बुंदेलखंड में आधुनिक खेती की मिसाल बने अमित जैन, एक्वेटिक सब्जियों से बदली किस्मत
02 फरवरी 2026, नई दिल्ली: बुंदेलखंड में आधुनिक खेती की मिसाल बने अमित जैन, एक्वेटिक सब्जियों से बदली किस्मत – बुंदेलखंड क्षेत्र, जहां पारंपरिक खेती और मौसम की मार से किसान अक्सर नुकसान झेलते हैं, वहीं सागर जिले की खुरई तहसील के खिमलासा गांव के किसान अमित जैन ने आधुनिक सोच और नई तकनीक के जरिए खेती को लाभ का व्यवसाय बनाकर एक नई मिसाल पेश की है। सात एकड़ में विकसित अपने एक्वेटिक वेजिटेबल फार्म के माध्यम से अमित जैन न सिर्फ आत्मनिर्भर बने हैं, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा स्रोत बन गए हैं।
परंपरागत खेती छोड़ अपनाई एक्वेटिक कृषि
खिमलासा निवासी 43 वर्षीय अमित जैन बी.कॉम तक शिक्षित हैं। वे पहले मेडिकल शॉप का संचालन करते थे, लेकिन वर्ष 2012 में पिता के निधन के बाद परिवार की खेती की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। पिता की इच्छा थी कि वे खेती करें, लेकिन कुछ नया और अलग करें। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए अमित जैन ने पारंपरिक खेती से हटकर एक्वेटिक कृषि को अपनाने का निर्णय लिया।
प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं से मिली मजबूती
खेती संभालने के बाद अमित जैन ने शासन की विभिन्न कृषि योजनाओं की जानकारी जुटाई और उद्यानिकी विभाग, सागर से आधुनिक खेती का प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने एक्वेटिक पद्धति से ब्रोकली, रेड कैबेज, चाइना कैबेज, लेट्यूस सहित कई उन्नत और विदेशी किस्म की सब्जियों की खेती शुरू की। शुरुआती दौर में जोखिम जरूर था, लेकिन मेहनत, सही तकनीक और विभागीय मार्गदर्शन के चलते उन्हें उम्मीद से कहीं बेहतर परिणाम मिले।
दिल्ली तक पहुंची खिमलासा की सब्जियां
अमित जैन द्वारा उगाई गई सब्जियां आज केवल सागर जिले तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भोपाल, इंदौर और दिल्ली तक सप्लाई की जा रही हैं। खासतौर पर दिल्ली की मंडियों और फाइव स्टार होटलों में इन सब्जियों की काफी मांग है, जहां इन्हें 50 रुपये प्रति किलो से अधिक दाम मिलते हैं। कई बार ऑर्डर इतने अधिक हो जाते हैं कि सभी मॉल और होटलों की मांग पूरी कर पाना संभव नहीं हो पाता।
कम पानी में अधिक उत्पादन
एक्वेटिक सब्जियों की खेती से अमित जैन सालाना एक लाख रुपये से अधिक की आमदनी कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह खेती पारंपरिक फसलों की तुलना में कम पानी में अधिक उत्पादन देती है और बदलते मौसम का असर भी अपेक्षाकृत कम पड़ता है। यही कारण है कि बुंदेलखंड जैसे सूखा प्रभावित क्षेत्र के लिए यह पद्धति बेहद उपयोगी साबित हो रही है।
परिवार भी खेती से जुड़ा
अमित जैन की तीन बेटियां हैं, जो अभी स्कूल में पढ़ाई कर रही हैं। पिता की मेहनत और खेती के प्रति समर्पण को देखकर वे भी छुट्टियों और खाली समय में छोटे-मोटे कृषि कार्यों में सहयोग करती हैं। अमित जैन का मानना है कि बच्चों को खेती से जोड़ना भविष्य के लिए बेहद जरूरी है।
अन्य किसानों के लिए प्रेरणा
आज अमित जैन न केवल खुद आत्मनिर्भर बने हैं, बल्कि आसपास के किसानों को भी आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी दे रहे हैं। उद्यानिकी विभाग से उन्हें इरिगेशन सिस्टम, पैक हाउस निर्माण और वर्मी कम्पोस्ट के लिए सब्सिडी भी मिली, जिससे उनकी लागत कम हुई और मुनाफा बढ़ा। खिमलासा का यह किसान साबित कर रहा है कि सही जानकारी, प्रशिक्षण और नई सोच के साथ खेती को भी सफल और लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है।
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