राज्य कृषि समाचार (State News)

पंगास मछली की बढ़ रही लोकप्रियता: जैसलमेर के किसान पाल रहे लाखों मछलियां

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गर्मी के महीनों में पंगास तेजी से बढ़ती है: थार में महकने लगी पंगास की मिठास

16 मई 2024, जैसलमेर: पंगास मछली की बढ़ रही लोकप्रियता: जैसलमेर के किसान पाल रहे लाखों मछलियां – जैसलमेर क्षेत्र के लोगो एवं विदेशी सैलानियों को ताजा मछली मिलाना बड़ा मुश्किल कार्य है। लेकिन अब किसानो की मेहनत एवं जूनून के वजह से ताजा मछली प्राप्त होने लगी है। क्षेत्र में गर्मी ज्यादा पड़ने की वजह से किसान यहाँ पंगास मछली का पालन आसानी से कर सकता है। ठंडे महीने की तुलना में गर्मी के महीनों में पंगास की वृद्धि तेजी से होती है। अत: संचयन गर्मी के शुरुआत में करना ज्यादा अच्छा है ताकि गर्मी में संचयन एवं पालन कर ठंडे के महीने में इनकी बाजार में बिक्री की जा सके। इस मछली को किसान इस लिए ज्यादा पसंद कर रहे हैं क्योंकि यह कम समय में तैयार होकर ज्यादा मुनाफा देती हैं।

यह होती है मछली की विशेषता

पंगास मछली मीठे पानी में पाली जाने वाली दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी प्रजाति है। यह प्रजाति 6-8 माह में 1.0 – 1.5 किग्रा की हो जाती है तथा वायुश्वासी होने के कारण कम घुलित आक्सीजन को सहन करने की क्षमता रखती है। भारत में आंध्रप्रदेश पंगास का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। अन्य मछलियों की तुलना में इसमें पतले कांटें कम होते हैं इसलिए यह प्रजाति प्रसंस्करण के लिए उपयुक्त है। मछली की मांग व्यापक होने के साथ साथ रोगों से लड़ने की क्षमता अधिक है।

ऐसे करे तालाब एवं जल का चयन

पंगास पालन के लिए संचयन तालाब का आकार 400 वर्ग मीटर तक अच्छा माना जाता है जिसमे 1 लाख तक मछली का पालन किया जा सकता है तथा तालाब में पानी की गहराई 2-3 मी. तक होनी चाहिए। अधिक गहराई वाले तालाब उपयुक्त नहीं हैं क्योंकि वायुश्वासी होने के कारण ये बार-बार पानी की सतह पर आकर आक्सीजन लेती हैं। ज्यादा गहराई होने से इन्हें ऊपर आने और जाने में ज्यादा ऊर्जा खपत करनी होगी जिससे उनकी वृद्धि दर कम हो जाती है। पंगास की अच्छी वृद्धि एवं अच्छे स्वास्थ्य के लिए पानी का पीएच- 6.5-7.5, लवणता 2 पी.पी.टी. से कम एव क्षारीयता 40 – 200 पी.पी.एम.होनी चाहिए।

पंगेशियस मछली का आहार

प्रारंभिक अवस्था में मछली को दिन में दो से तीन बार आहार दिया जाता है तथा बाद में धीरे धीरे वजन बढ़ने पर आहार की मात्रा को कम कर दिया जाता है। यह तालाब में उपलब्ध काई तथा घोंघे को खाती है। तालाब में पूरक आहार को बड़े चाव से खाती है। अगर तालाब में प्राकृतिक भोजन की उपलब्धता अच्छी हो तो पूरक आहार में खर्च काफी कम आता है।  इसकी वृद्धि के लिए सर्वोतम आहार पानी की सतह पर तैरने वाला माना जाता है। आहार में अधिक प्रोटीनयुक्त पदार्थ का उपयोग किया जाता है।

उत्पादन के साथ बढती है मिटटी की गुणवत्ता

एकल खेती में 15-20 ग्रा. की एक लाख अंगुलिकाओं को 400 वर्ग मीटर में एकत्रित  करने से 7-8 माह में 60-65 टन तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। जाड़े के दिनों में विशेषकर जब तापमान 15 डिग्री सेल्सियस से कम हो जाता है तो मछली तनाव में आ जाती है। खाना नहीं के बराबर खाती है जिससे इसका वजन घटने लगता है। ऐसी स्थिति में अक्टूबर माह तक मछली की निकासी कर लेनी चाहिए। तालाब के पानी को खेत में देने से मिटटी की गुणवत्ता में सुधार के साथ फसल का उत्पादन भी बढ़ता है ।

पंगास मछली में लागत और कमाई

मछली पालन में तालाब के अलावा किसान को पानी और आहार पर खर्च करना पड़ता है। इसमें लागत लाभ अनुपात 1:3 तक रहता है ।  बाजार में भी पंगास मछली की बड़ी डिमांड रहती है। इसलिए पंगास मछली पालने से अच्छी-खासी कमाई हो जाती है। 

तालाब में मछली का पालन कर रहा हूँ अभी मछली का वजन 1 से 1.5 किलोग्राम है जिसकी बिक्री फार्म पर ही हो रही है । जिससे मुझे कम जगह में बहुत अच्छा मुनाफा हो रहा साथ ही आमजनों को सस्ती एवं ताजा मछली प्राप्त हो रही है । बीरबल खान,प्रगतिशील किसान, खेलाना

गर्मी में खेती करना बड़ा मुश्किल होता है जिसकी वजह से मछली पालन का व्यवसाय शुरू करने से मुझे घर पर ही रोजगार प्राप्त हुआ तथा तालाब के पानी से फसल उत्पादन में इजाफा हुआ । हाजी हसन खान प्रगतिशील किसान, बांधेवा ।

क्षेत्र का वातावरण मछली अनुकूल होने के कारण किसान इसमें रुचि दिखा रहा और खेती के साथ साथ मछली पालन करने से आर्थिक तौर पर मजबूत हो रहा है जिससे जिले में युवाओ को रोजगार के नये अवसर प्राप्त होने लगे है । डॉ दशरथ प्रसाद, अध्यक्ष, कृषि विज्ञान केन्द्र, पोकरण

 पंगेशियस मछली में रोग प्रतिरोधकता अधिक एवं कम समय में वजन अधिक होने के कारण किसान इसको आसानी से अपना रहा है तथा खाने में पोषक तत्वों से भरपूर एवं खाने में स्वादिष्ट होती है । डॉ राम निवास, पशुपालन वैज्ञानिक      

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