राज्य कृषि समाचार (State News)

विदिशा जिले में समय पर उपचार से बची गाय की जान

1962 चलित पशु चिकित्सा इकाई बनी संजीवनी

16 फरवरी 2026, विदिशा: विदिशा जिले में समय पर उपचार से बची गाय की जान –  शासन द्वारा संचालित 1962 चलित पशु चिकित्सा इकाई ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों के लिए जीवनदायिनी सेवा साबित हो रही है। इसका एक प्रेरणादायक उदाहरण कुरवाई विकासखंड के ग्राम झुनावटी में सामने आया, जहां समय पर मिली चिकित्सा सहायता से एक गंभीर रूप से बीमार गाय की जान बचाई जा सकी।

ग्राम झुनावटी निवासी श्रीमती कल्लो बाई अहिरवार के लिए एक दिन बेहद चिंताजनक बन गया, जब उनकी गाय अचानक गंभीर रूप से बीमार हो गई। स्थिति इतनी गंभीर थी कि पशु के जीवन पर खतरा मंडरा रहा था। ऐसे संकट की घड़ी में उन्हें शासन की 1962 चलित पशु चिकित्सा इकाई सेवा के बारे में जानकारी मिली।

श्रीमती कल्लो बाई ने तुरंत टोल-फ्री नंबर 1962 पर कॉल कर अपने पशु की स्थिति की जानकारी दी। कॉल सेंटर में उनके पशु का विवरण दर्ज किया गया और लक्षणों के आधार पर तुरंत केस दर्ज कर चलित पशु चिकित्सा इकाई को सूचित किया गया। कुछ ही देर में इकाई प्रभारी ने स्वयं संपर्क कर आश्वस्त किया कि शीघ्र ही उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। विश्वास और उम्मीद के बीच महज 30 मिनट के भीतर पशु चिकित्सा दल उनके घर पहुंच गया। जांच के दौरान चिकित्सकों ने पाया कि गाय डिस्टोकिया (प्रसव संबंधी जटिलता) से पीड़ित है। टीम ने तत्परता और दक्षता से उपचार करते हुए मृत बछड़े को बाहर निकाला और गाय की जान बचा ली। उपचार के बाद निर्धारित शुल्क 150 रुपये ऑनलाइन माध्यम से जमा किया गया तथा संबंधित ओटीपी के माध्यम से उपचार प्रक्रिया पूर्ण की गई।

श्रीमती कल्लो बाई ने इस सेवा के प्रति संतोष व्यक्त करते हुए बताया कि यदि समय पर उपचार नहीं मिलता तो उनकी गाय को बचा पाना संभव नहीं था। उन्होंने कहा कि शासन की इस पहल ने न केवल उनके पशु को नया जीवन दिया, बल्कि ग्रामीण पशुपालकों में यह विश्वास भी मजबूत किया है कि अब पशु चिकित्सा सेवाएं उनके घर तक उपलब्ध हैं।

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