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राज्य कृषि समाचार (State News)

गुना: फसल अवशेष जलाने को लेकर प्रतिबंधात्मक आदेश जारी

10 अक्टूबर 2026, गुना: गुना: फसल अवशेष जलाने को लेकर प्रतिबंधात्मक आदेश जारी – कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट श्री किशोर कुमार कन्‍याल ने जिले में धान/मक्का की फसल की कटाई उपरांत उनके अवशेष को जलाने से होने वाले प्रदूषण एवं आगजनी की घटनाओं से आमजन के स्वास्थ्य एवं उनकी जानमाल की सुरक्षा तथा भूमि की उर्वरा शक्ति नष्ट न हो इसे दृष्टिगत रखते हुए जनहित में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता , 2023 की धारा 163 (1) के अंतर्गत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी  किए गए हैं।

मध्यप्रदेश शासन पर्यावरण विभाग मंत्रालय भोपाल द्वारा Air (Prevention & Control of Pollution) के तहत प्रदत्त अधिकारों के तहत  गेहूं /धान के अवशेषों को खेतों में ही अंधाधुंध तरीके से जलाए जाने को तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित करते हुए निर्देशित किया गया है, जो भी व्यक्ति/संस्था यदि ऐसा करते हुए पाए जाते  हैं  तो उसे नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशानुसार पर्यावरण मुआवजा (Environmental Compensation) अदा करना होगा। जिसमें 02 एकड़ या उससे कम भूमि धारक 2500/- रुपये प्रति घटना, 02 एकड़ से अधिक लेकिन 05 एकड़ से कम भूमि धारक 5000/- रुपये प्रति घटना एवं 05 एकड़ से अधिक भूमि धारक को 15000/- रुपये प्रति घटना देने होगें।

जारी आदेशानुसार जिले में धान/मक्का की फसल कटाने के उपरांत अवशेष कोई भी कृषक अपने खेत पर नहीं जला सकेंगे अर्थात फसल काटने के उपरांत उनके अवशेषों को जलाना पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा तथा प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किये गये हैं।हार्वेस्टर मशीन संचालकों को यह अनिवार्य होगा कि वे हार्वेस्टर मशीन के साथ-साथ भूसा बनाने की मशीन (स्ट्रारीपर) लगाकर फसल कटाई के बाद अवशेष से स्थल पर ही भूसा बनाकर अवशेष का निपटान करेंगे। प्रत्येक कम्बाईन हार्वेस्टर संचालक फसल कटाई प्रारंभ करने के पूर्व सहायक कृषि यंत्री, कृषि अभियांत्रिकी गुना कार्यालय में अपना पंजीयन करेंगे तथा फसल कटाई पंजी का संधारण सहायक कृषि यंत्री के निर्देशानुसार करेंगे।

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स्ट्रा रीपर के उपयोग कराये बिना यदि कोई कृषक फसल कटवाने हेतु दबाव बनाता है तो संबंधित कम्बाईन हार्वेस्टर संचालक इसकी सूचना तत्काल संबंधित ग्राम पंचायत निगरानी अधिकारी/पंचायत सचिव या संबंधित पुलिस थाने को देगा। हार्वेस्टर मशीन एवं स्ट्रा रीपर (भूसा बनाने के संयंत्र) से भूसा बनाने के दौरान निकलने वाली चिंगारी से आगजनी की घटना को रोकने हेतु मशीन संचालक अग्नि सुरक्षा संयंत्र के साथ-साथ आग बुझाने के लिए रेत एवं पानी की व्यवस्था भी सुनिश्चित करेंगे। खेतों के आसपास लगे ट्रांसफार्मर से कभी-कभी चिंगारी/शार्ट सर्किट से भी आगजनी की घटनाएं हो जाती है, ट्रांसफार्मर से फसल नष्ट होने का खतरा तो नहीं है, खतरे की स्थिति में किसान की सहमति से ट्रांसफार्मर के आसपास 10X10 फीट क्षेत्र को खुला रखा जावे। ताकि शोर्ट सर्किट से कोई भी फसल हानि न हो सके। इसके दृष्टिगत अधीक्षण यंत्री म.प्र. राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमि. यह सुनिश्चित करेंगे कि खेतों के आस-पास लगे ट्रांसफार्मर की निरंतर मॉनिटरिंग हो।

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जारी आदेश एकपक्षीय पारित किया गया है। यदि कोई व्यक्ति संस्था जिले के अंतर्गत धान/मक्‍का की फसल कटाई उपरांत फसल अवशेषों को जलाना है तो वह ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशानुसार आदेश अंतर्गत वर्णित अनुसार पर्यावरण मुआवजा अदा करने के साथ-साथ उक्‍त जारी आदेश के उल्लंघन भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 के तहत दंडनीय होगा। पर्यावरण मुआवजा निर्धारण तथा अर्थदण्ड हेतु संबंधित क्षेत्र के उपखंड मजिस्ट्रेट अधिकृत होंगे। उक्त आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा तथा दिनांक 10 फरवरी 2027 तक प्रभावशील रहेगा।

 नरवाई जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने निगरानी समितियों का गठन – कलेक्टर श्री किशोर कुमार कन्‍याल द्वारा जिले में नरवाई जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने हेतु जिला एवं ग्राम पंचायत स्तर पर निगरानी समितियों का गठन किया गया है।

जिला स्तर पर गठित समिति -समिति में संबंधित अनुविभाग के उपखण्ड मजिस्ट्रेट, संबंधित विकासखण्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत, अनुविभागीय कृषि अधिकारी, संबंधित तहसील के तहसीलदार, संबंधित विकासखण्ड के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, संबंधित नगरीय निकाय के सीएमओ/जोनल अधिकारी तथा क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को शामिल किया गया है। समिति द्वारा नरवाई जलाने पर रोक लगाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। किसानों को नरवाई जलाने के स्थान पर फसल अवशेषों से भूसा बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। संबंधित अधिकारी अपने कार्यक्षेत्र में नरवाई जलाने की घटनाओं की निगरानी करेंगे तथा शासन के निर्देशों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।

ग्राम पंचायत स्तर पर निगरानी दल का गठन – ग्राम पंचायत स्तरीय निगरानी दल में संबंधित ग्राम पंचायत के सरपंच को अध्यक्ष, ग्राम पंचायत सचिव को सदस्य सचिव तथा कृषि विस्तार अधिकारी, हल्का पटवारी, ए.व्ही.एफ.ओ. एवं ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी को सदस्य बनाया गया है। गठित निगरानी दल किसानों को चौपाल आयोजित कर नरवाई जलाने के दुष्प्रभावों एवं इसके लिए निर्धारित दंडात्मक प्रावधानों की जानकारी देगा। प्रत्येक चौपाल की कार्यवाही का अभिलेख तैयार किया जाएगा तथा अपने क्षेत्र में नरवाई जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए सतत निगरानी रखी जाएगी।

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