राज्य कृषि समाचार (State News)सरकारी योजनाएं (Government Schemes)

मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना ने बदली महिला की किस्मत, अब हर महीने 40 हजार रुपये की शुद्ध कमाई

07 जुलाई 2026, भोपाल: मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना ने बदली महिला की किस्मत, अब हर महीने 40 हजार रुपये की शुद्ध कमाई – मध्यप्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना झाबुआ जिले की एक महिला के लिए आर्थिक बदलाव का माध्यम बन गई है। जिले के ग्राम सजेली नरसिंहपुरा निवासी अनुसूचित जनजाति वर्ग की हितग्राही सुशीला रूपसिंह बारिया ने इस योजना का लाभ लेकर न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत की है, बल्कि गांव के अन्य पशुपालकों के लिए भी प्रेरणा बन गई हैं।

योजना के तहत सुशीला बारिया को दो उच्च गुणवत्ता वाली मुर्रा नस्ल की भैंसों की एक यूनिट उपलब्ध कराई गई। इसकी कुल लागत 2.64 लाख रुपये थी, जिसमें सरकार ने 75 प्रतिशत अनुदान दिया। हितग्राही को केवल 73 हजार रुपये का बैंक ड्राफ्ट जमा करना पड़ा, जबकि शेष राशि का वहन शासन ने किया।

हरियाणा से खुद चुनीं मुर्रा भैंसें

योजना की खास बात यह रही कि शासन के खर्च पर सुशीला बारिया को हरियाणा के फतेहाबाद जिले ले जाया गया, जो मुर्रा नस्ल की भैंसों का प्रमुख प्रजनन क्षेत्र माना जाता है। वहां उन्होंने स्वयं अपनी पसंद से दो उच्च गुणवत्ता वाली मुर्रा भैंसों का चयन किया। इसके बाद शासन ने दोनों भैंसों को सुरक्षित उनके गांव तक पहुंचाने की व्यवस्था भी कराई।

दूध बिक्री से हर महीने 30 हजार रुपये से अधिक की आय

वर्तमान में दोनों मुर्रा भैंसों से प्रतिदिन करीब 17 से 18 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। यह दूध गांव के सांची दुग्ध संघ के संग्रहण केंद्र पर बेचा जाता है, जिससे उन्हें प्रतिदिन लगभग 1,080 रुपये और हर महीने करीब 30,240 रुपये की आय हो रही है।

अब गिर नस्ल की गायों से भी बढ़ी कमाई

मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना से मिली सफलता के बाद सुशीला बारिया ने अपने व्यवसाय का विस्तार किया। उन्होंने गुजरात के जूनागढ़ से दो गिर नस्ल की गायें खरीदीं। इन गायों से प्रतिदिन 20 से 25 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है, जिससे उन्हें प्रतिदिन 1,000 से 1,200 रुपये और हर महीने करीब 30 हजार रुपये की अतिरिक्त आय मिल रही है।

हर महीने 40 हजार रुपये की शुद्ध आय

पशु आहार, हरे चारे, मिनरल मिक्सचर और अन्य रखरखाव पर हर महीने करीब 20 हजार रुपये खर्च होने के बावजूद सुशीला बारिया को लगभग 40 हजार रुपये की शुद्ध आय हो रही है। इस नियमित आय से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और भविष्य के लिए आर्थिक सुरक्षा भी मिली है।

जैविक खेती को भी मिल रहा बढ़ावा

सुशीला बारिया ने पशुपालन को सिर्फ आय का साधन नहीं बनाया, बल्कि इसे टिकाऊ आजीविका मॉडल के रूप में विकसित किया है। वह पशुओं से मिलने वाले गोबर और अन्य जैविक अपशिष्ट से जैविक खाद और वर्मी कम्पोस्ट तैयार कर रही हैं। इससे खेती में रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम हुई है और फसलों की उत्पादकता में भी सुधार देखने को मिला है।

गांव के अन्य पशुपालकों के लिए बनीं प्रेरणा

सुशीला बारिया की सफलता से प्रेरित होकर गांव के अन्य पशुपालक भी उन्नत नस्ल के पशुओं का पालन और व्यावसायिक दुग्ध उत्पादन अपनाने लगे हैं। इसका असर गांव के सांची दुग्ध संघ के संग्रहण केंद्र पर भी दिखाई दे रहा है, जहां दूध की आवक में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।

अपनी सफलता पर खुशी जताते हुए सुशीला बारिया ने कहा कि मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति पूरी तरह बदल दी है। आज वह आत्मनिर्भर हैं, नियमित आय अर्जित कर रही हैं और अपने परिवार का बेहतर पालन-पोषण कर पा रही हैं। उन्होंने इस अवसर के लिए मुख्यमंत्री और मध्यप्रदेश सरकार का आभार भी व्यक्त किया।

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