प्राकृतिक खेती से किसान की दशा और दिशा बदलेगी

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मध्य प्रदेश प्राकृतिक खेती बोर्ड का गठन होगा

  • (विशेष प्रतिनिधि)

19 अप्रैल 2022, भोपाल । प्राकृतिक खेती से किसान की दशा और दिशा बदलेगी – मध्य प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए मध्य प्रदेश प्राकृतिक खेती बोर्ड का गठन किया जाएगा। एक दिन ऐसा आएगा जब मध्य प्रदेश प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में देश का नेतृत्व करेगा। खेती को लाभकारी बनाने तथा भूमि को बंजर होने से बचाने के लिए प्राकृतिक खेती उपयोगी साबित होगी। प्राकृतिक खेती कर्मकांड नहीं बल्कि किसान की दशा और दिशा बदलने का अभियान है। मध्य प्रदेश जैविक खेती में अव्वल है। भूमि को आगे आने वाली पीढ़ी के लिए बचाकर रखना है। प्रदेश में भू-जल संरक्षण के लिए जलाभिषेक अभियान चला रहे हैं। मैं भी पांच एकड़ भूमि पर प्राकृतिक खेती करूंगा। यह बात मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल में आयोजित शून्य बजट प्राकृतिक खेती पर कार्यशाला में कही।

50 साल में भूमि बंजर हो जाएगी

कार्यक्रम में गुजरात के राज्यपाल आचार्य श्री देवव्रत ने कहा कि खेतों में जिस तरह से हम यूरिया और डीएपी का उपयोग कर रहे हैं, उससे आने वाले 50 साल में भूमि बंजर हो जाएगी। यह यूएनओ की रिपोर्ट में बताया गया है। प्रतिवर्ष यूरिया और डीएपी की खपत बढ़ती जा रही है। इससे किसानों की लागत बढऩे के साथ उपज की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। धरती की सेहत खराब हो रही है और आमजन बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। इससे बचने का एकमात्र उपाय प्राकृतिक खेती है। इससे भूमि की उर्वराशक्ति बढ़ेगी और किसानों की लागत भी घटेगी।

प्राकृतिक खेती में उत्पादन बढ़ा

आचार्य श्री देवव्रत ने बताया कि मैं भी किसान हूं और हल भी चलाता हूं। कुरुक्षेत्र गुरुकुल में प्रधानाचार्य था तथा 35 साल बच्चों को शिक्षा दी। उन्होंने कहा कि 200 एकड़ में फैले गुरुकुल में खेती करते हैं, वे स्वयं पहले रसायनिक खादों का उपयोग खेतों में करते थे। एक दिन कीटनाशक का छिडक़ाव करते समय मजदूर खेत में गिर पड़ा। उसे अस्पताल ले गए। उसका जीवन तो बच गया पर यह विचार आया कि अपने गुरुकुल में देशभर के एक हजार 400 बच्चे पढ़ते हैं, उन्हें जो भोजन दिया जा रहा है, उसमें तो जहर है। तब पांच एकड़ में जैविक खेती प्रारंभ की। पहले साल कुछ उत्पादन नहीं मिला। दूसरे साल 50 प्रतिशत उत्पादन और तीसरे साल में 80 प्रतिशत उत्पादन हुआ लेकिन लागत और मेहनत कम नहीं हुई। इसके बाद प्राकृतिक खेती को अपनाया। पहले साल से ही उत्पादन मिला और यह साल-दर-साल बढ़ता गया। हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और गुजरात में इसे बड़े पैमाने पर अपनाया जा रहा है।

एक गाय से 30 एकड़ में खेती संभव

श्री मंगुभाई पटेल

मध्य प्रदेश के राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा कि कार्यक्रम से साढ़े नौ लाख किसान सीधे जुड़े हैं। छोटे-छोटे किसानों को इस अभियान से जोड़ेंगे ताकि भूमि की उर्वराशक्ति को बनाए रखा जा सके। उन्होंने कहा कि गांव-गांव तक प्राकृतिक खेती के लाभ को बताकर प्रचार-प्रसार कर जागरुकता पैदा की जाएगी।

श्री नरेन्द्र सिंह तोमर

वर्चुअल माध्यम से कार्यशाला में शामिल हुए केंद्रीय कृषि मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि मध्य प्रदेश कृषि क्षेत्र में अग्रणी राज्य है। अब प्राकृतिक कृषि में अव्वल बनाना है। कृषि पाठ्यक्रम में प्राकृतिक कृषि को शामिल करने के लिए समिति बनाई गई है। उन्होंने कहा कि खेती की नई चुनौतियों का सामना करने के लिए प्राकृतिक खेती जरुरी है। इसके लिए मैनेज संस्थान हैदराबाद में 750 ट्रेनर तैयार हो रहे हैं।

श्री कमल पटेल

इसके पूर्व कार्यक्रम के प्रारंभ मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री श्री कमल पटेल ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि रसायनिक खादों के अंधाधुंध उपयोग से आमजन के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। प्रदेश में जैविक खेती लगभग 17 लाख हेक्टेयर में हो रही है, अब प्राकृतिक खेती को बढ़ाया जाएगा जिससे मध्य प्रदेश प्राकृतिक राज्य बनेगा। कार्यक्रम में नगरीय प्रशासन एवं भोपाल के प्रभारी मंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह सहित बड़ी संख्या में कृषि अधिकारी एवं कृषकगण तथा स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। अंत में अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किए गए तथा प्रदेश के कृषि उत्पादन आयुक्त श्री शैलेन्द्र सिंह ने आभार व्यक्त किया।

ऐसे बनेगा जीवामृत

आचार्य श्री देवव्रत ने बताया कि प्राकृतिक खेती के लिए देशी नस्ल की गाय होनी चाहिए। एक गाय से 30 एकड़ में प्राकृतिक खेती संभव है। उससे जो गोबर और गोमूत्र मिलता है, उसे दो सौ लीटर के ड्रम में 170 लीटर पानी में मिलाकर रखना है। डेढ़ से दो किलोग्राम गुड़ और इतना ही बेसन तथा पेड़ के नीचे की मिट्टी मिलाना है। सुबह और शाम इसे पांच-पांच मिनट लकड़ी से घुमाएं। चार दिन में जीवामृत तैयार हो जाएगा। सिंचाई के साथ इसका खेत में छिडक़ाव करें। यह यूरिया का काम करेगा। इसी तरह घनजीवामृत भी तैयार होता है, जो डीएपी एवं अन्य तत्वों की पूर्ति करता है। बीजामृत से बीजों को शुद्ध किया जाता है। उन्होंने बताया कि एक ग्राम देशी गाय के गोबर में 300 करोड़ जीवाणुओं पाए जाते हैं जो भूमि में आर्गेनिक कार्बन को बढ़ाते हैं। साथ ही केंचुआ खाद से 13-14 तत्वों की भूमि में पूर्ति होती है। उन्होंने बताया कि 35 डिग्री तापमान होने पर खेतों से कार्बन उडऩे लगता है इसलिए खेतों में खाली स्थान को ढकना भी चाहिए। इससे नमी बनी रहेगी और पानी कम लगेगा। प्राकृतिक खेती से पहले वर्ष 50 प्रतिशत पानी बचेगा फिर 60 प्रतिशत तथा 70 प्रतिशत तक वर्ष दर वर्ष पानी की बचत होगी। भूमि को ढंकने पर खरपतवार भी नहीं उगेंगे। श्री देवव्रत ने कहा कि प्राकृतिक खेती लाभकारी है इससे ग्लोबल वार्मिंग नहीं होगी, पानी बचेगा, स्वास्थ्य सुधरेगा, धन बचेगा तथा आय भी बढ़ेगी।

तकनीकी सत्रों के सुझाव

डॉ. गगनेश शर्मा (निदेशक, राष्ट्रीय जैविक खेती केन्द्र गाजियाबाद

  • प्राकृतिक खेती के समस्त तत्वों को संरक्षित रखते हुए विधियों को आसान बनाने का प्रयास करना चाहिए ताकि किसान आसानी से समझें।
  • बेहतर मार्केटिंग के प्रयास करना होंगे।
  • सभी कृषकों को प्राकृतिक खेती अपनाना चाहिए।
  • प्राकृतिक खेती के लिए पंजीयन व्यवस्था सरल हो।
  • प्रमाणीकरण जिला स्तर पर हो।

श्री राजेश पोरवाल ( राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखिल भारतीय स्वदेशी संघ)

  • स्वदेशी पद्धति का पूरी तरह पालन करें।
  • मशीनों का प्रयोग होना चाहिए।
  • जीवामृत अकेले ही फायदा पहुंचाने में सक्षम है।

श्री मारुति माने (विशेषज्ञ)

धरती को हरा-भरा करने का संकल्प लेना जरूरी है।

डॉ. पहलवान (संचालक प्रक्षेत्र, ज.ने.कृ.विवि. जबलपुर)

  • यदि प्राकृतिक खेती की ओर जाना चाहते हैं तो मिट्टी के स्वास्थ्य का ध्यान रखना जरूरी है।
  • मिट्टी में कितना सुधार हुआ है यही मानक है।

श्री हरी साहू (वैज्ञानिक)

  • अंतरवर्तीय फसलों की खेती से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है।
  • देशी गाय जरूरी है साथ ही वाप्सा पद्धति का प्रयोग करना चाहिए।

श्री मिहिर शाह (अध्यक्ष, नेशनल मोतिशन फार नेचुरल फार्मिंग)

  • प्रारंभ में विरोध के बाद हर नया काम संभव हो जाता है।
  • मिट्टी को सुधारने का कार्य होना चाहिए।
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श्री निरूपम मेहरोत्रा (महाप्रबंधक, नाबार्ड)

  • विपणन क्षेत्र में कुछ समस्याएं हैं उनका निराकरण होना चाहिए।
  • जिन कृषकों को अपना उत्पाद देश के अंदर बेचना है वह पीजीएम सिस्टम को अपना सकते हैं।
  • एफपीओ को मार्केटिंग की दिशा में कार्य करना चाहिए।

श्री विकास नरवाल (प्रबंध संचालक, मंडी बोर्ड भोपाल)

  • सभी मंडियों में अब नीलामी किस्मवार एवं ग्रेडवार की जा रही है।
  • जैविक एवं प्राकृतिक उत्पाद की मंडियों में नीलामी की अलग-अलग व्यवस्था होनी चाहिए।

श्री प्रमल गुप्ता (संचालक ग्रीन फाउंडेशन)

  • हमारा फाउंडेशन लघु एवं सीमान्त कृषकों के साथ प्राकृतिक खेती कर रहा है।

पवन कुमार (सीईओ पतंजलि आर्गेनिक)

  • प्रतिभा तिवारी (फाउण्डर भूमिशा आर्गेनिक) एवं
    श्रीमती रेखा पंद्राम (तेजस्वनी नारी चेतना महिला संघ) डिंडोरी ने भी विचार व्यक्त किए।

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