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राज्य कृषि समाचार (State News)

दतिया: प्राकृतिक खेती कार्यशाला सह कृषक संगोष्ठी आयोजित

23 जून 2026, दतिया: दतिया: प्राकृतिक खेती कार्यशाला सह कृषक संगोष्ठी आयोजित – विशेष अभियान अंतर्गत रविवार को ग्राम-पचोखरा में प्राकृतिक खेती कार्यशाला सह कृषक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान विधायक सेवढ़ा श्री प्रदीप अग्रवाल, श्री महेन्द्र सिंह यादव, श्री मुकेश शर्मा, श्री देवेश चौधरी, श्री सुजान सिंह रावत, श्रीमती हरकिशुन कुशवाहा सरपंच प्रतिनिधि ग्राम पचोखरा उपस्थित रही।

विधायक श्री प्रदीप अग्रवाल विधायक द्वारा उपस्थित कृषकों को म०प्र० शासन की मंशा अनुसार जैविक एवं प्राकृतिक खेती अपनाने की सलाह दी गई एवं जैव आदानों के निर्माण तथा कृषि में रासायनिकों के न्यूनतम उपयोग के संबंध में जागरूक किया। उन्होंने पर्यावरण एवं मानव स्वास्थ्य में हो रही गंभीर बीमारियों एवं मृदा स्वास्थ्य सुधार की सलाह दी ।

 श्री दिनेश कुमार जाटव, उप संचालक कृषि विकास  एवं जी.एस. गौरख, परियोजना संचालक आत्मा दतिया द्वारा  कार्यशाला में उपस्थित कृषकों को प्राकृतिक खेती के प्रोत्साहन एवं विस्तार हेतु योजना की जानकारी प्रदाय करते  हुए  प्राकृतिक खेती का महत्व एवं आवश्यकता तथा रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों को विस्तार से समझाया गया। जिले में प्राकृतिक को अपनाये जाने हेतु अनुभवी प्राकृतिक खेती कृषकों के माध्यम से भी अन्य कृषकों को जैविक उत्पाद बनाने एवं उपयोग करने की विधि समझाई गई। जिले के प्राकृतिक खेती कर रहे कृषक श्री भोगीराम कुशवाहा ग्राम पचोखरा द्वारा भी प्राकृतिक खेती करने हेतु जीवामृत, घनजीवामृत, जीवामृत एवं जैविक कीटनाशक ब्रह्मास्त्र, नीमास्त्र, अग्निअस्त्र बनाये जाने को समक्ष में प्रदर्शित करते  हुए  फसलों में उपयोग को समझाया गया ।

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डॉ. व्ही.एस. कसाना द्वारा रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों की प्रयोग से होने वाले नुकसान के संबंध में जानकारी दी गई एवं संतुलित उर्वरक उपयोग के साथ-साथ प्राकृतिक खेती के विकल्पों की सलाह दी गई। किसानों को कम लागत में अधिक लाभ दिलाने तथा उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्राकृतिक एवं जैविक खेती को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है एवं गोबर एवं गोमूत्र से तैयार ब्रह्मास्त्र, जीवामृत सहित विभिन्न प्रकार की प्राकृतिक खाद एवं जैविक कीटनाशक दवाओं को कार्यशाला में दिखाया गया एवं उनकी उपयोगिता को समझाया गया। रासायनिक खेती का सशक्त विकल्प प्राकृतिक खेती ही बन सकती है कम लागत, बेहतर गुणवत्ता व दीर्घकालीन लाभ प्राकृतिक एवं जैविक खेती से ही संभव है।

प्राकृतिक खेती में किसी प्रकार का अतिरिक्त खर्च नहीं आता क्योंकि आवश्यक सभी संसाधन गाय, गोबर और गौ मूत्र घर पर ही उपलब्ध रहते हैं। इन्ही से खाद एवं कीट नियंत्रण की दवाईयां तैयार कर ली जाती हैं। कृषि वैज्ञानिक एवं उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने प्राकृतिक खेती के विस्तार हेतु बताया कि जैविक खाद/प्राकृतिक खेती ही  किसानों  की आय में अतिरिक्त वृद्धि का माध्यम बन सकती है जिससे मिट्टी की उर्वरक शक्ति कायम रहती है एवं उत्पादन टिकाऊ बना रहता है एवं मानव/पशु स्वास्थ्य को होने वाली गंभीर बीमारियों से निजात मिलती ।

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