Ad DesktopAd TabletAd Mobile
राज्य कृषि समाचार (State News)

वैज्ञानिकों की प्रत्यक्ष निगरानी में प्रदर्शन प्लॉट लगाएं – कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान

 उन्नत कृषि तकनीकों को बढ़ावा दिया जाए

07 अक्टूबर 2026, इंदौर: वैज्ञानिकों की प्रत्यक्ष निगरानी में प्रदर्शन प्लॉट लगाएं – कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान – “गाँव से किसानों को बाहर निकालना नहीं, बल्कि खेती को अधिक लाभकारी बनाकर किसानों की आमदनी बढ़ाना हमारा लक्ष्य होना चाहिए। किसान विभिन्न फसलों और किस्मों की खेती करते हैं, फिर भी अपेक्षित लाभ प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के विभिन्न संस्थानों के वैज्ञानिकों की प्रत्यक्ष देखरेख में प्रदर्शन प्लॉट स्थापित कर किसानों को उन्नत तकनीकों से जोड़ना, खेती की लागत कम करना तथा कृषि उत्पादों की गुणवत्ता और उत्पादकता में सुधार लाना आवश्यक है।” यह विचार केंद्रीय  कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने  राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर द्वारा आयोजित दो दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन पर व्यक्त किए। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम “सोयाबीन की उन्नत उत्पादन, फसल संरक्षण एवं मूल्य संवर्धन/प्रसंस्करण तकनीक” विषय पर आयोजित किया गया था ।

ज्ञात हो कि कृषि मंत्री के मार्गदर्शन में मध्य प्रदेश कृषि रोडमैप–2026 के अंतर्गत रायसेन, विदिशा, सीहोर एवं देवास जिलों के विभिन्न गाँवों में कृषि विकास से संबंधित एक व्यापक परियोजना क्रियान्वित की जा रही है। इस पहल के अंतर्गत भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के विभिन्न संस्थानों द्वारा संबंधित फसलों की उन्नत तकनीकों के प्रदर्शन प्लॉट स्थापित किए जा रहे हैं। साथ ही किसानों की क्षमता निर्माण, तकनीकी ज्ञान एवं जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर द्वारा सीहोर जिले के विभिन्न गांवों से चयनित लगभग 20 किसानों के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।प्रशिक्षण में बाया, मकोड़िया, सतार, निम्ना, चींच, चांदा, ग्रहण, रिहेटी, बोरदी, सरदार नगर, कावदा एवं जहानपुर सहित विभिन्न गाँवों के किसानों ने सहभागिता की। प्रतिभागियों में भैरूंदा, सलकनपुर, लाड़कुई, चकल्दी एवं गोपालपुर क्षेत्र के किसान भी शामिल रहे।

उन्नत उत्पादन तकनीकों का प्रशिक्षण –  प्रशिक्षण के दौरान किसानों को सोयाबीन की उन्नत उत्पादन तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी गई। विशेष रूप से रेज्ड-बेड तथा ब्रॉड-बेड-फरो (BBF) पद्धति से सोयाबीन की बुवाई के लाभों पर वैज्ञानिकों द्वारा जानकारी दी गई। किसानों को बेहतर जल प्रबंधन, फसल की स्थापना, उत्पादन लागत में कमी तथा प्रतिकूल मौसम की परिस्थितियों में फसल को अधिक सक्षम बनाने में इन तकनीकों की उपयोगिता से अवगत कराया गया। इसके साथ ही सोयाबीन फसल को जैविक एवं अजैविक तनावों से बचाने, खरपतवार प्रबंधन,रोग एवं कीट प्रबंधन तथा अन्य समसामयिक फसल संरक्षण तकनीकों की जानकारी दी गई। किसानों को संस्थान में स्थापित विभिन्न प्रदर्शन प्लॉटों का भ्रमण भी कराया गया,  जहां  वैज्ञानिकों ने खेत स्तर पर तकनीकों की उपयोगिता एवं उनके व्यावहारिक पक्षों को समझाया।

Ad DesktopAd TabletAd Mobile

सोयाबीन के मूल्य संवर्धन एवं प्रसंस्करण पर विशेष जोर –  प्रशिक्षण का एक महत्वपूर्ण आकर्षण सोयाबीन के मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण एवं सोया आधारित खाद्य पदार्थों के निर्माण का सजीव प्रदर्शन रहा। संस्थान की वैज्ञानिक डॉ. नेहा पांडे द्वारा सोयाबीन से दूध, पनीर, उपमा, हलवा, कुकीज आदि विभिन्न खाद्य पदार्थ तैयार करने की विधि का प्रदर्शन किया गया। प्रशिक्षार्थियों ने इन उत्पादों को न केवल बनाने की प्रक्रिया को समझा, बल्कि उनका स्वाद भी लिया और सोया आधारित खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता एवं स्वाद की भरपूर सराहना की। वैज्ञानिकों ने किसानों को बताया कि सोयाबीन के प्राथमिक उत्पादन के साथ-साथ प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन को अपनाकर किसान एवं ग्रामीण परिवार अतिरिक्त आय के अवसर विकसित कर सकते हैं।

कृषक जगत को व्हाट्सएप पर फॉलो करें
खेती-किसानी की ताज़ा खबरें, सीधे आपके फ़ोन पर
चैनल फॉलो करें

बीज प्रसंस्करण इकाई एवं प्रदर्शन क्षेत्रों का भ्रमण -प्रशिक्षण के दौरान किसानों को संस्थान की बीज प्रसंस्करण इकाई का भ्रमण कराया गया तथा गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन एवं प्रसंस्करण से संबंधित जानकारी दी गई। इसके अलावा किसानों ने संस्थान में चल रहे विभिन्न अनुसंधान एवं प्रदर्शन कार्यक्रमों को भी देखा और वैज्ञानिकों से सीधे संवाद किया। दो दिवसीय प्रशिक्षण  में किसानों ने विभिन्न विषयों पर वैज्ञानिकों से चर्चा की तथा अपनी खेती से संबंधित समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया। वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक समाधान उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया।

वैज्ञानिकों एवं टीम का योगदान–  यह प्रशिक्षण कार्यक्रम संस्थान के निदेशक डॉ. के. एच. सिंह के नेतृत्व में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के सफल आयोजन एवं किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करने में डॉ. बी. यू. दुपारे, समन्वयक डॉ. लोकेश कुमार मीना, डॉ. संजीव कुमार तथा डॉ. हेमंत माहेश्वरी सहित संस्थान के वैज्ञानिकों एवं तकनीकी दल ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। प्रशिक्षण के समापन अवसर पर वैज्ञानिकों ने कहा कि किसानों को केवल तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रदर्शन, प्रशिक्षण, वैज्ञानिकों की प्रत्यक्ष निगरानी तथा तकनीक के खेत स्तर पर सफल क्रियान्वयन के माध्यम से किसानों को लाभान्वित करना आवश्यक है।  ऐसे  कार्यक्रम किसानों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने, खेती की लागत कम करने, उत्पाद की गुणवत्ता सुधारने तथा सोयाबीन आधारित मूल्य संवर्धन के माध्यम से कृषक आय में वृद्धि की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture