राज्य कृषि समाचार (State News)

गुना: सोयाबीन, उड़द एवं मक्का फसल के लिए सामयिक सलाह

06 सितंबर 2026, गुनागुना: सोयाबीन, उड़द एवं मक्का फसल के लिए सामयिक सलाह –  वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख, कृषि विज्ञान केंद्र आरोन ने किसान भाइयों को सलाह दी है कि सोयाबीन एवं उड़द की फसल में कहीं-कहीं पर पीला मोजेक बीमारी के लक्षण दिखाई दे रहे हैं, रोग वाहक कीट के प्रबंधन हेतु कीटनाशक एसिटामेप्रिड + बायफेन्थ्रिन 25 % WG (250 ग्रा./हे.) या थायोमेथाक्जाम + लैम्बडासायहेलोथ्रिन (125 मि.ली./हे.) का छिड़काव करें।

 कुछ क्षेत्रों में सोयाबीन फसल में इल्लियों द्वारा नुकसान के समाचार मिले हैं, कीट-व्याधियों एवं रोगों से फसल की सुरक्षा हेतु अनुशंसित कीटनाशकों का छिड़काव करें। जहाँ पर तीनों प्रकार की पत्ती खाने वाली इल्लियाँ जैसे चने की इल्ली, तम्बाकू की इल्ली एवं सेमीलूपर हों इनके एक साथ नियंत्रण के लिये निम्न में से किसी एक रसायन का छिड़काव करें।

बोफ्लानिलाइड 300 एस.सी. (42-62 ग्रा./हे.) या फ्लूबेंडियामाइड 39.35 एस.सी. (150 मि.ली./हे.) या इन्डोक्साकार्ब 15.8 एस.सी. (333 मि.ली./हे.) या टेट्रानिलिप्रोल 18.18 एस.सी. (250-300 मि.ली./हे.) या नोवाल्युरोन + इन्डोक्साकार्ब 04.50 % एस.सी. (825-875 मि.ली./हे.) या क्लोरएन्ट्रानिलिप्रोल 18.5 एस.सी. (150 मि.ली./हे.) या इमामेक्टिन बेंजोएट 01.90 (425 मि.ली./हे.), सेमीलूपर इल्ली के नियंत्रण हेतु थायोमेथाक्जाम + लैम्बडासायहेलोथ्रिन (125 मि.ली./हे.) या क्लोरएन्ट्रानिलिप्रोल 09.30% + लैम्बडासायहेलोथ्रिन 0.46% ZC (200 मि.ली./हे.) का छिड़काव करें। फफूंद जनित रोग जैसे एन्थ्रेक्नोज एवं एरियल ब्लाइट बीमारी के प्रबंधन हेतु थायोफिनेट मिथाइल 70% 500 ग्राम/हे. या टेबुकोनाजोल 25.9% 500 मि.ली. या टेबुकोनाजोल 18.3% + एजोक्सीस्ट्रोबिन 11% का छिड़काव करें।

 मक्के की फसल में नमी बनाये रखने हेतु निराई-गुड़ाई एवं कुल्पा चलाने जैसी पद्धतियों का उपयोग करें। मक्के में शीथ ब्लाइट के नियंत्रण हेतु कार्बेन्डाजिम 1.5 ग्रा./ली. या प्रोपिकोनाजोल 1.0 मि.ली./ली. पानी का घोल बनाकर छिड़काव करें। मक्के की फसल में आर्मी वर्म एवं तना छेदक कीट के नियंत्रण के लिये स्पिनोसेड 150 मि.ली./हे. या इमामेक्टिन बेंजोएट 250 ग्राम/हे.; क्लोरएन्ट्रानिलिप्रोल 18.5 एस.सी. (150 मि.ली./हे.) पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। सभी फसलों में पानी की उपलब्धता के अनुसार जीवन रक्षक सिंचाई करें। पानी की बचत हेतु स्प्रिंकलर पद्धति का प्रयोग किया जा सकता है।

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