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राज्य कृषि समाचार (State News)

नारे मारने की बजाय सूबे में पानी बचाने के लिए प्रयास करें: मुख्यमंत्री ने किसान यूनियनों से माँगा सहयोग

किसान आंदोलन को अनावश्यक और अनचाहा बताया, मुझे 10 जून और 18 जून के दरमियान फर्क अच्छी तरह पता -भगवंत मान

18 मई 2022, चंडीगढ़ । नारे मारने की बजाय सूबे में पानी बचाने के लिए प्रयास करें: मुख्यमंत्री ने किसान यूनियनों से माँगा सहयोग – पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने किसान आंदोलन को अनावश्यक और अनचाहा बताते किसान हुए यूनियनों को नारेबाज़ी बंद करने और पंजाब में गिर रहे पानी के स्तर को रोकने के लिए राज्य सरकार के उपरालों को सहयोग करने के लिए कहा।

यहाँ जारी एक बयान में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि धान की बुवाई के लिए बनाऐ क्रमवार प्रोगराम के साथ किसानों के हितों को कोई नुक्सान नहीं होगा बल्कि यह प्रयास राज्य में पानी के स्तर को बचाने के लिए बहुत ही सहायक सिद्ध हो सकता है। भगवंत मान ने कहा कि वह महान गुरू साहिबान के दिखाऐ मार्ग पर चल रहे हैं और उनको इससे कोई रोक नहीं सकता। उन्होंने साफ़ तौर पर कहा कि किसानों के साथ बातचीत के लिए उनके दरवाज़े हमेशा खुले हैं परन्तु उनके ख़िलाफ़ नारेबाज़ी पानी के स्तर को और नीचे जाने से रोकने प्रति उनके दृढ़ इरादे को तोड़ नहीं सकती।

मुख्यमंत्री ने कहा, “मैं ख़ुद एक किसान का पुत्र हैं और मुझे अच्छी तरह पता है कि किसानों को कौन सी ज़रूरत है। मैं 10 जून और 18 जून के दरमियान फर्क से भी पूरी तरह अवगत हूँ।” हालाँकि, भगवंत मान ने कहा कि पानी और हवा को बचाने में मेरा कोई निजी हित नहीं छिपा बल्कि इन बहुमूल्य कुदरती कीमती स्रोतों को बचाने के लिए उनकी बड़ी ज़िम्मेदारी बनती है। उन्होंने कहा कि किसानों को धरने – प्रदर्शन करने की बजाय पंजाब और पंजाबियों की बेहतरी के लिए इस नेक कार्य के लिए आगे आकर राज्य सरकार का साथ देना चाहिए। भगवंत मान ने कहा कि वह बासमती और मूँग की फ़सल को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने का ऐलान पहले ही कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सीधी बुवाई करने वाले किसानों को भी प्रेरित कर रही है।

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मुख्यमंत्री ने किसानों से एक साल तक राज्य सरकार के यतनों को सहयोग करने की माँग करते कहा कि यदि इस समय दौरान किसानों का कोई नुक्सान होता भी है तो राज्य सरकार उस की भरपायी करेगी। उन्होंने आंदोलनकारी किसान यूनियनों को मुखातिब होते कहा कि वह बताएं कि यदि राज्य में पानी बचाने और वातावरण प्रदूषण को रोकने के बारे वह (मुख्य मंत्री) अच्छा सोच रहे हैं जिससे इस में वह कहाँ गलत हैं। भगवंत मान ने आंदोलनकारी जत्थेबंदियाँ को यह भी सवाल किया कि जब बटाला में स्कूली बच्चों की बस का पराली जलाने के कारण हादसा घटा या आग लगने कारण दो छोटे बच्चों की मौत हो गई तो उन्होंने उस समय पर चुप क्यों बनाए रखी।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि अब समय आ गया है कि हम सभी ऐसा रास्ता पकड़ने की बजाय पंजाब को बचाने के लिए ठोस उपराले करें। भगवंत मान ने कहा कि वह लोक सभा में किसानों के मुद्दे उठाते रहे हैं और अब भी उनके हितों की रक्षा करना अपना फ़र्ज़ समझते हैं। हालाँकि, उन्होंने कहा कि किसानों को भी मौजूदा स्थिति की गंभीरता को समझते हुए राज्य सरकार का सहयोग करना चाहिए।