कट्ठीवाड़ा का ‘नूरजहाँ’ : दुनिया को लुभा रहा मध्यप्रदेश का विशाल आम
17 मई2026, भोपाल: कट्ठीवाड़ा का ‘नूरजहाँ’ : दुनिया को लुभा रहा मध्यप्रदेश का विशाल आम – मध्यप्रदेश का आलीराजपुर जिला इन दिनों दुनिया के सबसे विशाल और दुर्लभ आमों में गिने जाने वाले “नूरजहाँ” आम के कारण विशेष पहचान बना रहा है। आदिवासी अंचल कट्ठीवाड़ा में पैदा होने वाला यह आम अपने विशाल आकार, आकर्षक स्वरूप, अद्भुत मिठास और अनोखी सुगंध के लिए प्रसिद्ध है। 2 से 5 किलोग्राम तक वजन वाले इस आम को “किंग ऑफ मैंगो” कहा जाता है। इसकी एक फल की कीमत 1500 से 3000 रुपये तक पहुंच जाती है।
भारत को आमों का देश कहा जाता है और मध्यप्रदेश इस पहचान को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाले प्रमुख राज्यों में शामिल हो चुका है। प्रदेश की जलवायु, उपजाऊ मिट्टी और विविध भौगोलिक परिस्थितियां आम उत्पादन के लिए अत्यंत अनुकूल मानी जाती हैं। यहां दशहरी, लंगड़ा, चौसा, केसर, आम्रपाली, अल्फांसो और तोतापरी जैसी लोकप्रिय किस्मों के साथ “नूरजहाँ” जैसी विलक्षण प्रजाति भी उगाई जाती है, जिसने देश-विदेश में अपनी अलग पहचान बनाई है। नूरजहाँ आम केवल अपने विशाल आकार के कारण ही नहीं, बल्कि अपनी दुर्लभता के कारण भी विशेष माना जाता है। इसके पेड़ों पर सीमित संख्या में ही फल आते हैं, इसलिए इसकी मांग और कीमत सामान्य आमों की तुलना में कई गुना अधिक रहती है। कई बार एक-एक फल हजारों रुपये में बिकता है। कट्ठीवाड़ा का मौसम, मिट्टी और तापमान इस किस्म के लिए अत्यंत उपयुक्त माने जाते हैं, जिसके कारण यहां पैदा होने वाले फल विशिष्ट गुणवत्ता वाले होते हैं। यही वजह है कि यह आम किसानों के लिए लाभकारी फसल के रूप में उभर रहा है। लोक मान्यताओं के अनुसार नूरजहाँ आम की यह प्रजाति वर्षों पहले अफगान क्षेत्र से भारत पहुंची और बाद में मालवा तथा झाबुआ-आलीराजपुर अंचल में विकसित हुई।
आलीराजपुर जिले के ग्राम जूना कट्ठीवाड़ा स्थित शिव (बावड़ी) आम फार्म के कृषक श्री भरतराजसिंह जादव बताते हैं कि उनके पिता स्वर्गीय रणवीरसिंह जादव लगभग 55 से 60 वर्ष पूर्व गुजरात के बनमाह क्षेत्र से नूरजहाँ आम का पौधा लेकर आए थे। वर्षों की मेहनत और संरक्षण से यह पौधा आज पूरे क्षेत्र की पहचान बन चुका है। श्री जादव के अनुसार उनके पिता ने ग्राफ्टिंग तकनीक से इस विशेष किस्म को संरक्षित किया। वर्तमान में उस मूल पौधे की आयु लगभग 20 से 25 वर्ष मानी जाती है। इसके अतिरिक्त श्री भरतराजसिंह जादव द्वारा तैयार किए गए 11 ग्राफ्टेड पौधे भी अब विकसित हो रहे हैं, जिनकी आयु 3 से 5 वर्ष के बीच है। कट्ठीवाड़ा क्षेत्र में नूरजहाँ आम की ख्याति वर्षों पुरानी है। इसकी विशिष्टता को देखते हुए वर्ष 1999 और 2010 में इसे राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित भी किया गया। इन सम्मानों ने न केवल किसानों का उत्साह बढ़ाया, बल्कि आलीराजपुर जिले को राष्ट्रीय पहचान भी दिलाई। धीरे-धीरे यह आम मध्यप्रदेश की उद्यानिकी पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक बन गया। नूरजहाँ आम का इतिहास मालवा और पश्चिमी भारत की सांस्कृतिक विरासत से भी जुड़ा माना जाता है। मुगलकाल में बड़े आकार और उत्कृष्ट स्वाद वाले आमों को शाही बागों में विशेष महत्व दिया जाता था। माना जाता है कि उसी परंपरा से जुड़ी यह किस्म समय के साथ गुजरात और झाबुआ-आलीराजपुर क्षेत्र तक पहुंची। आदिवासी बहुल इस अंचल की जलवायु और मिट्टी ने इसे अनुकूल वातावरण दिया, जिसके कारण यह किस्म यहां सफलतापूर्वक विकसित हुई। पीढ़ियों से स्थानीय किसान इसका संरक्षण करते आ रहे हैं।
अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी नूरजहाँ आम की पहचान तेजी से बढ़ रही है। संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कतर और कुवैत जैसे खाड़ी देशों में बेस्ट क्वालिटी और वैरायटी के भारतीय आमों की अच्छी मांग है। वहां बड़े आकार और आकर्षक स्वरूप वाले फलों को विशेष पसंद किया जाता है। इसके अलावा अमेरिका, कनाडा और यूनाइटेड किंगडम में बसे भारतीय समुदाय के बीच भी यह आम लोकप्रिय हो रहा है। सिंगापुर और मलेशिया जैसे दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में भी इसकी मांग बढ़ती दिखाई दे रही है। हालांकि इसका उत्पादन सीमित मात्रा में होता है, इसलिए बड़े पैमाने पर निर्यात अभी संभव नहीं हो पाया है। इसके बावजूद अपनी दुर्लभता, विशाल आकार और उत्कृष्ट स्वाद के कारण नूरजहाँ आम अंतरराष्ट्रीय बाजार में “प्रीमियम मैंगो” के रूप में पहचान बना रहा है। मध्यप्रदेश सरकार और उद्यानिकी विभाग द्वारा किसानों को आधुनिक तकनीकों, उन्नत पौधों, ड्रिप सिंचाई और फल प्रसंस्करण के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे प्रदेश में आम उत्पादन बढ़ने के साथ किसानों की आय में भी वृद्धि हो रही है। आज “नूरजहाँ” केवल एक फल नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश की कृषि समृद्धि, आदिवासी अंचल की विरासत और वैश्विक पहचान का प्रतीक बन चुका है। कट्ठीवाड़ा की मिट्टी में उगने वाला यह विशाल आम अब प्रदेश की मिठास को दुनिया तक पहुंचा रहा है।
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