मध्य प्रदेश के कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा कृषि विस्तार गतिविधियाँ जोरों पर

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15 मई 2023, भोपाल: मध्य प्रदेश के कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा कृषि विस्तार गतिविधियाँ जोरों पर – मध्यप्रदेश को कृषि क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए कृषि विश्विद्यालयों द्वारा कई सारी कृषि विस्तार गतिविधियां और योजनाएं चलाई जा रही हैं। इस सिलसिले में ग्वालियर के विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय ने रेडियो पर मिलेट्स ऑन एयर कार्यक्रम शुरू किया हैं। वही जबलपुर के कृषि विश्वविद्यालय में छात्रो को कृषि विकास के लिए हाइ-टेक और हाइड्रोपोनिक्स खेती परियोजनाओं के बारे में जानकारी देने के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया हैं।   

ग्वालियर कृ.विवि के एक्सपर्ट बतांएगे रेडियो पर श्री अन्न के फायदे

मिलेट्स पोषक तत्वों से भरपूर हैं, लेकिन इसके बाद भी भोजन की थाली से दूर हैं। इसके पीछे मुख्य वजह जानकारी का अभाव हैं। इसके लिए राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर ने रेडियो पर मिलेट्स ऑन एयर कार्यक्रम शुरू किया हैं। इसका प्रसारण हर रविवार को शाम 6:45 से 7 बजे तक होगा। कार्यक्रम 25 दिसंबर तक चलेगा। इस कार्यक्रम में देश के 35 एक्सपर्ट श्रीअन्न के फायदे और उनसे जुड़ी जानकारी लोगो को बतायेंगे।

राज्यपाल और कुलपति के लेक्चर प्रसारित

मिलेट्स स्कूल ऑन एयर कार्यक्रम के लिए राज्यपाल और विश्व विद्यालय के कुलपति प्रो. अरविंद कुमार शुक्ला के मिलेट्स के फायदो को लेकर लेक्चर रेडियो पर प्रसारित हो रहे हैं। 

हाई-टेक कृषि के साथ एग्रीकल्चर स्टार्टअप समय की आवश्यकता

वही जबलपुर कृषि विश्व विद्यालय के कुलपति डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा ने कहा कि भारतीय कृषि क्षेत्र में प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल की जबरदस्त क्षमता है, क्योंकि इससे देश की बहुत बड़ी आबादी जुड़ी हुई है। कुलपति डॉ. पीके मिश्रा ने कहा कि हमारी कृषि जो ग्रामीण क्षेत्रों की अवधारणा के अनुसार हो रही है, शहरी क्षेत्रों में भी कृषि विकास हाई-टेक कृषि के रूप में हो।

अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. अमित शर्मा ने कार्यशाला के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुये कहा कि भविष्य में विश्वविद्यालय के कृषि छात्रों के रोजगार, उच्च शिक्षा और कैरियर के बेहतर विकल्प के लिये अनेक कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे।

कार्यशाला में जनेकृविवि के पूर्व छात्र और एग्रीकॉन-2022 सदस्य एवं भारत, अफ्रीका और बांग्लादेश में हाइड्रोपोनिक्स एवं हाई-टेक खेती परियोजनाओं के सलाहकार और खेतीबाड़ी परियोजना,नई दिल्ली के संस्थापक निदेशक डॉ. प्रवीण सिंह इस क्षेत्र में अपने अनुभव और विशेषज्ञता को कर्मचारियों और छात्रों के साथ साझा किये। इस दौरान आपने कहा कि कृषि तकनीकी और कुछ नही बल्कि कृषि क्षेत्र में आधुनिक प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल कर उपज को बढ़ाने, कुशलता लाने और राजस्व में वृद्धि करने का उपाय है। भारत में बहुत से कृषि तकनीकी स्टार्टअप्स मुख्य रूप से बाजार आधारित हैं, जहां ई-कॉमर्स कंपनियां ताजे और ऑर्गेनिक फल और सब्जियां सीधे किसानों से खरीद कर बिक्री करती हैं, लेकिन हाल में बहुत से स्टार्टअप्स ने किसानों की कठिनाईयों के अभिनव टिकाऊ समाधान प्रदान करने शुरू किये हैं। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप्स अब बायो गैस संयंत्र, सौर ऊर्जा चलित प्रशीतन गृह, पानी पम्प करने, मौसम का पूर्वानुमान करने, छिड़काव करने वाली मशीन, बुआई की मशीन और वर्टिकल फार्मिंग जैसे समाधानों से किसानों को आय बढ़ाने में मदद कर रहे हैं। मुख्यवक्ता डॉ. प्रवीण ने छात्र-छात्राओं के सवालों के जवाब भी दिये और भविष्य में एक मकसद बनाकर भविष्य एवं कैरियर बनाने के लिये महत्वपूर्ण सुझाव एवं अनुभव साझा किये।

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