राज्य कृषि समाचार (State News)

छिंदवाड़ा के किसान ने यूट्यूब से सीखी प्राकृतिक खेती, अब स्वीट कॉर्न से कमा रहे लाखों; 2 एकड़ में ₹2.10 लाख का शुद्ध लाभ  

05 सितंबर 2026, छिंदवाड़ा: छिंदवाड़ा के किसान ने यूट्यूब से सीखी प्राकृतिक खेती, अब स्वीट कॉर्न से कमा रहे लाखों; 2 एकड़ में ₹2.10 लाख का शुद्ध लाभ – मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के विकासखंड छिंदवाड़ा के ग्राम कुहिया के कृषक शिवचरण कुशवाहा ने रासायनिक खेती से प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ाकर स्वीट कॉर्न को आय का प्रमुख स्रोत बनाया है। वे प्राकृतिक तरीके से स्वीट कॉर्न का उत्पादन कर रहे हैं और स्थानीय स्तर पर इसकी बिक्री से अच्छी आय प्राप्त कर रहे हैं। वर्तमान में उन्होंने 2 एकड़ क्षेत्र में मुख्य रूप से स्वीट कॉर्न की खेती की है, जिससे अब तक ₹2.10 लाख का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ है।

यूट्यूब से मिली प्राकृतिक खेती अपनाने की प्रेरणा

कृषक शिवचरण कुशवाहा के पास कुल 4 एकड़ कृषि भूमि और 2 देशी गाय हैं। कुछ वर्ष पहले वे अपने पूरे खेत में रासायनिक खेती करते थे। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के लगातार उपयोग से खेती की लागत बढ़ रही थी और उन्हें खेत की मृदा उर्वरता में भी कमी महसूस होने लगी थी। वर्ष 2018 में उन्होंने यूट्यूब के माध्यम से सुभाष पालेकर के प्राकृतिक एवं जैविक खेती से संबंधित वीडियो देखे। इससे प्रेरित होकर उन्होंने धीरे-धीरे अपने खेत में प्राकृतिक खेती अपनाना शुरू किया। उनका उद्देश्य खेती की लागत कम करना, भूमि की उर्वरा शक्ति बनाए रखना, रसायनमुक्त एवं गुणवत्तापूर्ण कृषि उत्पाद तैयार करना और परिवार व उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य उपलब्ध कराना था।

एनएमएनएफ योजना से मिला तकनीकी सहयोग

वर्ष 2025 से कृषक को आत्मा परियोजना के अंतर्गत नेशनल मिशन फॉर नेचुरल फार्मिंग (एनएमएनएफ) योजना से जोड़ा गया। योजना के तहत उन्होंने जागरूकता एवं ओरिएंटेशन कार्यक्रमों में भाग लिया और प्राकृतिक खेती के विभिन्न घटकों को तैयार करने तथा उनके उपयोग का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।

उन्होंने बीजामृत, जीवामृत, नीमास्त्र और ब्रह्मास्त्र जैसे प्राकृतिक कृषि आदानों को तैयार करना और उनका उपयोग करना सीखा। प्राकृतिक खेती के प्रति उनकी सक्रियता को देखते हुए उन्हें योजना के अंतर्गत बायो रिसोर्स यूनिट (बीआरसी यूनिट) भी प्रदान की गई। इसके माध्यम से वे प्राकृतिक कृषि आदान तैयार कर अपने खेत में उपयोग करने के साथ जरूरत के अनुसार अन्य किसानों को भी उपलब्ध करा रहे हैं।

अलग-अलग फसलों के साथ स्वीट कॉर्न की खेती

वर्तमान में शिवचरण कुशवाहा अपने खेत में विभिन्न फसलों की अंतवर्ती खेती के साथ प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। उन्होंने 25 डिसमिल में अदरक, तुअर, तिल्ली और बेबी कॉर्न, 75 डिसमिल में बैंगन और स्वीट कॉर्न तथा 75 डिसमिल में करीब 4,000 गेंदे के पौधों के साथ स्वीट कॉर्न की अंतरवर्तीय खेती की है। इसके अलावा 2 एकड़ में मुख्य रूप से स्वीट कॉर्न की खेती की जा रही है।

₹60 हजार लागत में ₹2.70 लाख की बिक्री

श्री शिवचरण कुशवाहा ने 2 एकड़ क्षेत्र में स्वीट कॉर्न की खेती से अब तक उल्लेखनीय आर्थिक लाभ प्राप्त किया है। उत्पादन में उनकी कुल लागत करीब ₹60,000 आई है। अब तक वे कुल ₹2,70,000 का स्वीट कॉर्न बेच चुके हैं। इससे उन्हें 2 एकड़ क्षेत्र में ₹2,10,000 का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ है। प्राकृतिक तरीके से उत्पादित स्वीट कॉर्न की स्थानीय स्तर पर अच्छी मांग बनी हुई है। ग्राम कुहिया के शिक्षक और जैविक उत्पाद पसंद करने वाले उपभोक्ता उनके खेत से सीधे सब्जियां और स्वीट कॉर्न खरीदने पहुंचते हैं।

स्थानीय बाजार में मिल रहा अच्छा प्रतिसाद

कृषक के खेत में प्राकृतिक तरीके से उत्पादित सब्जियों को स्थानीय उपभोक्ताओं का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। ग्राम के शिक्षक, अन्य ग्रामीण और जैविक उत्पादों में रुचि रखने वाले किसान उनके उत्पाद नियमित रूप से खरीदते हैं। खेत से सीधे बिक्री के बाद बची सब्जियों और कृषि उत्पादों को वे शासन द्वारा प्रारंभ गुरैया सब्जी मंडी स्थित साप्ताहिक जैविक हाट में भी बेचते हैं। इससे प्राकृतिक खेती से उत्पादित उपज को स्थानीय स्तर पर ही बाजार मिल रहा है और परिवहन एवं बिचौलियों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल रही है।

प्राकृतिक खेती से आत्मनिर्भरता की ओर

कृषक शिवचरण कुशवाहा का कहना है कि प्राकृतिक खेती अपनाने से उन्होंने खेती को केवल उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, मृदा संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और बेहतर आय का साधन बनाया है। वे स्वयं प्राकृतिक कृषि आदान तैयार कर उनका उपयोग कर रहे हैं और अन्य किसानों को भी प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

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