राज्य कृषि समाचार (State News)

छिंदवाड़ा जिले के किसान धारे ने प्राकृतिक खेती से बढ़ाई आय

27 फरवरी 2026, छिन्दवाड़ाछिंदवाड़ा जिले के किसान धारे ने प्राकृतिक खेती से बढ़ाई आय – मध्यप्रदेश शासन द्वारा वर्ष 2026 को “किसान कल्याण वर्ष – सशक्त किसान, समृद्ध प्रदेश” के रूप में मनाते हुए किसानों की आय वृद्धि, लागत में कमी तथा प्राकृतिक कृषि को प्रोत्साहित करने की दिशा में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। प्रदेश सरकार का उद्देश्य है कि प्रत्येक किसान टिकाऊ खेती पद्धतियों को अपनाकर आत्मनिर्भर एवं समृद्ध बने। इसी संकल्प को साकार करते हुए जिले के विकासखंड मोहखेड़ के ग्राम तंसरामाल के कृषक श्री राजेन्द्र धारे ने प्राकृतिक खेती अपनाकर आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। श्री धारे जैसे कृषकों के प्रयास, शासन की योजनाओं का लाभ लेकर किसान कल्याण की भावना को जमीनी स्तर पर साकार कर रहे हैं।

पूर्व की स्थिति– कृषक श्री धारे पूर्व में रासायनिक पद्धति से खेती करते थे। मिर्च एवं बैंगन जैसी फसलों में बीज, उर्वरक और कीटनाशकों पर लगभग 80 हजार से 1 लाख रुपये प्रति एकड़ तक की लागत आती थी। लगातार बढ़ती लागत और भूमि की घटती उर्वरता ने कृषि विभाग की सलाह पर उन्हें वैकल्पिक पद्धति अपनाने के लिए प्रेरित किया। प्राकृतिक खेती के प्रति रुचि के चलते उन्होंने इसे व्यवहार में लाने का निर्णय लिया।

“जब लागत बढ़ी और धरती हुई बीमार,
तब बदला इरादा, चुना प्रकृति का प्यार।

नई तकनीक और नवाचार– उन्होंने एक एकड़ क्षेत्र में प्राकृतिक पद्धति से मिर्च की खेती प्रारंभ की तथा इंटरक्रॉपिंग के रूप में चना लगाया। पॉली मल्चिंग के स्थान पर स्ट्रॉ मल्चिंग अपनाकर हजारों रुपये की बचत की। आत्मा परियोजना के माध्यम से जीवामृत, घन जीवामृत, नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र एवं अग्नि अस्त्र का निर्माण स्वयं कर समय-समय पर फसलों में उपयोग किया तथा रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों का पूर्णतः त्याग किया।

“मेहनत की खुशबू से महकी हर एक क्यारी,
जैविक उपायों से बदली खेती की फुलवारी।

वर्तमान स्थिति एवं परिवर्तन – प्राकृतिक खेती के माध्यम से 01 एकड़ मिर्च से लगभग 01 लाख रुपये की आय प्राप्त हुई, जबकि लागत मात्र लगभग 20 हजार रुपये रही। इंटरक्रॉपिंग में लगाए गए चने से लगभग 22 हजार रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित हुई। मिर्च की फसल के पश्चात उसी रकबे में बैंगन की फसल लेकर लगभग 80 हजार रुपये की आय प्राप्त की गई, जिसमें लगभग 15 हजार रुपये की लागत आई। प्रथम वर्ष में ही मिट्टी की उर्वरता में सुधार स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। आगामी वर्षों में उत्पादन में भी स्पष्ट रूप से बढ़ोत्तरी होगी।

लाभ और उपलब्धियां– प्राकृतिक खेती अपनाने से किसान श्री धारे की लागत में उल्लेखनीय कमी आई तथा कुल आय में वृद्धि हुई। एक ही एकड़ भूमि से वर्ष में लगभग 2 लाख रुपये से अधिक की आय प्राप्त कर उन्होंने यह सिद्ध किया है कि प्राकृतिक संसाधनों के समुचित उपयोग से खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है।        

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