तेलंगाना में कृषि यंत्रीकरण योजना फिर शुरू, 2026-27 के लिए 147.99 करोड़ रुपये मंजूर
13 अक्टूबर 2026, हैदराबाद: तेलंगाना में कृषि यंत्रीकरण योजना फिर शुरू, 2026-27 के लिए 147.99 करोड़ रुपये मंजूर – तेलंगाना सरकार ने कृषि यंत्रीकरण योजना को 2026-27 के लिए फिर से शुरू करने का फैसला किया है। कृषि मंत्री तुम्मला नागेश्वर राव ने गुरुवार को बताया कि इस बार योजना के लिए 147.99 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जो पिछले साल के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है।
पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस योजना के लिए शुरुआत में 71 करोड़ रुपये रखे गए थे, जिनमें से करीब 63 करोड़ रुपये यानी लगभग 89 प्रतिशत राशि खर्च हो गई थी। इस बार का आवंटन उस पूरे खर्च से भी करीब 85 करोड़ रुपये ज्यादा है।
किसे कितनी सब्सिडी
योजना के तहत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के किसानों को कृषि यंत्रों की खरीद पर 60 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलेगी। पिछड़ा वर्ग और अन्य श्रेणी के किसानों के लिए यह सब्सिडी 40 प्रतिशत रखी गई है।
सब्सिडी की राशि सीधे किसानों के बैंक खाते में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी डीबीटी के जरिए भेजी जाएगी। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी और पैसा समय पर किसान तक पहुंच सकेगा।
राज्य सरकार ने इस बार एक अहम बदलाव भी किया है। लाभार्थी किसानों के लिए किसी खास कंपनी या अधिकृत डीलर से ही यंत्र खरीदने की कोई बाध्यता नहीं रहेगी। किसान किसी भी सूचीबद्ध यानी एंपैनल्ड सप्लायर से अपनी पसंद के मुताबिक उपकरण खरीद सकेंगे।
अधिकारियों के मुताबिक इस फैसले के पीछे मकसद किसानों की पसंद का दायरा बढ़ाना और बाजार में यंत्र बनाने वाली कंपनियों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बनाए रखना है। इससे किसानों को बेहतर दाम और गुणवत्ता दोनों मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
केंद्र की गाइडलाइन का इंतजार
राज्य सरकार स्थानीय और केंद्रीय दोनों तरह के फंड को जोड़कर इस योजना के नए चरण को आगे बढ़ा रही है। हालांकि अभी राज्य केंद्र सरकार की अंतिम परिचालन गाइडलाइन का इंतजार कर रहा है।
अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि केंद्र से गाइडलाइन मिलते ही लाभार्थियों का चुनाव तुरंत शुरू कर दिया जाए, ताकि यंत्रों के वितरण में देरी न हो। खासकर रबी सीजन की बुवाई के समय किसानों को ट्रैक्टर, पावर टिलर और अन्य कृषि यंत्रों की जरूरत बढ़ जाती है।
तेलंगाना में पिछले कुछ वर्षों में कृषि यंत्रीकरण पर सरकार का जोर बढ़ा है, क्योंकि छोटे और मझोले किसानों के लिए महंगे यंत्र खरीदना मुश्किल होता है। सब्सिडी वाली इस योजना से राज्य के कई जिलों में खेती के काम तेज और कम खर्च में होने की उम्मीद है।
खेती में मजदूरों की कमी और मजदूरी की बढ़ती दर के बीच ट्रैक्टर, पावर टिलर, थ्रेशर और रीपर जैसे यंत्र किसानों के लिए समय और लागत दोनों बचाने का जरिया बनते जा रहे हैं। खासकर धान और कपास की कटाई के समय इन यंत्रों की मांग सबसे ज्यादा रहती है, और सब्सिडी न मिलने पर कई छोटे किसान इन्हें किराए पर लेने को मजबूर होते हैं।
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पिछले साल की योजना के अनुभव से सीखते हुए इस बार वितरण प्रक्रिया को आसान बनाने की कोशिश की जा रही है। आवेदन से लेकर भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन रखने पर भी विचार चल रहा है, ताकि किसानों को बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें। राज्य सरकार का कहना है कि योजना का पूरा विवरण और आवेदन प्रक्रिया केंद्र की गाइडलाइन आने के बाद सार्वजनिक की जाएगी।
कृषि यंत्र बनाने वाली कंपनियों के स्थानीय डीलरों का कहना है कि किसानों को किसी एक ब्रांड तक सीमित न रखने की नीति से छोटे और नए विक्रेताओं को भी बाजार में मौका मिलेगा। इससे अलग-अलग इलाकों में यंत्रों की मरम्मत और सर्विस की सुविधा भी बेहतर होने की उम्मीद है, जो अभी तक कई गांवों में एक बड़ी समस्या रही है। किसान संगठनों ने भी सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है, हालांकि उनका कहना है कि सब्सिडी की राशि समय पर खाते में आना सबसे ज्यादा जरूरी है।
आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture


