बालाघाट: धान की फसल पर मंडराया कीट प्रकोप
12 सितंबर 2026, बालाघाट: बालाघाट : धान की फसल पर मंडराया कीट प्रकोप – जिले में धान की फसल पर सफेद माहू, तना छेदक, तना गलन एवं शीथ ब्लाइट जैसी कीट-व्याधियों का प्रकोप देखा जा रहा है। कृषि वैज्ञानिकों एवं कृषि विभाग के मैदानी अमले ने किसानों को खेतों की नियमित निगरानी करने और प्रारंभिक अवस्था में ही नियंत्रण के उपाय अपनाने की सलाह दी है।कृषि महाविद्यालय मुरझड़ के वैज्ञानिकों एवं कृषि विभाग के अमले द्वारा किए गए निरीक्षण में रोपाई के 25 से 30 दिन बाद धान के तनों पर सफेद माहू का प्रकोप पाया गया। इसके प्रभाव से पत्तियां सुनहरी-पीली पड़ रही हैं। विशेषज्ञों ने समय रहते उचित प्रबंधन अपनाने की अपील की है। रासायनिक कीटनाशकों के विकल्प के रूप में प्राकृतिक एवं जैविक तरीके से तैयार नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र एवं दशपर्णी अर्क को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है।
इनका उपयोग कीट प्रकोप के नियंत्रण में किया जा सकता है तथा ये मित्र कीटों और मिट्टी की उर्वरता के संरक्षण में भी सहायक हैं।किसानों की सुविधा के लिए कृषि विभाग (आत्मा समिति) एवं राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से जिले के विभिन्न बायो रिसोर्स सेंटरों पर ये जैविक कीट रोधी दवाएं उचित दरों पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। कटंगी, बालाघाट, किरनापुर, लालबर्रा, लांजी, बिरसा, बैहर, वारासिवनी, खैरलांजी एवं परसवाड़ा तहसील के चिन्हित ग्रामों में सीएलएफ, स्व-सहायता समूहों एवं कृषि सखियों द्वारा संचालित बायो रिसोर्स सेंटरों से किसान इन्हें प्राप्त कर सकते हैं।
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे फसल की सुरक्षा के लिए बायो रिसोर्स सेंटरों पर उपलब्ध जैविक कीटनाशकों को प्राथमिकता दें। इससे कम लागत में फसल को कीट प्रकोप से बचाने में मदद मिलेगी। साथ ही छिड़काव के दौरान पर्याप्त जल स्तर एवं आवश्यक सुरक्षा नियमों का पालन करने की सलाह दी गई है।
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