राज्य कृषि समाचार (State News)

कृषकों के लिए सौगात हैं जवाहर ट्राइकोडर्मा, दलहनी फसलों मे फफूंद जनित बीमारी हेतु रामबाण बायोकंट्रोल एजेंट

29 नवंबर 2025, भोपाल: कृषकों के लिए सौगात हैं जवाहर ट्राइकोडर्मा, दलहनी फसलों मे फफूंद जनित बीमारी हेतु रामबाण बायोकंट्रोल एजेंट – वर्तमान समय में रबी की फसलों की बुवाई का समय चल रहा है कृषि विज्ञान केन्‍द्र के वैज्ञानिकों ने जानकारी देते हुये बताया कि दलहनी-तिलहनी फसलों में एक प्रमुख समस्या फफूंद जनित रोग ,उकटा (बिल्ट) बीमारी इसके प्रकोप से पूरी फसल ही नष्ट हो जाती है। अतः फफूंद जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए किसान भाइयों को चाहिए कि उत्तम गुणवत्ता युक्त, बायो कंट्रोल एजेंट के रूप में ट्राइकोडर्मा एक वरदान के रूप में साबित हो रहा है ।चने की फसल में लगने वाले उग्रा या उकटा बीमारी हेतु रामबाण औषधि है।

इसका प्रयोग बीज उपचार एवं मृदा उपचार के रूप में कर सकते हैं । बीज उपचार हेतु 1 पैकेट (250 ग्राम) ट्राइकोडर्मा 20 से 30 किलो बीज के लिये पर्याप्त होता है, मृदा उपचार हेतु 1 से 2 किलो ट्राइकोडर्मा 50 किलो कम्पोस्ट में मिलाकर मिश्रण तैयार करके 1 एकड़ खेत में समान रूप से बिखर दे।

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जवाहर ट्राइकोडर्मा केरियर आधारित की जीवन क्षमता लगभग 6 माह होती हैएवं तरल रूप में उपलब्ध ट्राइकोडर्मा का जीवन क्षमता 1 वर्ष होती है। फसल की प्रारंभिक अवस्था से लेकर किसी भी अवस्था में खेत में यदि उकटा रोग के लक्षण नजर आए, इस वक्त जवाहर ट्राइकोडर्मा का भुरकाव या छिड़काव करना अति लाभकारी एवं सही परिणाम प्राप्त होते हैं जिससे पौधा रोग रहित होकर हरा हो जाता है

दलहनी एवं तिलहनी फसलों हेतु रामबाण औषधि,जैविक खेती हेतु उत्कृष्ठ बायो कन्ट्रोल,खरीफ व रबी की दलहनीय फसल में लाभकारी परिणाम प्राप्त होते है,जवाहर ट्राईकोडर्मा तरल व पाउडर दोनो का उत्पादन हो रहा है,कम लागत,पर्यावरण दृष्टीकोण से एवं फसलों हेतु मैत्रीपूर्ण होते है।  

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