राज्य कृषि समाचार (State News)

खरीफ सीजन के बाद अब रबी सीजन में भी खाद की कमी किसानों को रूला रही है

29 नवंबर 2025, भोपाल: खरीफ सीजन के बाद अब रबी सीजन में भी खाद की कमी किसानों को रूला रही है – म.प्र. में खरीफ सीजन के बाद अब रबी सीजन में भी खाद की कमी किसानों को रूला रही है। यह पहला साल नहीं हैं जब प्रदेश में खाद की किल्लत हो रही है। रबी सीजन हो या खरीफ सीजन हर बार, हर साल किसान खाद के लिए मारामारी करता है, लंबी लाइन लगाता है, डंडे खाता है, कई दिन इंतजार करता है और नतीजा ये रहता है कि किसान को यदि खाद मिल भी जाती है तो उसे जितनी चाहिए उतनी नहीं। मजबूरन किसान दोगुने दामों में बाजार से खाद खरीदता है।

 इधर खाद व्यापारी भी कालाबाजारी करने से नहीं चूकते। इससे बड़ी विडंबना क्या होगी कि देश के लिए अन्न उगाने वाले अन्नदाता को समय पर पर्याप्त खाद नहीं मिल पाती। आलम यह है कि कुछ बोरी खाद के लिए अन्नदाता कडक़ड़ाती ठंड में खुले आसमान के नीचे सोने के लिए मजबूर हो रहे हैं। प्रदेश में खाद की मारामारी वाले जिलों की लंबी फेहरिस्त है। अधिकांश जिले ऐसे हैं जहां खाद के लिए किसान रात से ही कतारों में लग जाते हैं। बड़वानी, खंडवा, शिवपुरी सहित अन्य जिलों के किसान खरीफ फसलों की बुवाई के बाद सारे काम छोड़ कर खाद के लिए भटक रहे हैं।  बुरहानपुर, खरगोन, विदिशा, नर्मदापुरम जैसे कई जिले हैं जहां खाद के लिए किसानों को एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ रहा है।  समय पर खाद नहीं मिलने से सबसे ज्यादा असर बुवाई पर पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि समय से खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है।

प्रदेश में खाद के लिए किसान लगातार परेशान हो रहे हैं। हालात यह हैं कि किसान खाद वितरण केंद्रों पर खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को मजबूर हैं। सबसे ज्यादा खराब स्थिति गुना के बमोरी इलाके के बागेरी और गुना शहर की नानाखेड़ी मंडी स्थित डबल लॉक केंद्र की है। यहां किसान रात में ही आकर डेरा डाले हुए हैं और लाइनों में बिस्तर बिछाकर सो रहे हैं। उधर, कृषि विभाग के अधिकारी दावा कर रहे हैं कि जिले में खाद की कोई कमी नहीं है और आपूर्ति लगातार हो रही है। नानाखेड़ी मंडी स्थित डबल लॉक गोदाम पर लगभग 100 से ज्यादा किसान खुले आसमान के नीचे सोते हुए मिले। कुछ किसान ठंड से बचने के लिए अलाव ताप रहे थे और खाद न मिलने की अपनी परेशानियों पर बात कर रहे थे। कुछ किसानों के पास ओढऩे के लिए नहीं था, तो उन्होंने तिरपाल से ही खुद को ढक रखा था। प्रशासन के भरपूर खाद के दावे पर एक महिला किसान ने कहा कि खाद होता तो यहां तीन-चार दिन से पड़े रहना नहीं पड़ता। यहां लाइन में लग रहे हैं, तो भी उद्यम हो रहा है। गांव-गांव में खाद मिलता, तो जनता यहां क्यों पड़ी होती। 20-25 लोगों को खाद मिल पाता है और फिर बंद हो जाता है। जनता की कौन सुनवाई कर रहा है। कोई सुनवाई नहीं कर रहा।  

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