गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध से किसानों को नुकसान

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 बोनस के सवाल पर कृषि मंत्री की टालमटोल

(विशेष प्रतिनिधि )

14 जून 2022, इंदौर । गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध से किसानों को नुकसान – पिछले दिनों  केंद्र सरकार द्वारा गेहूं की बढ़ती कीमतों को रोकने के साथ ही खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया गया था । केंद्र का यह फैसला राष्ट्रीय हितों को देखते हुए सही हो सकता है, लेकिन सरकार के इस निर्णय के तुरंत बाद गेहूं की कीमतों में 200 -300 रुपए /क्विंटल की गिरावट आ गई थी। इससे किसानों को हुए नुकसान को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा किसानों को क्षतिपूर्ति के रूप में 600 रुपए प्रति क्विंटल का बोनस दिया जाना चाहिए। पिछले दिनों इंदौर में आयोजित सोया महाकुम्भ में पधारे  केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री श्री कैलाश चौधरी से  पत्रकार वार्ता में कृषक जगत ने पूछा था कि गेहूं निर्यात प्रतिबंध से हुए नुकसान को देखते हुए क्या किसानों को बोनस दिया जाएगा ? इस सवाल पर टालमटोल रवैया अपनाते हुए उन्होंने जवाब दिया था कि सरकार समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदेगी।

 केंद्र सरकार द्वारा लिए गए  इस आकस्मिक निर्णय से गेहूं उत्पादक राज्य मप्र के किसानों को बहुत आर्थिक नुकसान हुआ है । पहली बार किसानों को मंडियों में समर्थन मूल्य से कहीं अधिक कीमत मिली तो अधिकांश किसानों ने उपार्जन केंद्रों पर गेहूं बेचने में रूचि नहीं दिखाई। अब बदले हालातों में यदि किसान गेहूं बेचेंगे तो उन्हें पूर्ववर्ती  भाव नहीं मिल पाएंगे। सरकार के इस फैसले से न केवल किसान बल्कि अनाज व्यापारी भी नाराज रहे । किसानों के साथ ही व्यापारियों ने भी अपनी इस नाराजगी  को सरकार के फैसले के तुरंत बाद  प्रदेश की मंडियों में दो दिन अनाज की खरीदी बंद कर सांकेतिक विरोध प्रदर्शित किया था।

उल्लेखनीय है कि दशकों बाद किसानों को गेहूं का सम्मानजनक दाम मिल रहा था। तब  खुले बाज़ार में गेहूं समर्थन मूल्य से 200 -500 रु तक ऊपर बिक रहा था। इसी कारण किसान उपार्जन केंद्रों पर गेहूं नहीं बेच रहे थे ,लेकिन जैसे ही गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध की घोषणा हुई  मंडियों गेहूं के दामों में 200-300 रुपए /क्विंटल  तक की गिरावट आ गई।  इससे किसानों को बहुत आर्थिक नुकसान हुआ। अभी भी किसान मंडी में गेहूं लेकर आ रहे हैं ,लेकिन भाव पहले जैसे नहीं मिलने से निराश हैं। ऐसे में किसानों को हुए नुकसान को देखते हुए सरकार को  क्षतिपूर्ति के लिए किसानों को 500 – 600 रु /क्विंटल बोनस  देना उचित  है। बीते वर्षों में राज्य सरकार द्वारा  समर्थन मूल्य के साथ किसानों को अलग से 100 -150 रु /क्विंटल का बोनस दिया गया था।          

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