उर्वरक की कीमतों में आएगा उछाल !

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29 मार्च 2022, इंदौर । उर्वरक की कीमतों में आएगा उछाल  रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध का दुष्परिणाम देशवासियों को महंगाई के रूप में देखने को मिल रहा है। कच्चे तेल और अन्य उत्पादों के दामों में वृद्धि के बाद अब उर्वरक की कीमतों में उछाल आने की आशंका है। रूस, विश्व का प्रमुख उर्वरक आपूर्तिकर्ता देश है , जो इन दिनों युद्ध के चलते उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों के कारण उर्वरक की आपूर्ति नहीं कर पा रहा है , जिसके परिणामवरूप उर्वरक की कीमतें बढ़ेंगी।

उर्वरक से जुड़े सूत्रों के अनुसार रूस -यूक्रेन युद्ध के बाद उर्वरक की कीमतों में दस प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हो चुकी है। रूस पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों के बड़ा आपूर्ति संकट पैदा हो गया है , क्योंकि  वहां की शिपिंग कंपनियों ने भी बंदरगाहों पर माल एकत्रित नहीं किया है। इसी कारण रूस का निर्यात भी बहुत घट गया है। जैसा कि सभी जानते हैं कि उर्वरक के उत्पादन में पोटाश की भूमिका अहम होती है। भारत विदेशों से बड़ी मात्रा में पोटाश का आयात करता है। कुल उर्वरक के 10 -12 % की आपूर्ति रूस ,यूक्रेन और बेलारूस जैसे बड़े पोटाश निर्यातक देश करते हैं , लेकिन युद्ध के कारण पोटाश की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। फिलहाल पोटाश का आयात 280 रु डॉलर प्रति मैट्रिक टन की दर से किया जा रहा है , लेकिन अब इनके दामों में वृद्धि होने से उर्वरक के दाम बढ़ना तय है , जो भारतीय किसानों का आर्थिक बोझ बढ़ाएगा।

वर्तमान हालातों को देखते हुए आगामी खरीफ सीजन में भारतीय किसानों को न केवल उर्वरक की किल्लत  का सामना करना पड़ेगा , बल्कि कीमतों में होने वाली वृद्धि को भी सहन करना पड़ेगा। इसका कारण वैश्विक बाज़ार की आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने से डीएपी और एमओपी जैसे उर्वरक और इनके निर्माण में प्रयुक्त होने वाले फास्फोरिक अम्ल ,अमोनिया और सल्फर जैसे रसायनों की देश में पहुँचने की लागत में 25 % तक की वृद्धि होने से भारतीय उर्वरक कंपनियां भी हतप्रभ  हैं।  ऐसे हालात में किसानों को कम कीमत पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार को उर्वरक अनुदान की राशि को  बढ़ाना पड़ सकता है। देखना यह है कि इस बारे में सरकार क्या निर्णय लेती है। स्मरण रहे कि इस वर्ष के आम बजट में खाद सब्सिडी के लिए 1.05  लाख करोड़ रु का प्रावधान किया गया है। उधर , प्राकृतिक गैस के दाम बढ़ने से यूरिया की कीमतें भी बढ़ने की आशंका है ,क्योंकि यूरिया उत्पादन में प्राकृतिक गैस प्रमुख घटक होता है। दूसरी बात यह कि इस वर्ष मानसून सामान्य रहने की घोषणा के चलते आगामी खरीफ सत्र में यूरिया की मांग बढ़ सकती है , वहीं अनाज की कीमतों में आई वर्तमान की तेज़ी से खरीफ फसलों के रकबे में वृद्धि की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। कुल मिलाकर खरीफ सीजन में किसानों को उर्वरक की बढ़ती कीमतों  की आर्थिक मार सहने के लिए अभी से अपने मनोबल को मज़बूत करना होगा।  

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