राज्य कृषि समाचार (State News)

रबी फसलों के लिए जरूरी कृषि सलाह, गेहूं में टिलरिंग बढ़ाने और सरसों में रोग नियंत्रण पर दें विशेष ध्यान

09 जनवरी 2026, नई दिल्ली: रबी फसलों के लिए जरूरी कृषि सलाह, गेहूं में टिलरिंग बढ़ाने और सरसों में रोग नियंत्रण पर दें विशेष ध्यान –  मौसम में हो रहे लगातार बदलाव और रबी फसलों की वर्तमान अवस्था को देखते हुए कृषि विभाग द्वारा किसानों के लिए फसल-विशिष्ट कृषि सलाह जारी की गई है। विभाग ने गेहूं, सरसों, चना एवं फलदार पौधों की फसलों में इस समय विशेष देखभाल और सतत निगरानी रखने की अपील की है, ताकि उत्पादन और गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

गेहूं की फसल टिलरिंग अवस्था में, दूसरी सिंचाई जरूरी

कृषि विभाग के अनुसार वर्तमान में गेहूं की फसल टिलरिंग अवस्था (40 से 45 दिन) में है। इस समय दूसरी सिंचाई करना अत्यंत आवश्यक है, जिससे टिलर्स की संख्या में वृद्धि होगी और उपज बेहतर होगी।

यूरिया की सीमित उपलब्धता को देखते हुए किसानों को सलाह दी गई है कि वे 2 किलोग्राम यूरिया को 100 लीटर पानी में घोलकर, उसमें 500 ग्राम जिंक सल्फेट और चूने का पानी मिलाकर पत्तियों पर छिड़काव करें। इससे नाइट्रोजन, जिंक एवं कैल्शियम की पूर्ति होगी और मात्र 10 किलोग्राम यूरिया प्रति हेक्टेयर से ही फसल की पोषक तत्व आवश्यकता पूरी की जा सकती है।

सरसों में रोगों की आशंका, समय पर नियंत्रण जरूरी

सरसों की फसल में इस समय झुलसा रोग, सफेद फफोला तथा मृदुरोमिल आसिता रोग की संभावना बनी हुई है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे फसल की नियमित निगरानी करें।

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रोग के लक्षण दिखाई देने पर नियंत्रण हेतु 2.5 ग्राम मैनकोजेब या 2.0 ग्राम रिडोमिल एमजेड-72 प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। पहला छिड़काव 45 दिन की अवस्था में और दूसरा छिड़काव 55 से 60 दिन की अवस्था पर करना लाभकारी रहेगा।

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चना फसल में इल्ली पर रखें नजर

चना की फसल में आवश्यकतानुसार सिंचाई करने के साथ-साथ कीट प्रकोप पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। यदि खेत में 2 से 3 इल्ली प्रति वर्ग मीटर दिखाई दे, तो नियंत्रण के लिए T आकार की खूंटी 50 प्रति हेक्टेयर की दर से लगाएं, जिससे इल्ली की संख्या नियंत्रित की जा सके।

फलदार पौधों की देखभाल भी जरूरी

संभावित मौसम को देखते हुए आम, अमरूद, कटहल एवं नींबू जैसे फलदार पौधों के थालों की सफाई कर आवश्यकतानुसार सिंचाई करने की सलाह दी गई है। आम की फसल में रोगों से बचाव के लिए कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 2.5 किलोग्राम और क्लोरोइंट्रोक्नॉल 150 मिलीलीटर को 500 लीटर पानी में मिलाकर एक छिड़काव करने की अनुशंसा की गई है।

सभी फसलों में जीवामृत का उपयोग लाभकारी

कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि सभी फसलों में 5 से 10 प्रतिशत जीवामृत का छिड़काव किया जा सकता है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी और फसलों का विकास बेहतर होगा।

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