राज्य कृषि समाचार (State News)

छिंदवाड़ा बना जलवायु अनुकूल खेती का मॉडल, खेतों तक पहुँची अंतर्राष्ट्रीय तकनीक

06 मार्च 2026, छिन्‍दवाड़ाछिंदवाड़ा बना जलवायु अनुकूल खेती का मॉडल, खेतों तक पहुँची अंतर्राष्ट्रीय तकनीक – मध्य प्रदेश में मनाए जा रहे ‘कृषक कल्याण वर्ष 2026’ के अंतर्गत किसानों की आय बढ़ाने और खेती को जलवायु के अनुकूल बनाने की दिशा में छिंदवाड़ा जिला एक महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है। अंतर्राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान संस्थान बोरलॉग इंस्टीट्यूट फॉर साउथ एशिया (BISA) और मध्य प्रदेश कृषि विभाग के संयुक्त प्रयासों से अब आधुनिक कृषि तकनीक सीधे किसानों के खेतों तक पहुँच रही है।

इसी कड़ी में गुरुवार को जिले के मोहखेड़ विकासखंड के ग्राम चारगांव करबल में गेहूं की उन्नत और जलवायु अनुकूल किस्मों पर आधारित एक प्रक्षेत्र दिवस (फील्ड डे) का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक और बीसा (BISA) के प्रबंध निदेशक डॉ.बी.एम. प्रसन्ना के मार्गदर्शन में किया गया, जो अंतरराष्ट्रीय कृषि अनुसंधान को किसानों तक पहुंचाने की पहल को आगे बढ़ा रहे हैं।

किसानों को दिखाई आधुनिक तकनीक–  कार्यक्रम के दौरान बीसा (BISA) के तकनीकी सहायक श्री दीपेंद्र सिंह ने किसानों को गेहूं की नवीन और जलवायु अनुकूल किस्मों—HI-1636, DBW-303, DBW-327 और DBW-187—के बारे में विस्तार से जानकारी दी। किसानों को खेतों का भ्रमण करते हुए तीन अलग-अलग बुवाई पद्धतियों का प्रदर्शन कराया गया।इनमें शामिल थीं – सुपर सीडर पद्धति, जीरो टिलेज (शून्य जुताई) व पारंपरिक बुवाई पद्धति।  इस प्रदर्शन का उद्देश्य किसानों को खेत में ही तकनीकों के परिणाम दिखाना था, ताकि वे स्वयं तुलना कर बेहतर पद्धति अपनाने का निर्णय ले सकें।

जीरो टिलेज तकनीक से बढ़ी बचत– खेत भ्रमण के दौरान किसानों ने विशेष रूप से जीरो टिलेज तकनीक में रुचि दिखाई। ग्राम चारगांव करबल के प्रगतिशील किसान श्री रघुवर भादे ने बताया कि इस पद्धति से  उन्हें प्रति एकड़ लगभग ₹2500 की सीधी बचत हुई है। उन्होंने बताया कि सिंचाई के पानी की खपत कम हुई, बीज की मात्रा लगभग आधी लगती है और पराली जलाने की समस्या से राहत मिली है। उनके अनुसार यह तकनीक, खेती की लागत घटाने और पर्यावरण संरक्षण दोनों के लिए उपयोगी है।

विशेषज्ञों ने दी योजनाओं की जानकारी – कार्यक्रम में कृषि विभाग और आत्मा परियोजना के अधिकारियों ने भी किसानों को विभिन्न योजनाओं और आधुनिक खेती के तरीकों की जानकारी दी। वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी श्री डी.एस.घाघरे ने सरकारी योजनाओं के बारे में बताया। आत्मा परियोजना की बीटीएम श्रीमती प्रिया कराडे ने प्राकृतिक खेती के लाभ समझाए। कृषि विस्तार अधिकारी श्री बी.एल. सरेआम ने प्रभावी नरवाई प्रबंधन के उपाय बताए।

किसानों में दिखा उत्साह – इस प्रक्षेत्र दिवस (फील्ड डे) में किसान श्री रघुवर भादे, राजा भोज एफपीओ के प्रतिनिधि श्री सागर, श्री गजानंद कड़वे, श्री विशाल सहित क्षेत्र के कई कृषकों ने भाग लिया। किसानों ने आधुनिक तकनीकों को खेत में देखकर उन्हें उत्साहपूर्वक अपनाने की इच्छा जताई।

खेती को लाभकारी बनाने की पहल – विशेषज्ञों का मानना है कि BISA और कृषि विभाग के संयुक्त प्रयासों से छिंदवाड़ा में जलवायु अनुकूल खेती का मॉडल विकसित हो रहा है। ‘कृषक कल्याण वर्ष 2026’ के दौरान इस तरह के कार्यक्रम किसानों को नई तकनीकों से जोड़कर खेती को अधिक लाभदायक और टिकाऊ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture

Advertisements