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राज्य कृषि समाचार (State News)

ग्वालियर में खेती का बदला स्वरूप, उद्यानिकी का रकबा 17% पहुंचा; प्राकृतिक खेती और पशुपालन से बढ़े कमाई के अवसर    

09 सितंबर 2026, ग्वालियर: ग्वालियर में खेती का बदला स्वरूप, उद्यानिकी का रकबा 17% पहुंचा; प्राकृतिक खेती और पशुपालन से बढ़े कमाई के अवसर – मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले में पारंपरिक खेती के साथ उद्यानिकी, प्राकृतिक एवं जैविक खेती और पशुपालन को बढ़ावा दिया जा रहा है। फसल विविधीकरण और आधुनिक गतिविधियों के विस्तार से किसानों के लिए कमाई के नए अवसर तैयार हो रहे हैं। जिले में उद्यानिकी फसलों का रकबा बढ़कर कृषि क्षेत्र का करीब 17 प्रतिशत हो गया है, जिसे इस वर्ष 20 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। जिले में कुल 2.14 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है। खरीफ में धान, ज्वार, बाजरा और तिल, जबकि रबी में गेहूं, सरसों, चना और मसूर जैसी फसलें ली जाती हैं। फसल विविधीकरण के तहत खरीफ-2026 में 6,759 हेक्टेयर में तिल की बोवनी की गई है।

प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा

प्राकृतिक खेती के तहत 25 क्लस्टरों में 17 बायो रिसर्च सेंटरों के माध्यम से 3,125 किसानों की 1,250 हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक एवं जैविक खेती की जा रही है। वहीं परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत 2,000 हेक्टेयर क्षेत्र में 1,799 किसानों का जैविक खेती के लिए पंजीयन और प्रमाणीकरण कराया गया है। इन किसानों को 5,000 रुपये प्रति हेक्टेयर प्रतिवर्ष के हिसाब से कुल 1 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि DBT के माध्यम से दी गई है।

58 हजार किसानों को मिला 32,945 मीट्रिक टन खाद

खरीफ-2026 में ई-विकास प्रणाली के तहत 1,15,371 ई-टोकन के माध्यम से 58,160 किसानों को 32,945 मीट्रिक टन रासायनिक उर्वरक वितरित किया गया है। खाद का वितरण सहकारी समितियों, मार्कफेड सहित अन्य संस्थाओं के माध्यम से किया गया।

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उद्यानिकी फसलों का बढ़ा रकबा

प्रदेश में कृषि क्षेत्र का करीब 9.1 प्रतिशत हिस्सा उद्यानिकी फसलों के अंतर्गत है, जबकि ग्वालियर में यह आंकड़ा करीब 17 प्रतिशत है। जिले में 4,650 हेक्टेयर में आलू और 218 हेक्टेयर में फूलों की खेती हो रही है। दिल्ली की मंडी नजदीक होने से फूलों और विदेशी सब्जियों की खेती की संभावनाओं को देखते हुए पिछले तीन वर्षों में 1,250 हेक्टेयर क्षेत्र का विस्तार हुआ है। जिले में अमरूद 504 हेक्टेयर, नींबू 432 हेक्टेयर, मटर 2,558 हेक्टेयर और टमाटर 1,277 हेक्टेयर में लगाया जा रहा है। जिले का कुल कृषि फसल उत्पादन 3,786 करोड़ रुपये है, जिसमें उद्यानिकी फसलों का योगदान 1,393 करोड़ रुपये, यानी कुल कृषि आय का 36.79 प्रतिशत है।

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PMFME से 569 खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना (PMFME) के तहत जिले में 569 खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित की गई हैं। इस उपलब्धि के साथ ग्वालियर प्रदेश में तीसरे स्थान पर है। इन इकाइयों से करीब 3,000 लोगों को रोजगार मिल रहा है। शासकीय पौधशाला ग्वालियर को हाईटेक स्वरूप में विकसित किया गया है, जिससे इसकी आय दोगुनी हुई है। वहीं दिल्ली में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय कृषि उद्यानिकी एक्सपो 2026 में ग्वालियर को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रथम स्थान मिला। मुरार क्षेत्र के खुरेरी जहांगीरपुर में करीब 100 बीघा में प्रदेश का पहला फ्लोरीकल्चर गार्डन भी विकसित किया जा रहा है।

पशुपालन में नस्ल सुधार पर जोर

पशुपालकों को घर पहुंचकर चिकित्सा सुविधा देने के लिए जिले में 6 मोबाइल वेटरिनरी यूनिट संचालित हैं। इनके माध्यम से वर्ष 2026-27 में अब तक 4,288 पशुओं का उपचार किया जा चुका है। राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत एफएमडी का निःशुल्क टीकाकरण जारी है। जुलाई 2026 से शुरू हुए आठवें चरण में 3,20,500 पशुओं के लक्ष्य के मुकाबले अब तक 2,10,524 पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है।

पशुओं की नस्ल सुधार के लिए सेक्स सोर्टेड सीमन और कृत्रिम गर्भाधान जैसी तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है। 2026-27 में 9,000 सेक्स सोर्टेड सीमन के लक्ष्य के मुकाबले 728 और 85,968 कृत्रिम गर्भाधान के लक्ष्य के मुकाबले 11,997 की उपलब्धि दर्ज की गई है। डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के तहत बड़े डेयरी फार्म को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसमें 25 गायों की यूनिट के लिए 36 लाख रुपये और 25 भैंसों की यूनिट के लिए 42 लाख रुपये तक की परियोजना का प्रावधान है। जिले में अब तक योजना के तहत 90 ऑनलाइन आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 30 प्रकरणों को शासन स्तर से मंजूरी मिल चुकी है।

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