छिंदवाड़ा : गन्ने के साथ सोयाबीन की अंतरवर्तीय खेती का दुर्गेश ने किया नवाचार
13 अक्टूबर 2026, छिंदवाड़ा: छिंदवाड़ा: गन्ने के साथ सोयाबीन की अंतरवर्तीय खेती का दुर्गेश ने किया नवाचार – खेती में नए प्रयोग और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग किसानों के लिए समृद्धि के नए रास्ते खोल सकता है। छिन्दवाड़ा जिले के ग्राम दिलावर मोहगांव के किसान श्री दुर्गेश मंगरोले ने गन्ने के साथ सोयाबीन की अंतरवर्तीय खेती कर इसी दिशा में अभिनव पहल की है। जिले में पहली बार किए गए इस प्रयोग से उन्होंने एक ही खेत में दो फसलों का उत्पादन लिया है। अब वे इसी खेत में लहसुन की फसल लगाने की तैयारी कर रहे हैं। उनका यह नवाचार फसल विविधीकरण और खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण बन रहा है।
एक खेत में दो फसलें लेकर किया नया प्रयोग – किसान श्री दुर्गेश मंगरोले ने अपने खेत में 9 फीट की दूरी पर गन्ने की फसल लगाई और बीच की जगह में सोयाबीन की पांच लाइनें बोईं। इस अंतरवर्तीय खेती से उन्हें प्रति एकड़ लगभग 6 क्विंटल सोयाबीन का उत्पादन प्राप्त हुआ। इस प्रकार उपलब्ध कृषि भूमि का बेहतर उपयोग करते हुए उन्होंने मुख्य फसल के साथ अतिरिक्त फसल लेने का प्रयास किया। गन्ने के साथ सोयाबीन की खेती के बाद अब किसान श्री मंगरोले उसी खेत में लहसुन लगाने की तैयारी कर रहे हैं। अलग-अलग फसलों को अपनाने का उनका यह प्रयास खेती में नए विकल्प तलाशने और एक ही फसल पर निर्भरता कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
कृषि विभाग ने खेत का निरीक्षण कर किया नवाचार का अवलोकन – जिले में फसल विविधीकरण और आधुनिक कृषि तकनीकों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी क्रम में उप संचालक कृषि श्री मोरिस नाथ एवं परियोजना संचालक आत्मा श्री धीरज ठाकुर ने किसान श्री दुर्गेश मंगरोले के खेत का निरीक्षण कर गन्ने के साथ सोयाबीन की अंतरवर्तीय खेती का अवलोकन किया।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, उचित फसल संयोजन और वैज्ञानिक प्रबंधन के साथ अंतरवर्तीय खेती से भूमि का बेहतर उपयोग करने, अतिरिक्त उत्पादन प्राप्त करने और किसी एक फसल पर निर्भरता से जुड़े जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। इसके लिए फसलों के बीच उचित दूरी, बुवाई का समय, सिंचाई और पोषक तत्वों का प्रबंधन कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार करना आवश्यक है
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किसान श्री दुर्गेश मंगरोले की यह पहल जिले के अन्य किसानों को भी खेती में नए प्रयोग अपनाने के लिए प्रेरित करती है। फसल विविधीकरण के माध्यम से उपलब्ध कृषि भूमि का बेहतर उपयोग और आय के नए अवसर तलाशने का उनका प्रयास खेती को लाभकारी बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।
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