खरगोन: मिर्च की फसल को लीफ कर्ल और उखटा रोग से बचाएं
12 सितंबर 2026, खरगोन: खरगोन: मिर्च की फसल को लीफ कर्ल और उखटा रोग से बचाएं – मिर्च की फसल में लीफ कर्ल (पर्ण कुंचन) विषाणु रोग और विल्ट (उखटा) रोग से बचाव के लिए किसानों को समय पर समेकित नाशीजीव प्रबंधन (IPM) अपनाने की सलाह दी गई है। कृषि महाविद्यालय खण्डवा एवं आंचलिक कृषि अनुसंधान केन्द्र खरगोन के कृषि वैज्ञानिकों ने फसल को इन रोगों से बचाने के लिए विभिन्न उपाय बताए हैं।
खेत की सफाई और रोगग्रस्त पौधों को हटाएं
समेकित नाशीजीव प्रबंधन के तहत खेत और मेड़ों के आसपास उगने वाले खरपतवार तथा रोग के वैकल्पिक पोषी पौधों को नष्ट करने की सलाह दी गई है। सफेद मक्खी की निगरानी और नियंत्रण के लिए खेत में प्रति एकड़ 15 से 20 पीले चिपचिपे कार्ड लगाने चाहिए। रोगग्रस्त पौधों की शुरुआती अवस्था में पहचान कर उन्हें उखाड़कर खेत से बाहर नष्ट करने की सलाह दी गई है।
जैविक उपाय भी अपनाएं
जैविक नियंत्रण के लिए बेवेरिया बेसियाना (1.15 प्रतिशत डब्ल्यूपी) 5 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव किया जा सकता है। इसी तरह नीम आधारित उत्पादों में 1500 पीपीएम नीम तेल 1 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी या नीम बीज गिरी सत (NSKE) 5 प्रतिशत का छिड़काव करने की सलाह दी गई है।
जरूरत पड़ने पर करें रासायनिक नियंत्रण
रासायनिक नियंत्रण को अंतिम विकल्प के रूप में अपनाने की सलाह दी गई है। सफेद मक्खी की संख्या आर्थिक क्षति स्तर यानी 8 से 10 मक्खी प्रति पत्ती से अधिक होने पर थायोमेथोक्साम 25 प्रतिशत WG की 0.2 से 0.3 ग्राम प्रति लीटर, डायफेंथियूरॉन 50 प्रतिशत WP की 1 ग्राम प्रति लीटर या फ्लोनिकामिड 50 प्रतिशत WG की 0.3 ग्राम प्रति लीटर की दर से छिड़काव किया जा सकता है। कीटनाशकों का चक्रानुक्रम अपनाने और एक ही कीटनाशक समूह का बार-बार प्रयोग नहीं करने की सलाह दी गई है, ताकि कीटों में प्रतिरोधकता विकसित न हो।
संतुलित उर्वरक का करें इस्तेमाल
किसानों को संतुलित उर्वरकों का प्रयोग करने और नाइट्रोजन की अधिकता से बचने की सलाह दी गई है। नाइट्रोजन की अधिकता से पौधों में कोमल वृद्धि होती है, जो सफेद मक्खी को आकर्षित कर सकती है। फसल लेने से पहले मृदा परीक्षण कराकर जरूरत के अनुसार पोषक तत्वों का प्रयोग करना चाहिए। पोटाश की उचित मात्रा पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होती है।
उखटा रोग के लिए करें ट्रेंचिंग
विल्ट यानी उखटा रोग के लक्षण दिखाई देने पर पौधों के पास जड़ों के आसपास ट्रेंचिंग करने की सलाह दी गई है। इसके लिए 10 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से बोर्डो मिश्रण या 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का घोल बनाकर जड़ों के पास मिट्टी में देना चाहिए। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से अपील की है कि कीटनाशकों और रोग नियंत्रण रसायनों के इस्तेमाल से पहले स्थानीय कृषि महाविद्यालय या कृषि विज्ञान केन्द्र से अनुशंसित मात्रा और सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों की पुष्टि जरूर करें। कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार ही दवाओं का प्रयोग करने की सलाह दी गई है।
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