राज्य कृषि समाचार (State News)

सीधी बुवाई तकनीक से अनूपपुर के फत्तेलाल की आय में हुआ इजाफा

02 मार्च 2026, अनूपपुरसीधी बुवाई तकनीक से अनूपपुर के फत्तेलाल की आय में हुआ इजाफा – राज्य शासन द्वारा घोषित ‘कृषक कल्याण वर्ष 2026’ के अंतर्गत कृषकों की आय वृद्धि एवं आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रोत्साहन हेतु किए जा रहे प्रयास अब सकारात्मक परिणाम देने लगे हैं। अनूपपुर जिले के विकासखण्ड कोतमा के ग्राम रेउसा निवासी प्रगतिशील कृषक श्री फत्तेलाल जायसवाल द्वारा धान उत्पादन में पारंपरिक रोपाई पद्धति के स्थान पर सीधी बुवाई तकनीक (DSR) अपनाकर उल्लेखनीय सफलता अर्जित की गई है।

लागत में कमी एवं उत्पादन में वृद्धि –  जिला प्रशासन के मार्गदर्शन एवं कृषि विभाग के तकनीकी सहयोग से, कलेक्टर श्री हर्षल पंचोली के निर्देशन में कृषक द्वारा सीड ड्रिल मशीन के माध्यम से धान की सीधी बुवाई की गई। पूर्व में पारंपरिक रोपाई पद्धति में प्रति हेक्टेयर लगभग 12,500 रुपये की लागत व्यय होती थी, जो सीधी बुवाई तकनीक अपनाने से घटकर लगभग 1,200 रुपये रह गई। इस प्रकार केवल मजदूरी मद में ही प्रति हेक्टेयर लगभग 10,000 रुपये की बचत सुनिश्चित हुई। तकनीक के वैज्ञानिक उपयोग से फसल की गुणवत्ता में सुधार हुआ तथा प्रति हेक्टेयर लगभग 5 क्विंटल अतिरिक्त उत्पादन प्राप्त हुआ। कम लागत एवं अधिक उत्पादन के परिणामस्वरूप प्रति हेक्टेयर लगभग 20,000 रुपये की अतिरिक्त शुद्ध आय अर्जित हुई है।

जल संरक्षण एवं सतत कृषि के लिए उपयोगी – सीधी बुवाई तकनीक जल संरक्षण की दृष्टि से भी अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो रही है। इस पद्धति में पौधों के मध्य समुचित दूरी बनाए रखने से उर्वरकों का संतुलित एवं नियंत्रित उपयोग संभव हो पाता है, जिससे मृदा स्वास्थ्य संरक्षण में भी सहायता मिलती है। इस तकनीक का एक प्रमुख लाभ समय प्रबंधन है। धान की फसल समय पर तैयार होने से कृषक रबी मौसम में गेहूं की बुवाई निर्धारित समय अनुसार कर पा रहे हैं। इससे वार्षिक फसल चक्र में संतुलन स्थापित हुआ है तथा समग्र आय में वृद्धि की संभावनाएँ सुदृढ़ हुई हैं।

शासन की योजनाओं से सशक्त होता कृषक – कृषक श्री फत्तेलाल जायसवाल ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय केंद्र एवं राज्य शासन की किसान हितैषी योजनाओं तथा जिला प्रशासन द्वारा प्रदान किए जा रहे सतत मार्गदर्शन एवं तकनीकी सहयोग को दिया है। यह उदाहरण ‘कृषक कल्याण वर्ष 2026’ के उद्देश्यों की सार्थकता को दर्शाता है तथा अन्य कृषकों के लिए प्रेरणास्रोत सिद्ध हो रहा है।

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