राज्य कृषि समाचार (State News)किसानों की सफलता की कहानी (Farmer Success Story)

निमाड़ में अजय ने जगाई मिर्च फसल की उम्मीदें

19 जुलाई 2025, (कृष्णपाल सिंह मौर्य, सनावद): निमाड़ में अजय ने जगाई मिर्च फसल की उम्मीदें – दुष्यंत का एक चर्चित शेर है कि ” कौन कहता है आसमां में छेद नहीं होता , एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों ”  दुष्यंत के इस शेर को साकार किया है , ग्राम कुआँ (दवाना) जिला बड़वानी के युवा और प्रगतिशील किसान श्री अजय पाटीदार ने। वे विगत 5 वर्षों से मिर्च की खेती कर अच्छा उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं। उनके इस प्रयास ने निमाड़ में फिर से मिर्च फसल की उम्मीदें जगा दी है।

बता दें कि बड़वानी का  इलाका जहां हरी मिर्च के लिए प्रसिद्ध है,  वहीं  सनावद-भीकनगांव का क्षेत्र लाल मिर्च  के लिए जाना जाता है। गत वर्ष मिर्च की ये दोनों किस्में कठिन दौर से गुज़रीं। हरी मिर्च को वायरस ने जकड़ लिया, और लाल मिर्च को बाजार में उचित दाम नहीं मिले। इसका नतीजा यह रहा कि इस वर्ष निमाड़ क्षेत्र में मिर्च का रकबा लगभग आधा रह गया और यह फसल भविष्य के लिए एक सवाल बनकर खड़ी हो गई। लेकिन निराशा के अंधकार के बीच श्री अजय  पाटीदार रोशनी की उम्मीद लेकर उभरे और गत रबी सीजन में और फिर इस खरीफ में मिर्च की शानदार फसल तैयार कर दी। श्री अजय पाटीदार ने रासायनिक और जैविक पद्धतियों का समावेश कर उत्पादन लागत को घटाया और मुनाफा बढ़ाया। उनकी इस सफलता ने आसपास के किसानों को  पुनः मिर्च फसल की खेती की ओर उन्मुख होने के लिए प्रेरित किया है।

श्री अजय पाटीदार ने कृषक जगत को बताया कि वे विगत 5 वर्ष से मिर्च की खेती करते हैं। करीब 21 एकड़ में  प्रचलित मिर्च किस्म ज्वाला ,720  और जी-4 के मजबूत और स्वस्थ करीब पौने दो लाख पौधे गौतम ग्रीन्स नर्सरी, सनावद से लेकर लगाएं हैं। इस कार्य में  श्री अनिल सैनी, इंदौर और श्री केपीएस मौर्य उर्फ दादू , सनावद का सहयोग और मार्गदर्शन मिलता है।  मिर्च फसल में रासायनिक और जैविक दोनों पद्धतियों का समावेश  किया है। जिसमें रासायनिक का 70 % और जैविक का 30 % योगदान है। खेती में  मल्चिंग  शीट व ड्रिप सिस्टम जैसे आधुनिक तकनीकी साधनों का उपयोग करते हैं। श्री पाटीदार ने बताया कि जैविक के लिए बेस में गोबर खाद, जिप्सम , गन्ना कारखाने के अपशिष्ट प्रेसमेट के अलावा बायो कल्चर ट्राइकोडर्मा आदि को भी ड्रिप में चलाते हैं। इसके अलावा खेत में 15  हज़ार लीटर का एक हौज बनवाया है , जिसमें गोबर, गोमूत्र, सब्जियों के अपशिष्ट आदि डालते रहते हैं। इसके अर्क के अलावा इसमें केंचुए भी पनपते हैं। इनसे तैयार वर्मी वाश का भी मिर्च फसल में उपयोग किया जाता है।  इसके अलावा जरूरत के अनुसार  समय – समय पर रासायनिक दवाओं के स्प्रे भी किए जाते हैं। गत वर्ष अक्टूबर में इन्होंने 4 एकड़  में  24 लाख रु की मिर्च उत्पादित कर बेची थी, जबकि इसके पूर्व खरीफ में  साढ़े 5 एकड़ में  13  लाख की मिर्च बेची थी। इनका मिर्च उत्पादन ही नहीं, गुणवत्ता भी इतनी बेहतरीन रही कि बाजार में इनकी  मिर्च को ऊंचे  दाम मिले और अच्छा लाभ प्राप्त हुआ। गत दिनों इनके मार्गदर्शक श्री मौर्य के अलावा उन्नत कृषक श्री अनूपचंद बिर्ला और श्री अशोक पाटीदार ,दवाना ने मिर्च फसल का अवलोकन किया और संतुष्टि ज़ाहिर की। इस प्रगतिशील कृषक के प्रयासों में सबक और संदेश दोनों समाहित हैं। जहां  एक ओर संपूर्ण निमाड़ क्षेत्र में मिर्च की खेती संदेह के घेरे में है, वहीं श्री अजय पाटीदार जैसे किसान यह संदेश दे रहे हैं, कि तकनीकी ज्ञान, वैज्ञानिक सलाह और जैविक जागरूकता से कोई भी फसल फिर से सफल बन सकती है। मिर्च फसल से उम्मीदें बाक़ी हैं, और अजय पाटीदार इसकी जीवंत मिसाल हैं।

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