टॉप 45 में भी नहीं मध्य प्रदेश के कृषि विश्वविद्यालय

Share

सरकार बेखबर !

(विशेष प्रतिनिधि)

11 दिसंबर 2021, भोपाल । टॉप 45 में भी नहीं मध्य प्रदेश के कृषि विश्वविद्यालयइंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर द्वारा गत 3 दिसंबर को जारी कृषि विश्व विद्यालयों की रैंकिंग सूची में मध्य प्रदेश के नामचीन जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्व विद्यालय जबलपुर और ग्वालियर के राजमाता सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय टॉप 45 में भी स्थान नहीं बना पाए हैं। ये तथ्य आश्चर्यजनक तो नहीं है पर दुर्भाग्यपूर्ण है। कृषि विश्वविद्यालयों को इस स्थिति से पहुंचाने के बाद भी राज्य शासन को इसके उन्नयन की कोई परवाह नहीं है। मध्य प्रदेश सरकार की उदासीनता से प्रदेश में कृषि शिक्षा, कृषि विकास, कृषि अनुसंधान केवल जबानी जुगाली के लिए रह गए हैं। 58 वर्ष पूर्व स्थापित हुए जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय आज अपनी ‘बेनूरी’ पर रो रहा है।

जनेकृविवि के अंतर्गत 7 कृषि महाविद्यालय, 2 उद्यानिकी कॉलेज, 1 एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग कॉलेज संचालित है। इसी के साथ ही 9 कृषि अनुसंधान केन्द्रों, 22 कृषि विज्ञान केन्द्र भी हैं।

प्रदेश का आर्थिक विकास ग्रामीण समाज विशेषकर कृषकों की समृद्धि से जुड़ा है। कृषकों की आर्थिक प्रगति कृषि शिक्षा, अनुसंधान कृषि की उन्नत तकनीक पर निर्भर है। प्रदेश में कृषि शिक्षा व अनुसंधान प्रदेश के दोनों कृषि विश्वविद्यालयों क्रमश: ज.ने.कृ.वि.वि. जबलपुर एवं रा.वि.सि.कृ.वि.वि. ग्वालियर पर निर्भर है लेकिन चिंता का विषय है कि दोनों कृषि वि.वि. की रैंकिंग राष्ट्रीय स्तर पर इस वर्ष गिर गई है जो राष्ट्रीय स्तर पर क्रमश: 47 एवं 48 नम्बर पर है।

राष्ट्रीय स्तर पर रैंकिंग की गणना के अनुसार भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की डीन्स कमेटी के मुताबिक छात्र एवं शिक्षक का अनुपात 1:5 होना चाहिए किन्तु ज.ने.कृ.वि.वि. जबलपुर में शिक्षकों के कुल 329 पद स्वीकृत हैं जिसके विरुद्ध मात्र 164 पद भरे हैं। वहीं गैर शैक्षणिक पद 927 स्वीकृत हैं जिसके विरुद्ध मात्र 362 पद भरे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर रैंकिंग गणना का मुख्य बिन्दु है। ज्ञात हुआ है कि पद भरे जाने हेतु कृषि वि.वि. द्वारा राज्य शासन को कृषि विभाग के माध्यम से मंजूरी के लिए बार-बार समय पर प्रस्ताव भेजे गए किन्तु शासन की उदासीनता के कारण अनिर्णय की स्थिति रही और कृषि वि.वि. की रैंकिंग गिरी है।

इसी प्रकार सरकार द्वारा कृषि महाविद्यालय खुरई (सागर), उद्यानिकी महाविद्यालय रहली (सागर) एवं छिंदवाड़ा खोलने की स्वीकृति दी गई लेकिन महाविद्यालय की अधोसंरचना एवं वेतन भत्तों के नाम पर ठनठन गोपाल। ऐसी स्थिति में इन महाविद्यालयों की मान्यता पर भी विपरीत असर पड़ सकता है। इसके बावजूद दर्जन भर से      अधिक नए कृषि महाविद्यालय खोलने के प्रस्ताव सरकार के पास विचाराधीन है।

वित्तीय परिदृश्य के परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो राज्य शासन द्वारा वर्ष 2017-18 में 124 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई जो क्रमश: प्रत्येक वर्ष बढ़ती थी किन्तु शासन ने वर्ष 2021-22 में केवल 84 करोड़ ही वेतन भत्ते में स्वीकृत किए हैं। उपरोक्त सभी योजनाएं राज्य शासन वित्त पोषित हैं।

कृषि वि.वि. में कुछ केन्द्र शासन की एवं राज्य शासन की 25 प्रतिशत अंशवाली कृषि की अनुसंधान योजनाएं हैं, इन परियोजनाओं में तकनीकी व गैर तकनीकी पद लंबे समय से खाली पड़े हुए हैं और सरकार से पद भरने की मंजूरी नहीं मिल रही है। वहीं केन्द्र शासन की 100 प्रतिशत वित्त पोषित योजनाओं में भी खाली पड़े पद भरने की स्वीकृति मांगी गई किन्तु शासन से स्वीकृति नहीं मिलने से कृषि अनुसंधान व कृषि प्रसार का कार्य पिछड़ जाता है व रेंक में असर पड़ता है। केन्द्र की 100 प्रतिशत वित्त पोषित परियोजनाओं के पदों की स्वीकृति में देरी एक शोचनीय स्थिति है। यदि एक नजर में देखा जाए तो ज.ने.कृ.वि.वि. जबलपुर खाली पदों की भर्ती में देरी, अधोसंरचना विकास में ढील, अनुदान की राशि अटकना, केन्द्र की योजनाओं के रिक्त पद भरने के प्रस्तावों को राज्य सरकार से मंजूरी ना मिलने से राष्ट्रीय स्तर पर वि.वि. की रेंक तथा कृषि महाविद्यालयों की मान्यता, छात्रों के पठन-पाठन, कृषि अनुसंधान एवं कृषि प्रसार पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।

जनेकृविवि में शिक्षकों की स्थिति –

स्वीकृत पद –                               329
खाली पद –                                  165
गैर शैक्षणिक स्वीकृत पद –             927
खाली –                                        565

Share
Advertisements

Leave a Reply

Your email address will not be published.