बरसात में मछली पालन के लिए तालाब के पानी पर रखें विशेष नजर
हरा पानी होने पर चूना-गोबर का इस्तेमाल रोकने की सलाह, नर्सरी तालाब की तैयारी में भी सावधानी जरूरी
22 अगस्त 2026, पटना: बरसात में मछली पालन के लिए तालाब के पानी पर रखें विशेष नजर – बरसात के मौसम में मछली पालन करने वाले किसानों को तालाब के पानी की गुणवत्ता और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। बारिश के दौरान तालाब में बाहरी पानी पहुंचने से पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और कई बार उसका रंग हरा पड़ जाता है। ऐसे में मछलियों के स्वास्थ्य, बढ़वार और वजन पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका रहती है। मत्स्य विशेषज्ञों ने किसानों को मौसम के अनुसार तालाब प्रबंधन करने की सलाह दी है।
हरा पानी होने पर चूना-गोबर का इस्तेमाल रोकें
विशेषज्ञों के अनुसार यदि बारिश के दौरान तालाब का पानी हरा हो जाए तो चूना और गोबर का इस्तेमाल 15 दिन से एक महीने तक रोक देना चाहिए। वहीं, अधिक बारिश होने की स्थिति में प्रति एकड़ तालाब में 15 से 20 किलो चूने का घोल डालने की सलाह दी गई है। हालांकि पानी की वास्तविक स्थिति के अनुसार मात्रा और उपचार तय करना अधिक उचित है।
मछली पालन में केवल गुणवत्तापूर्ण फीड देना ही पर्याप्त नहीं है। मछलियों की अच्छी ग्रोथ के लिए तालाब के पानी का संतुलित और स्वच्छ रहना भी जरूरी है। पानी की गुणवत्ता बिगड़ने पर मछलियों में बीमारी का खतरा बढ़ सकता है और उनकी बढ़वार धीमी हो सकती है, जिसका सीधा असर किसान की आय पर पड़ता है।
नर्सरी तालाब की तैयारी में रखें सावधानी
मछली के बीज तैयार करने वाले नर्सरी तालाब की भी विशेष देखभाल जरूरी है। बीज निकालने से एक दिन पहले फीड देना बंद कर देना चाहिए। दोबारा इस्तेमाल से पहले नर्सरी तालाब को सुखाकर तैयार करने की सलाह दी गई है।
तालाब तैयार करते समय प्रति एकड़ 1,000 से 2,000 किलो गोबर और 50 किलो चूना डालने की जानकारी दी गई है। इसके बाद तालाब में करीब एक फीट पानी भरना चाहिए। 5 से 7 दिन बाद पानी का स्तर बढ़ाकर करीब 5 फीट किया जा सकता है। इसके बाद प्रति एकड़ तालाब में करीब 20 लाख स्पॉन डाले जा सकते हैं।
जलीय खरपतवार हटाना जरूरी
मछली का बीज डालने से पहले तालाब में मौजूद जलीय खरपतवार को हटाना भी जरूरी है। इसके लिए 2,4-D जैसे खरपतवार नाशक का इस्तेमाल केवल कृषि/मत्स्य विभाग की अनुशंसित मात्रा और स्थानीय सलाह के अनुसार करने की जरूरत है, क्योंकि गलत मात्रा मछलियों और तालाब के पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचा सकती है।
मछली के बीज को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाते समय भी सावधानी जरूरी है। परिवहन के दौरान बीज को उचित तापमान और ऑक्सीजन वाली परिस्थितियों में रखने से उसकी गुणवत्ता और जीवित रहने की दर बेहतर बनी रह सकती है।
पानी की गुणवत्ता पर निर्भर है मछलियों की बढ़वार
तालाब के पानी की गुणवत्ता मछलियों के स्वास्थ्य और उत्पादन का महत्वपूर्ण आधार है। इसलिए बरसात में किसान नियमित रूप से पानी का रंग, गंध, मछलियों की गतिविधि और पानी में ऑक्सीजन की स्थिति पर नजर रखें। पानी की स्थिति में अचानक बदलाव या मछलियों के सतह पर आकर सांस लेने जैसे लक्षण दिखाई दें तो तत्काल मत्स्य विशेषज्ञ से सलाह लेना चाहिए।
सही समय पर तालाब की निगरानी और वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करने से बरसात के दौरान मछलियों को बीमारी से बचाने के साथ उनकी बेहतर बढ़वार और उत्पादन सुनिश्चित किया जा सकता है।
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