उज्जैन के चिंतामन गणेश सुखी वैवाहिक जीवन का मार्ग प्रशस्त करते हैं

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11 सितंबर 2020, उज्जैन। उज्जैन के चिंतामन गणेश सुखी वैवाहिक जीवन का मार्ग प्रशस्त करते हैं कहते हैं जोड़ियां स्वर्ग में बना करती है। लेकिन धरती पर जोड़ी बनाने का काम कुंडली मिलाने वाले पंडित लोग करते हैं। कुंडली में मंगल दोष है, शनि है या फिर गुण मिलान नहीं हो रहा है। नाड़ी दोष है, भृकूट दोष है, खड़ा अष्टक है, वर्ग बेर है आदि। बहुत सारे गुण दोष का मिलान कर अंततोगत्वा कुंडली मिलती है। कुंडली मिलने के बाद में भी यदि लड़के लड़की या लड़की के माता-पिता के बीच में व्यवहारिक मिलन नहीं होता तो विवाह टल जाता है। आज आधुनिक समय में भी कई पढ़ी लिखी लड़की और युवक अच्छे पदों और व्यवसाय में होने के बावजूद 32, 34, 35 साल के बाद भी विवाह नहीं होने के कारण परेशान है। वे ही परेशान नहीं है उनके माता-पिता भी मिलान कर कर के थक जाते है।

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यदि इन सब चीजों से मुक्ति चाहिए और लड़के लड़की मन मिल गया है या फिर माता-पिता ने तय कर लिया है कि दोनों का विवाह करना ही है तो उज्जैन मध्यप्रदेश के चिंतामन गणेश मंदिर आइए।यहां गणेश जी की आज्ञा से बिना कुंडली मिलाए पाती के लगन लिखे जाते है। विवाह की ढेर सारी तिथियों में से कोई एक जो आप अनुकूल लगती उस दिन के लग्न लिखवा लीजिए। इच्छित तिथि पर विवाह की रस्मे वैदिक रीति से पूरा करिए। फिर चिंतामन गणेश मंदिर आकर के खुशी खुशी गणेश जी का आशीर्वाद लीजिए और अपनी वैवाहिक जीवन यात्रा प्रारम्भ करिए।

चिंतामन गणेश मंदिर की खासियत है कि यहां पर विघ्नहर्ता गणेश हर तरह के विघ्नों को हर लेते हैं। मंदिर परिसर में निवास करने वाला पंडित परिवार बरसो से पाती के लगन लिखकर विवाह तय कर रहे हैं। उज्जैन एक धार्मिक शहर है यहां पर अनेकों देवी देवताओं के मंदिर हैं जो जग प्रसिद्ध है। किंतु सर्वाधिक प्रसिद्ध है देवाधिदेव महाकाल। श्री महाकालेश्वर मंदिर आने वाले हजारों धार्मिक पर्यटक भगवान महाकालेश्वर, कालभैरव, सिद्धवट, भर्तृहरि की गुफाएं, मंगलनाथ, महर्षि सांदीपनी का आश्रम जहां पर भगवान कृष्ण एवं बलराम ने शिक्षा प्राप्त की थी के दर्शन लाभ लेकर कृतार्थ होते हैं।

तीर्थ नगरी उज्जयिनी में आने वाले धार्मिक पर्यटक यह बात नहीं जानते हैं कि चिंतामन गणेश मंदिर में पाती के लगन लिखने का काम भी बरसों से हो रहा है। लग्न लिखने वाले पुजारी परिवार के 61 वर्षीय सदस्य श्री कैलाश चंद शर्मा बताते हैं कि प्रथम परिणय पाती भगवान कृष्ण के रुक्मणी विवाह के समय रुकमणी द्वारा लिखी गई थी। रुक्मणी का विवाह शिशुपाल से तय हो गया था किंतु उन्होंने पाती लिखकर कृष्ण भगवान को विवाह के लिए आमंत्रित किया था। उस समय कोई कुंडली मिलान नही किया गया, पाती की वही परंपरा आज भी जारी है।

पंडित श्री कैलाश चंद्र बताते हैं कि भगवान चिंतामन गणेश चिंता हरण है। यहां पर आकर वर एवं वधू पक्ष के लोग पूर्व से तय संबंध की अंतिम परिणति के रूप में विवाह के लिए लगन लिखवाते हैं।जिन्हें पाती के लग्न कहा जाता है। यह गणपति आस्था ही है कि जितने भी विवाह पाती से होते हैं लगभग सभी सफल होते हैं। कोई भी व्यक्ति लौटकर नहीं आता है कि उनका पारिवारिक विवाद चल रहा है या तलाक का वाद चल रहा है। जबकि कुंडली मिलान और अन्य प्रक्रिया से होने वाले विवाहों में कई बार अस्थिरता पाई जाती है।

पंडित कैलाश शर्मा बताते हैं कि शास्त्रो के अनुसार जब कन्या वयस्क हो जाए तो उसके विवाह के लिए किसी भी तरह के मिलान करने की आवश्यकता नहीं होती है। उनका कहना है कि यही नहीं जब देव सो जाते हैं तो भी लोग चिंतामन गणेश मंदिर में आकर विवाह करते हैं, किसी तरह की कोई बाधा उत्पन्न नहीं होती है। पंडितजी बताते हैं कि वे वर्ष में विवाह के लिए 500 से 700 पाती के लग्न लिखते है।

देखा गया है कि पाती के लगन लिखवाने आने वाले लोगों में मालवा अंचल के ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले बड़ी संख्या में होते है। यह लोग ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं होते हैं, ना ही उच्च कुलीन वर्ग के होते हैं। आस्था के वशीभूत गणेश जी की शरण में आ जाते हैं। पहले से तय हो जाता है कि किसकी लड़की का किसके लड़के का विवाह होगा। पंडित जी को सीधी-सादे शब्दों में बता देते हैं हमें फला फला दिन का मुहूर्त चाहिए तो पंडित जी आसपास की गले उतरती तारीख निश्चित करके उनको दे देते हैं।यह परंपरा वर्षो से चली आ रही है और अद्भुत गणेश जी के प्रति आस्था ही है कि यहां से लिखवाए पाती के लगन से लोगो के वैवाहिक जीवन की बाती हमेशा जलती रहती है।

उज्जैन कैसे पँहुचे – रेलमार्ग से पश्चिमी रेलवे से, निकटतम हवाई अड्डा इंदौर। सड़क मार्ग पूरे भारत से जुड़ा है।
कहां ठहरे – मध्यप्रदेश टूरिज्म की होटल्स के अलावा कई अच्छे होटल्स और गेस्ट हाउसेस उपलध है।
कब आये – पूरे वर्ष।

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