लाख और मछली पालन को मिला कृषि का दर्जा

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छत्तीसगढ़ बजट वर्ष : 2021-22

बजट के मुख्य बिन्दु :

  • राजीव गांधी किसान न्याय योजना के लिए 5,703 करोड़।
  • कृषक जीवन ज्योति योजना के लिए 2,500 करोड़।
  • कृषि पंपों के ऊर्जीकरण के लिए 150 करोड़, सौर सुजला के तहत 530 करोड़।
  • किसानों को बिना ब्याज का 5,900 करोड़ का अल्पकालीन कृषि ऋण वितरण का लक्ष्य।
  • गोधन न्याय योजना के लिए 175 करोड़।
  • सिंचाई की 4 वृहद परियोजनाओं अरपा भैसाझार, केलो, राजीव समोदा व्यपवर्तन एवं सोंढूर के लिए 152 करोड़।
  • कोदो,कुटकी,रागी को समर्थन मूल्य में लिया जाएगा।
  • भूमिहीन श्रमिकों के लिए नवीन न्याय योजना की होगी शुरुआत।
  • छत्तीसगढ़ी कला, शिल्प, वनोपज, कृषि एवं अन्य सभी प्रकार के उत्पादों तथा व्यंजनों को एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराने के लिए ‘सी-मार्ट’ स्टोर की स्थापना।
  • शहरों में पौनी पसारी योजना के समान ग्रामीण क्षेत्रों में रूरल इण्डस्ट्रियल पार्क की स्थापना।
  • ग्रामीण कृषि भूमिहीन श्रमिकों के लिए नवीन न्याय योजना प्रारंभ की जायेगी।
  • तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों के लिए ‘शहीद महेन्द्र कर्मा तेंदूपत्ता संग्राहक सामाजिक सुरक्षा योजनाÓ।
  • किसानों को खेतों तक आवागमन सुविधा हेतु मुख्यमंत्री धरसा विकास योजना।
  • नवीन सिंचाई योजनाओं हेतु नवीन मद में 300 करोड़।
  • नगरीय क्षेत्रों में नई जल प्रदाय योजनाओं के लिए 45 करोड़।
  • नदियों के किनारे खेतों को सिंचाई की सुविधा के लिए विद्युत लाईन के विस्तार के लिए प्रावधान।
  • ग्राम गोढ़ी, बेमेतरा में बायो इथेनाल संयंत्र की स्थापना।
  • 11 नई तहसीले एवं 5 नये अनुविभागों की स्थापना।
  • मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लीनिक योजना 13 करोड़।
राजीव गांधी किसान न्याय योजना के लिए 5703 करोड़

8 मार्च  2021, रायपुर   लाख और मछली पालन को मिला कृषि का दर्जा –  छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने गत दिनों विधानसभा में 2021-22 का बजट पेश किया। इस साल के बजट में कृषि और ग्रामीण विकास पर खास जोर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने मत्स्य पालन और लाख पालन को कृषि के समकक्ष दर्जा देने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रूरल इंडस्ट्रियल पार्क पार्क बनाने का ऐलान किया है। यह बजट मुख्य रूप से ‘ गढ़बो नवा छत्तीसगढ़’ के मूल मंत्र में समाहित भावनाओं को आगे बढ़ाते हुए प्रदेश को हर क्षेत्र में नई ऊंचाईयों पर ले जाने वाला है। यह बजट राज्य के किसानों व आर्थिक रूप से कमजोर वर्गो की समृद्धि, गांवों की आर्थिक प्रगति, शिक्षा में गुणवत्ता एवं प्रगति के नये आयाम, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़े वर्गों के कल्याण, महिलाओं एवं बच्चों के सर्वांगीण विकास, युवाओं को रोजगार एवं उद्यमिता के नवीन अवसरों के सृजन, ग्रामीण एवं शहरी अधोसंरचना को तेजी से विकसित करने तथा जनता के लिए संवेदनशील प्रशासन की भावना के साथ प्रदेश के लोगों को समर्पित है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गोबर को गोधन बनाने हेतु गोधन न्याय योजना लागू। योजना में 175 करोड़ का प्रावधान है। साथ ही प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में विशिष्ट सृजनात्मक कलाओं की बहुलता को रोजगार के अवसर में बदलने के लिये शहरी क्षेत्रों में पौनी-पसारी योजना के समान ही ग्रामीण क्षेत्रों में रूरल इंडस्ट्रियल पार्क की स्थापना होगी। यहां परम्परागत व्यवसायिक गतिविधियों के संचालन एवं विपणन की सुविधा उपलब्ध होगी।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के स्थानीय कृषि उत्पादों जैसे ढेकी का कूटा चावल, घानी से निकला खाद्य तेल, कोदो, कुटकी, मक्का से लेकर सभी तरह की दलहन फसलें, विविध वनोपज जैसे इमली, महुआ, हर्रा, बहेरा, आंवला, शहद एवं उनसे निर्मित उत्पाद फूलझाड़ू, टेराकोटा, बेलमेटल, बांसशिल्प, चर्मशिल्प, लौहशिल्प, कोसा सिल्क तथा छत्तीसगढ़ी व्यंजनों जैसी सभी सामग्रियों को एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराने हेतु राज्य एवं राज्य के बाहर सी-मार्ट स्टोर की स्थापना की जायेगी, जो विशिष्ट छत्तीसगढ़ी ब्राण्ड के रूप में मशहूर होंगे। योजना के माध्यम से स्थानीय उत्पादकों को अधिक लाभांश दिलाने की व्यवस्था भी की जायेगी।

कृषि
  • बस्तर संभाग के 7 आदिवासी बहुल जिले एवं मुंगेली जिले के चयनित 14 विकास खण्डों में पोषण सुरक्षा तथा किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार हेतु चिराग योजना के लिए 150 करोड़ का प्रावधान
  • कृषक जीवन ज्योति योजना अंतर्गत कृषि पम्पों को नि:शुल्क विद्युत प्रदाय हेतु 2 हजार 500 करोड़ का प्रावधान। लगभग साढ़े 5 लाख किसान लाभान्वित।
  • कृषि पम्पों के ऊर्जीकरण के लिये 150 करोड़ का प्रावधान।
  • सौर सुजला योजना अंतर्गत सरकार के गठन के पश्चात अब तक 31 हजार 712 सोलर पंपों की स्थापना। इस बजट में 530 करोड़ का प्रावधान।
  • किसानों को शून्य ब्याज दर पर 5 हजार 900 करोड़ का अल्पकालीन कृषि ऋण वितरित करने का लक्ष्य। ब्याज अनुदान के भुगतान हेतु 275 करोड़ का प्रावधान।
  • इस वर्ष 5 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में बहुवर्षीय फलोद्यान, 4 हजार 500 हेक्टेयर में सब्जी उत्पादन तथा 13 सौ हेक्टेयर क्षेत्र में फूलों की खेती हेतु अनुदान देने का लक्ष्य रखा गया है।
  • उद्यानिकी फसलोंके लिए बजट में 495 करोड़ के प्रावधान।
पशु पालन
  • गोठानों को रोजगारोन्मुखी बनाने के लिए गोधन न्याय योजना प्रारंभ की गई है। गोठान समितियों द्वारा पशुपालकों से 2 रू. किलो की दर से गोबर क्रय हेतु 80 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है।
  • स्व सहायता समूहों द्वारा अब तक गोबर से 71 हजार 300 क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट तैयार किया जा चुका है।
  • वर्तमान में 7 हजार 841 स्व-सहायता समूहों के लगभग 60 हजार सदस्यों को वर्मी खाद उत्पादन, सामुदायिक बाड़ी, गोबर दिया निर्माण इत्यादि से 942 लाख की आय हो चुकी है।
  • गोठान योजना के लिये बजट में 175 करोड़ का प्रावधान।
मछली पालन
  • मत्स्य पालन को बढ़ावा देने हेतु इसे कृषि के समान दर्जा दिया जायेगा। बजट में मत्स्य पालन की गतिविधियों के लिये 171 करोड़ 20 लाख का प्रावधान।
  • मत्स्य पालन के क्षेत्र में रोजगार की संभावनाओं को देखते हुए स्वयं की भूमि पर तालाब निर्माण कर मत्स्य पालन की योजना हेतु 28 करोड़ का प्रावधान ।
  • मत्स्य पालन हेतु उपलब्ध जल क्षेत्रों में से 95 प्रतिशत क्षेत्र को विकसित करके 2 लाख से अधिक मछुआरों को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है।
  • परम्परागत कर्मकारों को न्याय
  • पराम्परागत ग्रामीण व्यवसायिक कौशलों के पुनरूद्धार एवं कर्मकारों को सहयोग प्रदान करने के लिए तेलघानी विकास बोर्ड, चर्म शिल्पकार विकास बोर्ड, लौह शिल्पकार विकास बोर्ड एवं रजककार
  • विकास बोर्ड की स्थापना की जायेगी।
  • कोसा उत्पादन एवं वस्त्र निर्माण के कार्यों में 50 हजार से अधिक हितग्राहियों को रोजगार से जोड़ा गया है। हाथकरघा वस्त्र बुनाई के माध्यम से 60 हजार परिवारों को रोजगार मिला है।
  • लाख पालन के क्षेत्र में रोजगार की संभावनाओं को देखते हुए ब्याज रहित ऋण की सुविधा हेतु लाख पालन को भी कृषि के समकक्ष दर्जा दिया गया है।
सिंचाई
  •  भू-जल संवर्धन के कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर क्रियान्वयन करने हेतु भू-जल संरक्षण कोष का निर्माण किया जायेगा। भू-जल का उपयोग करने वाले उद्योगों तथा कच्चे माल के रूप में जल का उपयोग करने वाले उद्योगों से प्राप्त जलकर की राशि इस कोष में जमा की जायेगी।
  • सिंचाई की 4 वृहद परियोजनाओं अरपा-भैंसाझार, केलो जलाशय, राजीव समोदा निसदा व्यपवर्तन एवं सोंढूर जलाशय हेतु बजट में 152 करोड़ का प्रावधान है।
  • बजट में 4 सूक्ष्म सिंचाई योजना, 5 सौर सूक्ष्म सिंचाई योजना एवं 8 उद्वहन सिंचाई योजनाओं हेतु प्रावधान है।
  • वृहद, मध्यम एवं लघु बांधों के पुनर्वास एवं सुधार कार्य हेतु बजट में 70 करोड़ का प्रावधान है।
  • अहिरन-खारंग लिंक, छपराटोला फीडर जलाशय, रेहर अटेम (झिंक) लिंक परियोजना का क्रियान्वयन छत्तीसगढ़ अधोसंरचना विकास निगम द्वारा किया जायेगा। इसके लिये निगम को 5 करोड़ की सहायता का प्रावधान है।
कृषि संबंधी अधोसंरचना
  • बायो एथेनॉल उत्पादन के अनुसंधान कार्य हेतु ग्राम गोढ़ी जिला बेमेतरा में प्रदर्शनी संयंत्र की स्थापना की जायेगी। संयंत्र में जैव ईंधन के उत्पादन के लिये अतिशेष धान अथवा मक्का इत्यादि कच्ची सामग्री का उपयोग किया जायेगा।
  • नवीन ऊर्जा शिक्षा उद्यान ग्राम पाटन जिला दुर्ग मेंं स्थापित किया जायेगा। ऊर्जा शिक्षा उद्यान के माध्यम से कृषि कार्य एवं दैनिक जन-जीवन के विविध कार्यों में वैकल्पिक ऊर्जा का उपयोग करने के लिये ग्रामीण जनों को प्रोत्साहित किया जायेगा।
  • किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुये प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति का पुनर्गठन करके 725 नयी समितियों का गठन किया गया है। इस प्रकार प्रदेश में समितियों की संख्या 1 हजार 333 से बढ़कर 2 हजार 48 हो गयी है।
  • समितियों में धान उपार्जन सहित अन्य व्यवस्थाओं के लिये प्रत्येक समिति को 50 हजार रूपये की एकमुश्त सहायता हेतु 3 करोड़ 63 लाख का प्रावधान है।
  • उपार्जित धान की सुरक्षा के लिए सहकारी समितियों में महात्मा गांधी नरेगा योजना से 7 हजार 556 चबूतरा का निर्माण किया गया है।

 

raman-singh1कोरोना के बाद लगा था बजट घाव पर मरहम लगाने का काम करेगा। लेकिन ठीक उसके उलट हुआ है। छत्तीसगढ़ बनने के बाद पहली बार बजट का आकार छोटा हुआ है, बजट का छोटा होना दुर्भाग्यजनक है। बजट केंद्र पर निर्भर है, विभागवार राशि स्पष्ट नहीं है, बजट में कुछ नया शामिल नहीं किया गया।

 

डॉ. रमन सिंह, 
पूर्व मुख्यमंत्री (छ.ग.)

 

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बजट निराशाजनक है, विभाग के मद की जानकारी नहीं है,
बजट महिला, किसान, युवा से लेकर हर वर्ग के लिए निराशाजनक है।

बृजमोहन अग्रवाल,
पूर्व कृषि मंत्री (छ.ग.)

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