छिंदवाड़ा: रघुवंशी ने बकरी पालन को बनाया लाभकारी व्यवसाय
07 फरवरी 2026, छिंदवाड़ा: छिंदवाड़ा: रघुवंशी ने बकरी पालन को बनाया लाभकारी व्यवसाय – ग्रामीण अर्थव्यवस्था का उत्थान, शासन की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए शासन द्वारा कृषि और पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिससे कृषि और पशुपालन अब न केवल लाभ का व्यवसाय बन गया है, बल्कि इससे किसानों और पशुपालकों को क्षेत्र में नई पहचान भी मिल रही है। छिंदवाड़ा जिले के चौरई विकासखंड के ग्राम बांकानागनपुर के श्री नवीन रघुवंशी भी उन्हीं किसानों और पशुपालकों में से एक हैं।
श्री रघुवंशी ने पशुपालन विभाग की राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एनएलएम) योजना का लाभ लेकर बकरी पालन को एक सशक्त और लाभकारी व्यवसाय के रूप में स्थापित किया है। सीमित संसाधनों से शुरू हुई उनकी यह पहल आज आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक प्रबंधन के कारण क्षेत्र में एक मॉडल बकरी फार्म के रूप में पहचान बना चुकी है।
मॉडल फार्म की आधुनिक संरचना– श्री रघुवंशी बताते हैं कि एनएलएम योजना के अंतर्गत स्वीकृत उनके इस बकरी फार्म में सिरोही नस्ल की कुल 175 बकरियाँ, बकरे एवं उनके बच्चे उपलब्ध हैं। फार्म को मॉडल स्वरूप में विकसित किया गया है, जिसमें बीमार बकरियों के लिए पृथक क्वारंटाइन शेड, बच्चों के लिए अलग कमरे तथा बकरियों के बैठने के लिए 4 फीट ऊँचाई पर प्लाई प्लेटफॉर्म बनाया गया है। इसी प्लेटफॉर्म के नीचे कड़कनाथ मुर्गी का पालन भी किया जा रहा है, जिससे अतिरिक्त आय का स्रोत विकसित हुआ है।
एक करोड़ की लागत, आधा अनुदान सरकार से– श्री रघुवंशी ने बताया कि बकरी फार्म की कुल लागत लगभग 1 करोड़ रुपये है, जिसमें भारत सरकार द्वारा 50 लाख रुपये की अनुदान राशि स्वीकृत की गई है। योजना के अंतर्गत प्रथम किस्त के रूप में 25 लाख रुपये की राशि श्री नवीन रघुवंशी को प्रदान की जा चुकी है। इस आर्थिक सहयोग से फार्म को आधुनिक संसाधनों से सुसज्जित किया गया है।
पोषण, ब्रीडिंग और तकनीक पर विशेष ध्यान– बकरियों के पोषण के लिए फार्म में तीन प्रकार की नेपियर घास का उत्पादन किया जा रहा है। दाना बनाने की मशीन एवं चैफ कटर जैसी सुविधाएँ भी उपलब्ध हैं। ब्रीडिंग के उद्देश्य से उच्च गुणवत्ता के बकरे रखे गए हैं, जिनमें एक बकरे की कीमत लगभग 2 लाख रुपये है। बेहतर पोषण और प्रबंधन के कारण बकरियों का स्वास्थ्य एवं उत्पादन स्तर उत्कृष्ट बना हुआ है।
बकरी पालन के साथ प्राकृतिक खेती– फार्म में बकरी पालन के साथ-साथ प्राकृतिक खेती भी की जा रही है। इससे न केवल लागत में कमी आई है, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल खेती को भी बढ़ावा मिला है। प्राकृतिक खेती के इस मॉडल का अवलोकन कृषि विभाग द्वारा भी किया गया है।
डिजिटल माध्यम से देश-विदेश तक पहचान– श्री नवीन रघुवंशी के पुत्र श्री मंथन रघुवंशी द्वारा बकरी पालन एवं उन्नत कृषि को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नई पहचान दी जा रही है। वे यूट्यूब एवं इंस्टाग्राम के माध्यम से बकरी पालन, उन्नत कृषि, मक्का उत्पादन तथा कम उम्र में पशुओं का वजन बढ़ाने जैसे विषयों पर शैक्षणिक वीडियो साझा कर रहे हैं। उनके इंस्टाग्राम पर लगभग 4 लाख 14 हजार तथा यूट्यूब पर 80 हजार से अधिक फॉलोअर्स हैं।
राष्ट्रीय सम्मान से बढ़ा जिले का गौरव- श्री मंथन रघुवंशी को उनके प्रभावी डिजिटल योगदान के लिए कृषि जागरण की ओर से “एग्री इंफ्लूएंसर ऑफ द ईयर 2026 (Agri Influencer of the Year 2026)” पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह उपलब्धि छिंदवाड़ा जिले के लिए गौरव का विषय है और युवाओं को कृषि एवं पशुपालन से जोड़ने की प्रेरणा देती है।
बीते दिन उप संचालक पशुपालन एवं डेयरी विभाग डॉ.एच.जी.एस. पक्षवार, एपीसी ग्रुप एवं एसडीएम चौरई श्री प्रभात मिश्रा के साथ संयुक्त रूप से एनएलएम योजना के अंतर्गत संचालित इस बकरी फार्म के संचालन की व्यवस्थाएं देखने पहुंचे थे। निरीक्षण दल में उप संचालक कृषि एवं किसान कल्याण विभाग श्री जितेन्द्र कुमार सिंह, उप संचालक उद्यानिकी विभाग श्री एम.एल. उइके, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. झाड़े, डॉ. अलवा तथा कृषि विज्ञान केंद्र देलाखारी के प्रमुख डॉ. आर.एल. राउत उपस्थित थे। निरीक्षण के दौरान इन सभी अधिकारियों ने भी फार्म के उत्कृष्ट संचालन, वैज्ञानिक प्रबंधन एवं नवाचार की सराहना की।
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