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राज्य कृषि समाचार (State News)

सोयाबीन की वर्तमान स्थिति पर कृषक-वैज्ञानिक परिचर्चा आयोजित

15  जुलाई 2022, इंदौर: सोयाबीन की वर्तमान स्थिति पर कृषक-वैज्ञानिक परिचर्चा आयोजित – आईसीएआर-आई.आई.एस.आर ,आत्मा परियोजना जिला इंदौर , सोलिडरीडाड, भोपाल व आई.टी.सी.के संयुक्त तत्वावधान में आज सोयाबीन की वर्तमान स्थिति  पर ऑन लाइन कृषक-वैज्ञानिक परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस सत्र में संस्थान के वैज्ञानिकों सहित पूरे देश से 2000 से अधिक प्रगतिशील कृषकों ने भाग लिया।

प्रारंभिक सत्र में संस्थान के डॉ बी.यु दुपारे, प्रधान वैज्ञानिक (कृषि विस्तार) ने विभिन्न समयावधि में की गई बोनी  के कारण सामने आने वाले परिणामों के बारे में सचेत करते हुए कहा कि इस वर्ष सोयाबीन फसल पर आक्रमण करनेवाले कीटों का प्रकोप एवं उनके जीवनचक्र बढ़ने की सम्भावना को देखते हुए किसान सतर्क रहें। सोलिडरीडाड संस्था के डॉ सुरेश मोटवानी ने कहा कि सोयाबीन की खेती में आने वाली समस्याओं के समाधान के लिए इस समय किसानों को ऐसे सत्र की आवश्यकता है । आई.टी.सी.लि के सहयोगी प्रबंधक, (कृषि सेवाएं) श्री राकेश मोहन यादव ने कहा कि इंदौर संस्थान द्वारा प्रसारित सम-सामयिक सलाह के माध्यम से बोनी  के पूर्व एवं पश्चात उपयोग में आने वाली महत्वपूर्ण जानकारियां किसानों को मिलती हैं। वहीं श्रीमती शर्ली थॉमस, परियोजना निदेशक,आत्मा , इंदौर ने सोयाबीन की वर्तमान स्थिति को देखते हुए इस सत्र को सभी किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया । प्रभारी निदेशक, डॉ एस. डी. बिल्लोरे ने किसानों से कहा कि इस वर्ष बोनी लम्बे समय तक की गई  है, जिसके कारण विभिन्न समस्याओं का भी सामना  करना पड़ सकता है, साथ ही कृषकगण बिना उचित जानकारी के दो रसायनों के उपयोग से बचें  साथ ही अनुशंसित रसायनों का ही उपयोग करें।

प्रख्यात कीट वैज्ञानिक डॉ अमर नाथ शर्मा ने सोयाबीन के प्रमुख कीटों के प्रबंधन के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि इस वर्ष किसानों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। उनके अनुसार यह अत्यंत उपयुक्त समय है, जब किसान खरपतवार नियंत्रण के लिए खरपतवारनाशकों का छिडकाव करते समय क्लोरइंट्रानिलिप्रोल नामक कीटनाशक का भी एक साथ मिलकर छिडकाव कर सकते हैं, जिससे खरपतवार नियंत्रण के साथ-साथ अगले एक माह तक पत्ती खाने वाले कीटों के प्रकोप से फसल को सुरक्षित किया जा सके । इस परिचर्चा में संस्थान के जिन वैज्ञानिकों द्वारा विभिन्न विषयों पर किसानों को उचित जानकारियाँ एवं परामर्श दिया गया , उनमें  डॉ आर.के. वर्मा, डॉ लोकेश कुमार मीणा और डॉ लक्ष्मण सिंह राजपूत शामिल हैं। कार्यक्रम से जुड़े श्रोता एवं दर्शकों से सोयाबीन फसल पर पूछे गए विभिन प्रश्नों के तकनीकी  एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जानकारी देकर उनकी समस्याओं  का निराकरण किया गया। अंत में ,डॉ सविता कोल्हे, (प्रधान वैज्ञानिक) द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया गया।

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