवार के कई सदस्यों, दोस्तों और रिश्तेदारों ने अपनी जान गंवाई और कई को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा। बड़ी संख्या में उद्योग बंद हो गए हैं और श्रमिक शहरों से गाँवों की ओर पलायन कर गए हैं जहाँ उनके पास कोई काम नहीं है। इस अवधि के दौरान रोजगार दर लगभग 38 प्रतिशत कम हो गई है और बेरोजगारी दर 10 प्रतिशत से अधिक बढ़ गई है।

व्यावहारिक ज्ञान में शून्य एग्रीकल्चर ग्रेजुएट्स

जब द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्र की अर्थव्यवस्था नीचे चली गई है और सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर नकारात्मक है, तो दूसरी ओर, सकल घरेलू उत्पाद में कृषि क्षेत्र का योगदान 2.1 प्रतिशत बढ़ गया है और पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में कृषि-वस्तुओं के निर्यात में भी वृद्धि हुई है।वर्ष 2021 में 18.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई। तो जब कृषि क्षेत्र संकट के दौरान अच्छा कर रहा है तो कृषि स्नातक बेरोजगार क्यों हैं? जब मैंने विभिन्न कृषि महाविद्यालयों के छात्रों और प्रोफेसरों के साथ इस पर चर्चा की तो मैंने पाया कि रोजगार सृजन उद्योग और शैक्षणिक पाठ्यक्रम में आवश्यक कौशल सेट में अंतर है। पिछले कुछ दिनों में मैंने E Fasal  में भर्ती के लिए कई छात्रों का साक्षात्कार लिया है जब मैंने सैद्धांतिक रूप के प्रश्न पूछे तो कुछ छात्र उत्तर देने में सक्षम थे, लेकिन जब मैंने उत्पादों के बारे में व्यावहारिक प्रश्न पूछे, तो उनकी तकनीकी, ब्रांड नाम निर्माता कंपनियों के नाम, मार्केटिंग चैनल आदि, अधिकांश छात्रों के पास इस प्रकार का व्यावहारिक ज्ञान नहीं है। यहां तक कि कुछ छात्र कृषि परिवार की पृष्ठभूमि से संबंधित हैं और उनके माता-पिता नियमित रूप से उर्वरक, बीज और कीटनाशक खरीदते हैं, लेकिन बच्चे उत्पाद का नाम, कंपनी का नाम, कीमत या उत्पाद के उपयोग को नहीं जानते हैं। यह मेरे लिए बहुत ही अजीब और चौंकाने वाला है कि किसान बच्चों ने कृषि प्रथाओं और उत्पादों के बारे में सभी जिज्ञासा क्यों खो दी है जो नियमित रूप से उनके माता-पिता उपयोग कर रहे हैं। तब मुझे पता चला कि अधिकांश माता-पिता अपने बच्चों को कृषि में बिल्कुल भी शामिल नहीं करते हैं, वे अपने बच्चों को पढऩे के लिए शहरों में रखते हैं और फिर किसी सरकारी या निजी कंपनी में नौकरी की प्रतीक्षा करते हैं। वे किसी भी कीमत पर अपने बच्चों को किसान के रूप में नहीं देखना चाहते हैं।

स्टार्टअप उभरता हुआ क्षेत्र

अधिकांश कॉलेज में प्लेसमेंट सेल होते हैं जो अपने छात्रों को नौकरी के बाजार में उनके कैरियर विकल्पों के लिए मार्गदर्शन करते हैं। वे आम तौर पर अपने छात्रों को यूपीएसी, पीएससी, पीएसयू, बैंक और निजी कंपनियों जैसी विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के बारे में सुझाव देते हैं। लेकिन ये क्षेत्र पर्याप्त नौकरियाँ पैदा नहीं कर रहे हैं। अधिकांश नौकरियाँ अब स्टार्टअप, एफपीओ, सहकारी समितियों और निजी क्षेत्र की कंपनियों द्वारा उत्पन्न की जाती हैं। कुछ कॉलेजों ने प्लेसमेंट के लिए स्टार्टअप्स को आमंत्रित करना शुरू किया है लेकिन अब तक कॉलेजों द्वारा एफपीओ और सहकारी समितियों को आमंत्रित नहीं किया जा रहा है। स्टार्टअप नवीनतम उभरता हुआ क्षेत्र है जहां पिछले कुछ वर्षों में बहुत सारी नौकरियां पैदा हुई हैं। प्लेसमेंट सेल के प्रभारी को यह जानने की जरूरत है कि किस प्रकार के स्टार्टअप आ रहे हैं? उनकी काम के लिए किस तरह के स्किल की आवश्यकता है? उन्हें में यदि इस प्रकार के कौशल नहीं होता है तो प्लेसमेंट के बाद छात्र सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं कर पाएंगे और धीरे-धीरे स्टार्टअप उन कॉलेजों में प्लेसमेंट के लिए नहीं आएंगे। प्लेसमेंट सेल फीडबैक को पाठ्यक्रम डिजाइन करने में लागू किया जाएगा और उसी के अनुसार पठन सामग्री तैयार की। टीचिंग स्टाफ भी अपने ज्ञान को अपग्रेड करता रहे और थ्योरी के साथ-साथ व्यावहारिक ज्ञान को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया जाता रहे। स्थानीय स्टार्टअप को आमंत्रित कर उन्हें व्यावहारिक प्रशिक्षण में भागीदार बनाया जा सकता है, जो दोनों के लिए फायदेमंद होगा। वर्तमान में, कृषि क्षेत्र में 450 से अधिक स्टार्टअप काम कर रहे हैं।

एफपीओ में अवसर

भारत सरकार ने 2002 में कंपनी अधिनियम में संशोधन किया था और प्राथमिक उत्पादकों के लिए अपने संगठन को निर्माता कंपनी के रूप में पंजीकृत करने का प्रावधान बनाया है। भारत सरकार द्वारा एसएफएसी और नाबार्ड को अगले 4 वर्षों में 10,000 एफपीओ को बढ़ावा देने के लिए एक नया लक्ष्य दिया है। सरकार ने इसके लिए पर्याप्त धनराशि आवंटित की है, यहां तक कि एक कंपनी के पंजीकरण के लिए प्रावधान, कार्यालय व्यय, सीईओ और लेखाकार के वेतन को भी नई गाइडलाइन में देने का प्रावधान किया गया है। यह एक गेम-चेंजर होगा यदि कृषि महाविद्यालय कुछ निर्माता कंपनियों को अपनाएंगे और उन्हें अपने छात्रों के माध्यम से समर्थन देंगे, इस तरह से सफल संस्थान बनाए जा सकते हैं और उन कॉलेजों के छात्रों को इन एफपीओ में प्लेसमेंट मिल सकता है। कृषि बाजार 24 अरब डॉलर के आकार का है और इस बाजार को केवल कृषि विश्वविद्यालयों और कालेजों में प्रशिक्षित छात्रों की जरूरत है।

कृषि स्नातक के लिए उत्पादक कम्पनियों में नौकरियों की कोई कमी नहीं है। श्व-स्न्रस््ररु जैसे स्टार्टअप पहले से ही कृषि स्नातकों को प्रशिक्षण, प्लेसमेंट और अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने में सहायता कर रहे हैं। हम छात्रों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को इस पहल के साथ हाथ मिलाने और उनके उत्पादक वर्षों का उपयोग शुरू करने के लिए आमंत्रित करते हैं।

 

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