राज्य कृषि समाचार (State News)

अगस्त में फलदार पौधे लगाने का सही समय, कृषि वैज्ञानिकों ने आम-अमरूद समेत इन फलों की खेती की दी सलाह

25 अगस्त 2026, भोपाल: अगस्त में फलदार पौधे लगाने का सही समय, कृषि वैज्ञानिकों ने आम-अमरूद समेत इन फलों की खेती की दी सलाह – अगस्त माह फलदार पौधों की रोपाई के लिए उपयुक्त समय है। मध्यप्रदेश कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को आम, अमरूद, आंवला, नींबू, बेर, पपीता समेत अन्य फलदार पौधे लगाने की सलाह दी है। वैज्ञानिकों के अनुसार पौधों का चयन क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी, औसत वर्षा, सड़क, परिवहन और बाजार की उपलब्धता को ध्यान में रखकर करना चाहिए। किसानों को कलमी और मध्यम बढ़वार वाले पौधों का चयन करने की सलाह दी गई है।

पौध लगाने से पहले गड्ढे में डालें खाद

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार गर्मी के दिनों में खोदे गए गड्ढों में बारिश शुरू होने से पहले 15 से 20 किलो गोबर की खाद, 100 ग्राम सुपर फास्फेट, 50 ग्राम क्लोरोपायरीफॉस और 1 किलो नीम की खली प्रति गड्ढे के हिसाब से मिलाकर भर देना चाहिए। इससे पौधों को शुरुआती बढ़वार के लिए जरूरी पोषक तत्व मिल सकेंगे।

आम, आंवला और अमरूद की ये किस्में लगाएं

कृषि वैज्ञानिकों ने अलग-अलग फलदार पौधों की उन्नत किस्मों की जानकारी भी दी है। आम में दशहरी, लंगड़ा, आम्रपाली, हापुस, केसर और चौसा, जबकि आंवला में एनए-7, एनए-8, चकैया, कृष्णा और कंचन की किस्में बताई गई हैं। अमरूद में एल-49, इलाहाबादी सफेदा, चित्तीदार और वीएनआर-7 की खेती की जा सकती है।

इसी तरह अनार में भगवा, गणेश और सिंदूरी, बेर में गोला और उमराव, नींबू में कागजी लाइम और साई सरबती, संतरे में नागपुरी संतरा तथा सीताफल में अर्काश्यान और बालानगर जैसी किस्मों का चयन किया जा सकता है।

शाम के समय करें पौधों की रोपाई

फलदार पौधे लगाते समय किसानों को कुछ सावधानियां बरतने की सलाह दी गई है। पौधों की रोपाई हमेशा शाम के समय करनी चाहिए। पौधा लगाने के बाद हल्की सिंचाई जरूर करें। पौध लगाने से पहले पौधे की जड़ों से लिपटी घास और पॉलीथिन की थैली को सावधानीपूर्वक हटा दें। खेत में निराई-गुड़ाई के साथ उचित जल निकास की व्यवस्था भी रखें।

पौधों की सुरक्षा के लिए लगाएं बाड़

फलदार पौधे लगाने से पहले खेत के चारों ओर सुरक्षा के लिए बाड़ लगाना भी जरूरी है। इसके लिए कंटीले तार या कंटीली झाड़ियों के अलावा करौंदा, निर्गुंडी, मेहंदी और नागफनी जैसे पौधों का इस्तेमाल किया जा सकता है। बगीचे को तेज हवाओं से बचाने के लिए उत्तर-पश्चिम दिशा में शीशम, जामुन, बेल, लडोसा, शहतूत, खिरनी, इमली और करौंदा जैसे लंबे और तेजी से बढ़ने वाले वायुरोधक पेड़ लगाने की सलाह दी गई है।

सब्जियों की पौध के लिए प्रो-ट्रे तकनीक अपनाएं

कृषि वैज्ञानिकों ने टमाटर, भटा, मिर्च और बैंगन जैसी सब्जियों की पौध तैयार करने के लिए प्रो-ट्रे तकनीक अपनाने की सलाह दी है। इसमें बीज का जमाव और अंकुरण बेहतर होता है तथा पौध की बढ़वार भी अच्छी रहती है। प्रो-ट्रे में कोकोपिट, वर्मीकुलाइट, वर्मीकम्पोस्ट और बालू जैसे माध्यमों का इस्तेमाल किया जा सकता है। एक प्रो-ट्रे का 4 से 5 बार तक उपयोग किया जा सकता है।

फलदार पौधों में सिंचाई का रखें ध्यान

किसानों को फलदार पौधों में मौसम के अनुसार सिंचाई करने की सलाह दी गई है। सर्दियों में 10 से 15 दिन के अंतराल पर और गर्मियों में 5 से 8 दिन के अंतराल पर सिंचाई की जा सकती है। वैज्ञानिकों के अनुसार जरूरत से ज्यादा पानी देने से पौधों और फलों को नुकसान हो सकता है। अधिक पानी के कारण फलों का विकास प्रभावित होने के साथ उनका स्वाद भी खराब हो सकता है।

पशुओं का टीकाकरण भी जरूरी

कृषि सलाह में पशुओं के टीकाकरण पर भी जोर दिया गया है। गाय, भैंस और बकरी को खुरपका-मुंहपका रोग से बचाने के लिए पॉलीवैलेंट सेल कल्चर वैक्सीन अक्टूबर-नवंबर में लगवाने की सलाह दी गई है। गाय और भैंस में ब्रुसेलोसिस से बचाव के लिए कॉटन स्ट्रेन-19 ब्रुसेला टीका तथा बकरी में प्लूरो निमोनिया से बचाव के लिए पीपीआर टीका लगवाने की सलाह दी गई है। किसानों को टीकाकरण के लिए नजदीकी पशु चिकित्सालय से संपर्क करने को कहा गया है।

अलग-अलग पौधों के बीच रखें उचित दूरी

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार आम के पौधे 10×10 या 8×8 मीटर, आंवला 8×8 मीटर, नींबू 5×5 मीटर, अमरूद 8×8 मीटर और करौंदा 4×4 मीटर की दूरी पर लगाए जा सकते हैं। इससे पौधों को पर्याप्त जगह और बढ़ने के लिए उचित वातावरण मिलता है। किसानों को फलदार बगीचे के लिए अनुदान और तकनीकी जानकारी लेने के लिए अपने जिले के सहायक संचालक उद्यानिकी कार्यालय से संपर्क करने की सलाह दी गई है।

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