सिर्फ 0.12 हेक्टेयर में गेंदा की खेती से कमाए 1.39 लाख रुपये, इन्दिरा भादे बनीं महिला किसानों की मिसाल
15 जून 2026, भोपाल: सिर्फ 0.12 हेक्टेयर में गेंदा की खेती से कमाए 1.39 लाख रुपये, इन्दिरा भादे बनीं महिला किसानों की मिसाल – कृषक कल्याण वर्ष 2026 के तहत महिला सशक्तिकरण और उद्यानिकी खेती को बढ़ावा देने के प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव अब जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगा है। जिले के मोहखेड़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम चारगांव करबल की प्रगतिशील महिला कृषक श्रीमती इन्दिरा भादे ने सीमित कृषि भूमि में गेंदा फूल की खेती कर उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। उनकी यह उपलब्धि न केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता की मिसाल है, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिला किसानों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनकर उभरी है।
आधुनिक तकनीक और ड्रिप सिंचाई से मिली नई दिशा
श्रीमती इन्दिरा भादे के पास कुल 0.241 हेक्टेयर कृषि भूमि है, जिसमें वे उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में आधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए खेती करती हैं। उनके खेत में ड्रिप सिंचाई सुविधा उपलब्ध है, जिससे पानी की बचत के साथ फसलों की उत्पादकता में भी वृद्धि हुई है। उद्यानिकी फसलों के प्रति रुचि और नवाचार को अपनाने की सोच ने उन्हें पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर बेहतर आय अर्जित करने का अवसर प्रदान किया।
गेंदा की खेती से शुरू हुई सफलता की कहानी
जनवरी 2026 में उन्होंने अपने खेत के लगभग 0.120 हेक्टेयर क्षेत्र में गेंदा (सनसाईन यलो किस्म) की खेती की। पौधरोपण एवं अन्य कृषि कार्यों पर उन्हें लगभग 11 हजार रुपये की लागत आई। फसल प्रबंधन, सिंचाई और देखभाल के लिए उन्होंने वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाया, जिसके परिणामस्वरूप फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों बेहतर रहे।
40 क्विंटल उत्पादन, 1.50 लाख रुपये से अधिक की आय
मेहनत और उचित प्रबंधन का परिणाम यह रहा कि उन्हें लगभग 40 क्विंटल गेंदा फूल का उत्पादन प्राप्त हुआ। बाजार में गेंदा फूल की अच्छी मांग के चलते उन्हें 40 से 50 रुपये प्रति किलोग्राम तक का भाव मिला। इससे उन्हें 1.50 लाख रुपये से अधिक की सकल आय प्राप्त हुई। उत्पादन लागत निकालने के बाद श्रीमती भादे को 1.39 लाख रुपये से अधिक की शुद्ध आय अर्जित हुई, जो कम क्षेत्र में खेती करने वाले किसानों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है।
महिलाओं को दे रहीं आत्मनिर्भरता का संदेश
श्रीमती इन्दिरा भादे का कहना है कि उद्यानिकी फसलों की खेती कम भूमि में भी अधिक आय प्रदान करती है। उन्होंने बताया कि ड्रिप सिंचाई और समय पर फसल प्रबंधन से उत्पादन लागत नियंत्रित रहती है तथा गुणवत्तायुक्त उत्पादन मिलने से बाजार में अच्छे दाम प्राप्त होते हैं। उनकी इस सफलता ने गांव की अन्य महिलाओं को भी उद्यानिकी खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया है।
उद्यानिकी विभाग की योजनाओं का मिला लाभ
कृषक कल्याण वर्ष 2026 के दौरान महिला किसानों को आत्मनिर्भर एवं आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से उद्यानिकी विभाग द्वारा विभिन्न योजनाओं और तकनीकी मार्गदर्शन के माध्यम से सहयोग प्रदान किया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार ऐसी सफल कहानियां यह साबित करती हैं कि आधुनिक कृषि तकनीकों और उद्यानिकी फसलों को अपनाकर कम भूमि में भी बेहतर उत्पादन और अधिक आय प्राप्त की जा सकती है।
महिला सशक्तिकरण की बनीं प्रेरक मिसाल
आज श्रीमती इन्दिरा भादे न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना रही हैं, बल्कि अपने क्षेत्र की अन्य महिला किसानों के लिए भी प्रेरणादायी उदाहरण बन चुकी हैं। उनकी उपलब्धि महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और कृषक समृद्धि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो कृषक कल्याण वर्ष 2026 के उद्देश्यों को सार्थक रूप से प्रतिबिंबित करती है।
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