राज्य कृषि समाचार (State News)

छिंदवाड़ा के किसान शरद: पारंपरिक खेती छोड़कर बने ‘आधुनिक कृषि आइकन

02 दिसंबर 2024, भोपाल: छिंदवाड़ा के किसान शरद: पारंपरिक खेती छोड़कर बने ‘आधुनिक कृषि आइकन – परंपरागत खेती का दौर अब बीत चुका है। नए समय की मांग है कि किसान उन्नत तकनीकों को अपनाकर खेती को लाभ का व्यवसाय बनाएं। इसी बदलाव का जीता-जागता उदाहरण हैं छिंदवाड़ा जिले के झामटा गांव के किसान शरद नागरे। कभी सीमित संसाधनों और पारंपरिक खेती में संघर्षरत शरद ने आज आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर न केवल अपनी जिंदगी बदली, बल्कि पूरे गांव के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं।

शरद नागरे, छिंदवाड़ा जिले के बिछुआ ब्लॉक के झामटा गांव के निवासी हैं। शुरुआती दिनों में वे पारंपरिक खेती करते थे, जिसमें पुराने औजार और पारंपरिक बीजों का इस्तेमाल होता था। यह खेती उनके परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए भी पर्याप्त नहीं थी। सीमित आय और संसाधनों में जीवनयापन मुश्किल हो रहा था।

बदलाव की शुरुआत

शरद की किस्मत ने तब करवट ली जब उद्यानिकी विभाग ने उन्हें उन्नत खेती के फायदे और नई तकनीकों की जानकारी दी। विभाग की पहल पर शरद ने टमाटर, बैंगन, लहसुन, खीरा और लौकी जैसी फसलों की खेती शुरू करने का फैसला किया।

शुरुआत में, उन्हें नई तकनीकों को अपनाने में दिक्कतें आईं। ड्रिप इरिगेशन, मल्चिंग, और आधुनिक कृषि उपकरण उनके लिए बिल्कुल नए थे। लेकिन शरद ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने प्रशिक्षण लिया और धीरे-धीरे अपनी खेती को आधुनिकता की दिशा में मोड़ा। उद्यानिकी विभाग ने मल्चिंग के लिए उन्हें 16,000 रुपये का अनुदान दिया, जो उनके लिए बड़ा सहारा साबित हुआ।

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मेहनत रंग लाईआय में वृद्धि

शरद ने अपने चार हेक्टेयर खेत में उद्यानिकी फसलों की खेती शुरू की। उन्नत बीज और नई सिंचाई तकनीकों के उपयोग से उनकी फसल की गुणवत्ता और पैदावार में सुधार हुआ। उनके उत्पाद बाजार में बेहतर कीमत पर बिकने लगे।
आज शरद की सालाना आय 10 लाख रुपये से बढ़कर 15 लाख रुपये हो गई है। इस आय से उन्होंने अपने बच्चों की उच्च शिक्षा सुनिश्चित की, पक्का मकान बनाया और आधुनिक कृषि उपकरण खरीदे।

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शरद नागरे अब न केवल अपने परिवार के लिए एक सफल किसान हैं, बल्कि गांव के अन्य किसानों के लिए भी मार्गदर्शक बन गए हैं। उनकी प्रेरणा से झामटा गांव के कई किसानों ने पारंपरिक खेती छोड़कर आधुनिक खेती को अपनाना शुरू कर दिया है। इससे न केवल उनकी आय में वृद्धि हुई है, बल्कि गांव का जीवन स्तर भी सुधर रहा है।

कृषि में नवाचार का संदेश

शरद नागरे की कहानी यह साबित करती है कि सही मार्गदर्शन और नई तकनीकों का उपयोग किसी भी किसान की जिंदगी बदल सकता है। उनके अनुभव यह संदेश देते हैं कि मेहनत और नई सोच के साथ खेती न केवल लाभकारी हो सकती है, बल्कि समृद्धि का मार्ग भी प्रशस्त कर सकती है।

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