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राज्य कृषि समाचार (State News)

उज्जैन में सोयाबीन की फसल पहुंची फली और दाना भरने की अवस्था में, खेतों में नहीं मिला कीट-रोग का खास प्रकोप

06 सितंबर 2026, उज्जैन: उज्जैन में सोयाबीन की फसल पहुंची फली और दाना भरने की अवस्था में, खेतों में नहीं मिला कीट-रोग का खास प्रकोप – मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले में सोयाबीन की फसल अब फली बनने और दाना भरने की अवस्था में पहुंच गई है। फसल की स्थिति का जायजा लेने के लिए कलेक्टर के निर्देश और उप संचालक कृषि के.एस. कैन के मार्गदर्शन में जिला स्तरीय डायग्नोस्टिक दल ने विकासखंड घट्टिया और उज्जैन के विभिन्न गांवों का भ्रमण कर खेतों का निरीक्षण किया।

दल ने गुराड़िया गुर्जर, खजूरिया सदर, मालखेड़ी, बिसाखेड़ी, रूदाहेड़ा, देवानखेड़ी, सायरखेड़ी, नहारिया और भानबड़ोदिया सहित आसपास के क्षेत्रों में सोयाबीन की फसल का सघन निरीक्षण किया। इस दौरान किसानों से सीधे चर्चा कर फसल की वर्तमान स्थिति और उनकी समस्याओं की जानकारी भी ली गई।

65 से 70 दिन की हो चुकी है सोयाबीन

निरीक्षण के दौरान पाया गया कि सोयाबीन की फसल लगभग 65 से 70 दिवस की हो चुकी है और वर्तमान में फली बनने एवं दाना भरने की अवस्था में है। खेतों में फसल की स्थिति सामान्यतः अच्छी और स्वस्थ पाई गई। निरीक्षण के दौरान सोयाबीन में प्रमुख कीट एवं व्याधियों का कोई विशेष प्रकोप नहीं मिला।

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किसानों को नियमित निगरानी की सलाह

कृषि अधिकारियों और वैज्ञानिकों ने किसानों को आगामी दिनों में सोयाबीन की फसल की नियमित निगरानी करने की सलाह दी। किसानों से कहा गया कि खेत में किसी भी प्रकार के कीट या रोग के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल कृषि विभाग के मैदानी अमले से संपर्क करें और विशेषज्ञों की सलाह लें। साथ ही केवल अनुशंसित कीटनाशकों का ही समुचित छिड़काव करने की सलाह दी गई।

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किसानों को फार्मर आईडी और रबी की तैयारी के लिए किया प्रेरित

निरीक्षण भ्रमण उप संचालक कृषि के.एस. कैन के नेतृत्व में संपन्न हुआ। दल में नोडल अधिकारी एवं सहायक संचालक कृषि कमलेश कुमार राठौर, कृषि विज्ञान केंद्र उज्जैन के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. शैलेन्द्र सिंह, डॉ. एच.आर. जाटव, संबंधित ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, एटीएम (बीटीएम/एटीएम स्टाफ) और स्थानीय किसान मौजूद रहे।

वैज्ञानिकों और कृषि अधिकारियों ने किसानों को समसामयिक कृषि तकनीकी सलाह दी। इसके साथ ही किसानों को फार्मर आईडी बनवाने, आगामी रबी सीजन के लिए उर्वरकों का अग्रिम उठाव करने और प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों की सदस्यता ग्रहण करने के लिए भी प्रेरित किया गया।

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