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राज्य कृषि समाचार (State News)

यूपी में 10 लाख किसानों की बढ़ेगी आमदनी, खेती के साथ मछली पालन और महिलाओं को भी जोड़ने की तैयारी

27 अगस्त 2026, लखनऊ: यूपी में 10 लाख किसानों की बढ़ेगी आमदनी, खेती के साथ मछली पालन और महिलाओं को भी जोड़ने की तैयारी – उत्तर प्रदेश में किसानों की आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए राज्य सरकार ने नई पहल शुरू की है। लखनऊ में पूर्वी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड में कृषि उत्पादन बढ़ाने को लेकर एक समझौता हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में हुए कार्यक्रम में खेती के साथ मछली पालन और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

सरकार का लक्ष्य इस पहल का लाभ करीब 10 लाख किसानों, 35 हजार मछली पालक किसानों और 3 लाख महिलाओं तक पहुंचाना है। इसके तहत लगभग 6 लाख हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को चरणबद्ध तरीके से कवर करने की योजना है। उद्देश्य किसानों को आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पद्धतियों से जोड़कर कम लागत में अधिक उत्पादन हासिल कराना है।

खरीफ के बाद रबी पर भी रहेगा फोकस

पहल के तहत खरीफ 2026 में करीब 1.75 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को शामिल किया गया था। अब रबी सीजन 2026-27 में भी लगभग इतने ही क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। रबी में गेहूं, मटर, चना, मसूर और सरसों जैसी प्रमुख फसलों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

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सरकार का प्रयास है कि किसानों को बेहतर बीज, आधुनिक कृषि तकनीक और वैज्ञानिक सलाह उपलब्ध कराकर उत्पादन लागत को नियंत्रित किया जाए। इससे उत्पादकता बढ़ने के साथ किसानों की आय में भी सुधार हो सकेगा।

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि किसानों को केवल फसल पैदा करने तक सीमित नहीं रखना है, बल्कि उन्हें आधुनिक कृषि व्यवस्था का आर्थिक रूप से मजबूत भागीदार बनाना है। कृषि के साथ मत्स्य पालन और महिलाओं को जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

धान की खेती में बदलेगा पारंपरिक तरीका

मुख्यमंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (आईआरआरआई) के साथ साझेदारी के माध्यम से वैज्ञानिक और जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों को किसानों के खेतों तक पहुंचाया जा रहा है।

खरीफ 2026 में करीब 3,000 हेक्टेयर क्षेत्र में डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर) तकनीक अपनाई जा रही है। इस पद्धति में धान की पारंपरिक रोपाई के बजाय खेत में सीधे बीज बोए जाते हैं। इससे खेती की प्रक्रिया में बदलाव के साथ संसाधनों के अधिक प्रभावी उपयोग की संभावना है।

कार्ययोजना में धान के अलावा मक्का, बाजरा, ज्वार, अरहर, उड़द, तिल और मूंगफली जैसी फसलों को भी शामिल किया गया है। इसके जरिए अलग-अलग क्षेत्रों की कृषि परिस्थितियों के अनुरूप फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।

सरकार की इस पहल में आधुनिक विज्ञान और उत्तर प्रदेश की पारंपरिक कृषि पद्धतियों को जोड़ने पर जोर है। लक्ष्य साफ है—उत्पादन बढ़े, लागत घटे और किसानों की आमदनी में वास्तविक बढ़ोतरी हो। साथ ही खेती से जुड़े अन्य क्षेत्रों में रोजगार और आय के अवसर बढ़ाकर ग्रामीण परिवारों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जाए।

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