राज्य कृषि समाचार (State News)

एक ही खेत से डबल कमाई, किसान ने सिंघाड़े के साथ शुरू किया मछली पालन; दोगुना हुआ मुनाफा  

26 अगस्त 2026, भोपाल: एक ही खेत से डबल कमाई, किसान ने सिंघाड़े के साथ शुरू किया मछली पालन; दोगुना हुआ मुनाफा – खरीफ मौसम में जहां अधिकांश किसान धान की खेती करते हैं, वहीं जबलपुर जिले के विकासखंड शहपुरा के ग्राम भीटा के किसान हल्कू बर्मन ने अपने खेत की परिस्थितियों के अनुसार खेती में नवाचार किया। उन्होंने धान की जगह सिंघाड़े की खेती के साथ मछली पालन शुरू किया। इससे उन्हें एक ही रकबे से दो अलग-अलग स्रोतों से आय मिलने लगी और छोटे रकबे का बेहतर उपयोग हो सका।

हल्कू बर्मन के पास करीब तीन एकड़ सिकमी की जमीन है। इसमें से 0.25 एकड़ हिस्से में हार्वेस्टर के पहुंचने के लिए पर्याप्त जगह नहीं थी। ऐसे में धान की कटाई के लिए मजदूरों पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे समय और लागत दोनों बढ़ते थे। कृषि अधिकारियों की समझाइश के बाद उन्होंने कुछ वर्ष पहले इस हिस्से में धान के विकल्प के रूप में सिंघाड़े की खेती के साथ मछली पालन शुरू किया।

सिंघाड़े से 30-40 हजार, मछली पालन से 25-30 हजार की अतिरिक्त आय

किसान हल्कू बर्मन के अनुसार सिंघाड़े और मछली दोनों का उत्पादन संतोषजनक है। उन्हें सिंघाड़े से 30 से 40 हजार रुपये और मछली पालन से 25 से 30 हजार रुपये तक अतिरिक्त आय प्राप्त होती है। उनका कहना है कि यह पद्धति पारंपरिक धान की खेती की तुलना में अधिक लाभकारी साबित हो रही है। एक ही जलक्षेत्र में सिंघाड़े के पौधों के साथ उपयुक्त प्रजातियों की मछलियों का पालन किया जा सकता है। इससे उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग होता है और किसान को एक ही खेत से दो स्रोतों से आय मिलती है।

रबी और गर्मी में भी करते हैं अलग-अलग फसलों की खेती

हल्कू बर्मन शेष रकबे में रबी के मौसम में मटर और सब्जियों की खेती करते हैं, जबकि गर्मियों में उड़द उगाते हैं। इससे खर्च काटकर उन्हें सालाना करीब चार लाख रुपये तक की आय प्राप्त होती है। इसके साथ ही वे पशुपालन भी करते हैं। पशुपालन से मिलने वाले गोबर और गौमूत्र जैसे बाय-प्रोडक्ट का उपयोग खेती में खाद के रूप में करते हैं। इससे मुख्य उत्पादन के साथ इन उप-उत्पादों का भी लाभ मिलता है और खेती एकीकृत कृषि प्रणाली से जुड़ती है।

कृषि अधिकारियों ने किया खेत का निरीक्षण

हल्कू बर्मन के इस नवाचार का अनुविभागीय कृषि अधिकारी पाटन डॉ. इंदिरा त्रिपाठी ने वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी शहपुरा एस.के. परतेती के साथ अवलोकन किया। डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि ऐसे छोटे और मध्यम किसान, जिनके खेत के कुछ हिस्सों में मशीनों की पहुंच सीमित है या जहां लंबे समय तक पानी उपलब्ध रहता है, वे स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार मछली पालन और सिंघाड़े की खेती कर सकते हैं।

अवलोकन के दौरान ग्राम भीटा के गोलू तिवारी, ग्राम फुलर के महेंद्र पाल और ग्राम भीटा के पुरनसिंह सहित अन्य किसान भी मौजूद रहे I

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