नर्मदापुरम जिले में गांव-गांव किसान खेत पाठशाला का आयोजन
04 फ़रवरी 2025, नर्मदापुरम: नर्मदापुरम जिले में गांव-गांव किसान खेत पाठशाला का आयोजन – जिला प्रशासन द्वारा नरवाई में आग लगने की घटनाओं को नियंत्रित करने, नरवाई में आग लगने के दुष्परिणामों, संतुलित उर्वरक प्रबंधन कर खेती से शुद्ध आय में वृद्धि करने एवं ग्रीष्मकालीन मूंग फसल में अत्यधिक मात्रा में कीटनाशकों के प्रयोग से होने वाले दुष्परिणामों के प्रति किसानों को जागरूक करने के लिए जिले के प्रत्येक ग्राम में 15 जनवरी से निरंतर खेत पाठशाला का आयोजन किया जा रहा है, जो 10 फरवरी तक चलेगा ।
उप संचालक कृषि श्री जे.आर हेडाऊ ने बताया कि गेहूं फसल की कटाई के बाद किसानों द्वारा ग्रीष्मकालीन मूंग फसल की बोनी की जाती है। किसानों को सलाह दी गई कि फसल के अवशेष या नरवाई जलाकर नष्ट करने की अपेक्षा उसका उचित प्रबंधन कर, भूमि की उर्वरा शक्ति एवं पर्यावरण को प्रभावित किए बिना अधिक उपज प्राप्त करें। नरवाई में आग लगाने से मिट्टी में उपस्थित सूक्ष्म जीवाणु, केंचुआ व अन्य लाभकारी जीव नष्ट हो जाते हैं, मिट्टी की जैव-विविधता समाप्त हो जाती है। आधुनिक तकनीक से निर्मित सुपर सीडर यंत्र एवं पूसा डी-कंपोजर के प्रयोग से सकारात्मक व सफल परिणाम प्राप्त हो रहे हैं। इस दौरान किसानों को खेत की मिट्टी के प्रकार, फसल की अवस्था और मौसम की स्थिति अनुसार सही समय पर, सही विधि से, सही मात्रा में संतुलित उर्वरक प्रबंधन की सलाह दी गई। जिले में कुछ ग्रीष्मकालीन मूंग उत्पादक किसानों द्वारा फसल में कीट व्याधियों के नियंत्रण हेतु कीटनाशक रसायनों के प्रयोग के साथ ही फसल कटाई के पूर्व मूंग फसल को सुखाने के लिए भी गैर अनुशंसित अत्यधिक मात्रा में शाकनाशी रसायनों का प्रयोग किया जाता है , जो मानव स्वास्थ्य , पशुओं, कृषि भूमि और पर्यावरण के प्रतिकूल है। किसानों को एकीकृत कीट प्रबंधन को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा ह।
उल्लेखनीय है कि 30 जनवरी तक जिले में 860 के ग्रामों में किसान खेत पाठशालाएं आयोजित की गई है, जिसमें 18,060 कृषकों की भागीदारी के साथ-साथ 890 जनप्रतिनिधिगण भी उपस्थित रहे। किसान खेत पाठशालाओं का आयोजन निरंतर किया जा रहा है। यह कार्यक्रम जिले में लगभग 10 फरवरी 2025 तक आयोजित किया जावेगा, ताकि इनके माध्यम से किसानों को टिकाऊ कृषि पद्धति अपनाने, स्वस्थ समाज, स्वस्थ वातावरण और बेहतर फसल उपज सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक ज्ञान और कौशल से दक्ष किया जा सके। किसानों से किसान खेत पाठशालाओं में उपस्थित रहकर नवीन टिकाऊ कृषि पद्धतियों पर बहुमूल्य जानकारी एवं शासन द्वारा चलाई जा रही किसान हितैषी योजनाओं का लाभ लेने की अपील की गई है।
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