ग्वालियर: खेत तालाब योजना से बदली किसान भोलाराम की खेती, अब साल में ले रहे दो फसलें
08 अक्टूबर 2026, ग्वालियर: ग्वालियर: खेत तालाब योजना से बदली किसान भोलाराम की खेती, अब साल में ले रहे दो फसलें – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रही कल्याणकारी योजनाएं किस तरह किसानों के जीवन में बदलाव ला रही हैं, इसकी एक मिसाल ग्वालियर जिले की ग्राम पंचायत रौरा के किसान भोलाराम कुशवाहा (भोगीराम कुशवाहा) की कहानी है। खेत तालाब योजना के तहत खेत में तालाब बनने से उनकी सिंचाई की समस्या दूर हुई और अब वे पहले की तुलना में बेहतर खेती कर पा रहे हैं।

पहले सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं था
किसान भोलाराम बताते हैं कि उनके पास खेती की जमीन थी, लेकिन सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं होने के कारण वे साल में केवल एक ही फसल ले पाते थे। पानी की कमी के चलते हर साल फसल की पैदावार को लेकर अनिश्चितता बनी रहती थी। इसका असर उनकी आर्थिक स्थिति और खेती की उन्नति पर भी पड़ रहा था।
खेत में तालाब बनने से बदली खेती की तस्वीर
सरकार की खेत तालाब योजना के तहत भोलाराम के खेत में तालाब का निर्माण कराया गया। तालाब बनने के बाद खेत में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हुई। भू-जल स्तर में सुधार और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलने से उनकी खेती में बदलाव आया। जहां पहले वे साल में केवल एक फसल उगा पाते थे, वहीं अब वे आसानी से दो फसलें ले रहे हैं। उनकी फसलें बेहतर तरीके से पक रही हैं और पैदावार में भी सुधार हुआ है।
अब पहले की तुलना में दोगुना लाभ
भोलाराम के अनुसार, खेत तालाब बनने के बाद अब वे अपनी खेती से पहले की तुलना में दोगुना लाभ कमा रहे हैं। सिंचाई की सुविधा मिलने से उन्हें खेती में अधिक स्थिरता मिली है और उनकी आर्थिक स्थिति में भी सुधार हुआ है। अपनी सफलता से उत्साहित किसान भोलाराम कुशवाहा ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद किया। उनका कहना है कि खेत तालाब योजना ने उनके जैसे छोटे किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में मदद की है। भोलाराम की सफलता अब रौरा पंचायत के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन गई है।
आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture

