राज्य कृषि समाचार (State News)

कृषि विधेयक-2020 पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

02 नवम्बर 2020, रायसेन। कृषि विधेयक-2020 पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किसानों के लिए लाभकारी एवं उनके हितों का संरक्षण करने वाले कृषि विधेयक-2020 को लेकर कृषि विज्ञान केन्द्र, रायसेन द्वारा जिले के कृषकों एवं आदान विक्रेताओं हेतु दो वेबीनार का आयोजन किया गया। कृषि विज्ञान केन्द्र, रायसेन के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. स्वप्निल दुबे ने बताया कि जिले के कृषकों एवं आदान बिक्रेताओं को कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक, मूल्य आश्वासन और कृषि सेवाओं पर किसान (सशक्तिकरण और संरक्षण) समझौता विधेयक, सेवा विधेयक और आवश्यक वस्तुएं (संशोधन) विधेयक की जानकारी पॉवरपॉइंट स्लाइड के माध्यम से दी गई व उनकी शंकाओं का समाधान किया गया। साथ ही कार्यक्रम में भारत सरकार द्वारा कृषि विधेयक पर विकसित छोटी-छोटी पांच वीडियो फिल्म दिखाकर जानकारी दी गई। कृषि विधेयक के अनुसार कृषक अपनी उपज को कृषि मण्डियों के साथ-साथ मण्डियों के अलावा व्यापार क्षेत्र- फार्म गेट्स, वेयर हाउस/ भण्डार गृह, कोल्ड स्टोरेज, प्रोसेसिंग यूनिट, कारखाना परिसर व सायलो पिट पर भी उचित मूल्य पर बेच सकता है। किसान या व्यापारी इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग के माध्यम से एक व्यापार क्षेत्र से राज्य के अंदर या दूसरे राज्यों के साथ व्यापार में शामिल हो सकेंगे। जिससे देशभर के किसानों को एक देश एक मण्डी की अवधारणा को बढ़ावा मिलेगा। इस बिल के अनुसार सरकार द्वारा एमएसपी पर खरीदी जारी रहेगी व कृषि मण्डियां भी चलती रहेंगी। कृषक को अपनी उपज बेचने के तीन दिन के अंदर ही भुगतान की व्यवस्था होगी और कृषि उत्पादकों पर टैक्स का बोझ कम होगा।

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किसान समझौता विधेयक में प्रावधान है कि किसी कृषि उत्पाद के उत्पादन या पालन से पहले किसान और खरीददार के बीच कृषि समझौता (कॉन्ट्रेक्ट खेती) किया जाएगा। समझौते की अवधि एक फसल मौसम या पशु का एक प्रजनन चक्र होगा। कृषि समझौते की अधिकतम अवधि 5 वर्ष तक होगी। आवश्यक वस्तु अधिनियम की सूची से खाद्यान्न, दलहन एवं तिलहन के साथ-साथ प्याज व आलू जैसी प्रमुख फसलों को भी बाहर कर दिया है। किसान अपनी फसल का सौदा अपने ही नही बल्कि दूसरे राज्य के लाइसेंसी व्यापारी के साथ भी कर सकते हैं। इससे बाजार मे प्रतिस्पर्धा होगी और किसानों को अपनी मेहनत के अच्छे दाम भी मिलेंगे। कार्यक्रम को सफल बनाने में केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ. मुकुल कुमार, प्रदीप कुमार द्विवेदी, श्री रंजीत सिंह राद्यव, श्री आलोक कुमार सूर्यवंशी, श्रीमती लक्ष्मी चक्रवर्ती, डॉ. अंशुमान गुप्ता, श्री पंकज भार्गव एवं श्री सुनील कैथवास का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यक्रम में कृषक, आदान विक्रताओं व जिले के कृषि व आत्मा अधिकारियों ने भाग लिया।

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