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राज्य कृषि समाचार (State News)

सेना में न चुने जाने के बाद बेलगावी के युवा किसान ने बायोफ्लॉक मछली पालन से कमाए लाखों, पीएम मोदी ने भी की चर्चा

26 सितंबर 2026, बेलगावी (कर्नाटक): सेना में न चुने जाने के बाद बेलगावी के युवा किसान ने बायोफ्लॉक मछली पालन से कमाए लाखों, पीएम मोदी ने भी की चर्चा –  कर्नाटक के बेलगावी जिले के बोडक्यानट्टी गांव के 27 वर्षीय राजू शिवलिंगप्पा हुड्डारा को भारतीय सेना में जगह नहीं मिली, और डेयरी फार्मिंग में भी हाथ आजमाया तो वह भी नहीं चला। इसके बाद राजू ने अपने पिता शिवलिंगप्पा सतप्पा हुड्डार के साथ मिलकर मछली पालन की राह चुनी, जो आज उनके परिवार के लिए कमाई का बड़ा जरिया बन चुकी है।

पिछले करीब तीन साल से यह पिता-पुत्र अपनी चार एकड़ पारिवारिक जमीन में से एक एकड़ पर बायोफ्लॉक तकनीक से मुरैल यानी माराल मछली (स्थानीय भाषा में “कुच्चु”) पाल रहे हैं। इस सफलता की चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी 29 मार्च 2026 को प्रसारित हुए “मन की बात” के 132वें एपिसोड में ग्रामीण नवाचार के उदाहरण के तौर पर की थी।

कैसे काम करता है बायोफ्लॉक मॉडल

राजू और उनके पिता ने अपनी जमीन पर वैज्ञानिक तरीके से डिजाइन किए गए चार तालाब बनाए हैं, जिनमें एयरेटर, पाइपलाइन, प्रोबायोटिक्स और निगरानी उपकरण लगे हैं। बायोफ्लॉक तकनीक में कम पानी और सीमित जगह में ही घने स्तर पर मछली पाली जाती है, और पानी में मौजूद फायदेमंद बैक्टीरिया व प्रोबायोटिक्स मछली के मल-मूत्र को ही आंशिक भोजन में बदल देते हैं, जिससे चारे की लागत भी कम आती है। हर 7 से 8 महीने के एक चक्र में करीब 15,000 मछलियां पाली जाती हैं, और तालाबों का पानी हर 15 दिन में बदला जाता है ताकि गुणवत्ता बनी रहे।

मछली के बीज आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा से मंगाए जाते हैं, और तैयार मछली सीधे खरीदारों को बेची जाती है ताकि बिचौलियों का हिस्सा बचाया जा सके और किसान को पूरा बाजार मूल्य मिल सके। इस मॉडल में शुरुआती निवेश करीब 30 से 31 लाख रुपये का रहा, जो तालाब निर्माण, एयरेटर और अन्य उपकरणों में खर्च हुआ। पहले 8 महीने के बैच से 25 लाख रुपये और दूसरे बैच से 22 लाख रुपये की कमाई हुई, जबकि बाजार में मछली 250 से 320 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिकती है।

राजू ने भारतीय सेना में असफल कोशिश और डेयरी फार्मिंग में नाकामी के बाद ही मछली पालन का रुख किया था। ईटीवी भारत से बातचीत में उन्होंने कहा, “पारंपरिक खेती में मुनाफा नहीं था, मैं कुछ नया करना चाहता था, और मछली पालन ने वह मौका दिया।” उनके पिता शिवलिंगप्पा ने द हंस इंडिया से कहा, “हमने कभी सोचा नहीं था कि प्रधानमंत्री हमारे बारे में बात करेंगे। यह हमारे लिए गर्व का पल है।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम “मन की बात” के 132वें एपिसोड में इस पिता-पुत्र की मेहनत को आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के उदाहरण के तौर पर सामने रखा था। इसके बाद इस परिवार की कहानी राज्य और राष्ट्रीय स्तर के मीडिया में सुर्खियों में आई, जिससे इलाके के दूसरे युवाओं में भी मछली पालन को लेकर दिलचस्पी बढ़ी है।

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